लेखकः स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया
भविष्य वाणी निरस्त
नाना साहब डेंगले नाम के एक बड़े ज्योतिषी ने एक दिन बापू साहब बूटी से कहा, "आज का दिन आपके लिये अशुभ और अनिष्टकारी है। आज आपके जीवन को खतरा है।" यह भविष्य वाणी सुन कर बापू साहब बूटी बहुत बेचैन हो गये। नित्य की भाँति जब वे साईं बाबा के दर्शन करने के लिये मस्जिद में आये तब बाबा ने उनसे कहा, "यह नाना क्या कहता है? उसने आज तुम्हारी मृत्यु की भविष्य वाणी की है। तुम्हें घबराने और डरने की कोई जरूरत नहीं है। उसे बहादुरी से बता दो कि मौत तुम्हें नहीं ले जायेगी।"
उसी दिन शाम के समय जब बापू साहब बूटी शौच के लिये अपने शौचालय में गये तब वहाँ उन्होंने एक काला विषैला साँप देखा। उन्होंने अपने नौकर को एक बड़ी लाठी लाने के लिये कहा। जब वह लाठी ले कर आया तब उसने साँप को दूर जाते हुये देखा। साँप जल्दी ही गायब हो गया। इस प्रकार साईं बाबा ने ज्योतिषी डेंगले की भविष्य वाणी को निरस्त कर दिया - "भाविहिं मेटि सकैं त्रिपुरारी।"
दूर हट, नीच उतर
एक बार शामा के हाथ की कनिष्ठा उंगली को एक जहरीले साँप ने काट दिया और उसके शरीर में विष फैलने लगा। शिरडी में विठोबा का मन्दिर था जहाँ सर्प दंश का इलाज किया जाता था। कुछ लोग शामा को वहाँ ले जाना चाहते थे पर शामा का एक मात्र सहारा तो साईं बाबा ही थे। वह दौड़ता हुआ मस्जिद की ओर गया और मस्जिद की सीढ़ियों पर चढ़ने लगा। तभी साईं बाबा क्रोध से गरज उठे, "उतर, उतर, दूर हट, नीचे उतर।" सुन कर शामा सन्न रह गया। उसने सोचा कि मस्जिद और बाबा के चरण ही मेरे रक्षक हैं। जब बाबा ही भगा रहे हैं तब मेरा कहाँ ठिकाना? उसके पैर वहीं जकड़ गये और वह खड़ा रह गया। पर सचाई कुछ और ही थी। वास्तव में साईं बाबा ने साँप के जहर को "दूर हट, नीचे उतर" कह कर फटकारा था न कि शामा को।
साईं बाबा कुछ ही क्षणों में शान्त हो कर ध्यान मग्न हो गये। यह देख कर शामा मस्जिद के भीतर जा कर उनके चरणों के पास बैठ गया। बाबा ने आँखें खोलीं और शान्त तथा मधुर स्वर में बोले, "शामा, डरो मत। तिल भर भी फिकर मत करो। बाहर मत निकलना।" शामा के घर चले जाने पर साईं बाबा ने तुरन्त तात्या कोते पाटिल और काका साहब दीक्षित को उसके घर यह निर्देश दे कर भेजा कि वह जो इच्छा हो वह खा सकता है, घर के भीतर इधर-उधर टहल सकता है पर कभी भी लेटे और सोये नहीं। साईं बाबा के निर्देशों का अक्षरशः पालन किया गया और शामा भयंकर जहरीले सर्प दंश से बचा लिया गया।
(क्रमशः)
8:29 AM
जी.के. अवधिया








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