Saturday, August 29, 2009

हमसे तो एक बार गलती हो गई अब कान पकड़ते हैं

बिन्दास लिखिए भाई! जैसा जी चाहे वैसा लिखिए। लेखनी आपकी है ब्लोग आपका है।

किसी और ने कुछ लिखा है उसका आप जैसा चाहें अर्थ निकाल सकते हैं, चाहें तो निवेदन समझें, चाहें लिखने वाले की अपनी भाषा के प्रति प्रेम समझें या फिर उसका दूसरों पर रोब जमाना समझें, जो भी चाहें आप समझ सकते हैं क्योंकि समझ भी आपकी है।

अभिव्यक्ति भी आपकी है और अभिव्यक्त करने के लिए भाषा भी आपकी है। आपकी इच्छा है जैसी भाषा में चाहें वैसी भाषा में अभिव्यक्त करें।

हमसे तो एक बार गलती हो गई अब कान पकड़ते हैं, आइंदा ऐसी गलती करने से बचने का पूरा पूरा प्रयास करेंगे।


हाँ पर लिखना हम भी नहीं छोड़ेंगे। चाहे आपको हमारा लिखना अच्छा लगे या न लगे। यह अवश्य प्रयत्न करेंगे कि हमारे लिखने से किसी को बुरा न लगे।

4 टिप्पणियाँ:

संजय बेंगाणी said...

आपने जो बात कही, पहले भी बहुत बार कही जा चुकी है. सर्वज्ञ कोई नहीं होता अतः बिना घबराए लिखते रहना चाहिए. वर्तनी दोष बूरा नहीं है, उसे सुधारने की कोशिश न करना और उसे सही साबित करना बूरा है. अगर आप लिख रहे हो तो आपका कर्तव्य बनता है कि शुद्ध लिखें, वैसे ही जैसे अगर आप बोलते हो तो शालिन भाषा का उपयोग करें. मगर हर कोई स्वतंत्र है...

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

अये क्यों? आप तो बेहिचक लिखें जी। ब्लॉग है ही पोस्ट ठेलने को।
वर्तनी ठीक होनी चाहिये यह बता आपने गलत कहां कहा?

AlbelaKhatri.com said...

जय हिन्द !

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

आप ने कोई गलती नहीं की। पर कभी सही काम के भी बुरे परिणाम आते हैं और उन के लिए तैयार रहना चाहिए।

 
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