बड़ी शर्मिंदगी होती है अपने आप पर जब यह सोचता हूँ कि मुझे अपने राष्ट्रगान का अर्थ नहीं पता है। बचपन से ही राष्ट्रगान याने कि 'जनगणमन' सुनते और गाते चला आ रहा हूँ। स्कूल में पढ़ता था तो प्रार्थना में रोज ही गवाया जाता था। बीच में एक दौर ऐसा भी आया था कि सिनेमा हॉल में फिल्म की समाप्ति पर राष्ट्रगान दिखाना और सुनाना अनिवार्य कर दिया गया था। पर शर्मिंदा हूँ कि आज तक इसका अर्थ नहीं जानता। कैसे जानूँ आखिर? गवाते और सुनाते तो सभी थे पर अर्थ किसी ने नहीं बताया। पुस्तकों में राष्ट्रगान तो छपा होता था पर उसका अर्थ कहीं पर भी छपा नहीं दिखाई देता था। समझ में नहीं आता कि इसका अर्थ कैसे जानूँ। जिससे भी पूछो वही कन्नी काट के निकल लेता है।
यदि आप लोगों में से किसी को राष्ट्रगान का अर्थ पता है तो मुझे भी बताइए ना!
Online English Test 3
3 hours ago
9:04 AM
जी.के. अवधिया
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10 टिप्पणियाँ:
यह अंग्रेजों की स्तुति में बनाया हुआ गान है। जिसमें अधिनायक अंग्रेज हैं।
manyawaar,
majuhe nahi maloom ki aap ka yah prash sachmuch ka prashn hai ya iske peeche koi gambheer baat chhupi hai ...lekin dekha to chala
aaye....aur sankoch ke saath yah bhi kah rahe hain ki pahli baar aaye hain aapke blog par...yah mera durbhagya hi maan lijiye...khair jaisa ki aapka prashn tha hamne apne blog par kuch likha tha socha aap shyad yahi jaanana chahte hain isliye iska de rahe hain..
aabhaar..
कहते हैं गुरुदेव रविन्द्र नाथ ठाकुर ने इसे जॉर्ज पंचम की स्तुति में लिखा था...
जन गण मन अधिनायक जय हे,
(हे भारत के जन गण और मन के नायक(जिनके हम अधीन हैं)
भारत-भाग्य-विधाता
(आप भारत के भाग्य के विधाता हैं)
पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा,
(वह भारत जो पंजाब, सिंध, गुजरात, महाराष्ट्र,)
द्वाविड़, उत्कल, बंग
(तमिलनाडु, उड़ीसा, और बंगाल जैसे प्रदेश से बना है)
विन्ध्य, हिमाचल, यमुना-गंगा,
(जहाँ विन्ध्याचल तथा हिमालय जैसे पर्वत हैं और यमुना-गंगा जैसी नदियाँ हैं)
उच्छल जलधि तरंगा
(और जिनकी तरंगे उच्छश्रृंखल होकर उठतीं हैं)
तव शुभ नामे जागे
(आपका शुभ नाम लेकर ही प्रातः उठते हैं )
तव शुभ आशिष माँगे
(और आपके आर्शीवाद की याचना करते हैं )
जन-गण-मंगलदायक जय हे,
(आप हम सभी जनों का मंगल करने वाले हैं, आपकी जय हो)
गाहे तव जयगाथा,
(सभी आपकी ही जय की गाथा गायें)
जन-गण-मंगलदायक जय हे
(हे जनों का मंगल करने वाले आपकी जय हो)
भारत भाग्य विधाता
(आप भारत के भाग्य विधाता हैं)
जय हे, जय हे, जय हे,
(आपकी जय हो, जय हो, जय हो,)
जय, जय, जय, जय हे
(जय, जय, जय, जय हो)
http://swapnamanjusha.blogspot.com/2009/08/blog-post_17.html
Ji haan Awadhiya ji,
Bharat ke bhagya Vidhata ke adheen ki hi baat kar rahe hain ..
Adhinayak ka arth 'Tanashaah' bhi hota hai isi liye maine koshthak mein 'jinke ham adheen hain' likha tha ..
aasha hai aapke prashnon ka uttar de paaye ham..
अदाजी आप मूल प्रश्न का उत्तर नहीं दे पाई है. ये शाब्दिक अर्थ तो पता ही है. नहीं पता तो यह कि यह अधिनायक है कौन? किसकी स्तुति गाते है हम? और क्यों? यह नेहरू की बेवकुफी से अधिक कुछ नहीं.
वैसे आज "जन-गण" राष्ट्रगीत है. वन्दे-मातरम राष्ट्रगान है.
संजय जी, राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के विषय में बताने के लिए धन्यवाद!
जहाँ तक मुझे याद है हमारे समय में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों का अर्थ एक ही लिया जाता था। अब ये दो हो गये हैं यह मुझे नहीं पता था इसलिए मुझसे "जन-गण" को राष्ट्रगान समझने की भूल हो गई।
क्या अवधिया जी ,
क्या फालतू का टेंसन पैदा कर देते हो, सुबह-सुबह लोगो के दिमाग में ! जहा बज रहा होगा हम भी चुपचाप ५२ सेकंड के लिए सावधान खड़े हो जाया करेंगे , उसका अर्थ का होता है, नहीं भी मालूम तो उससे क्या फर्क पड़ता है ?
लोगो को कौन सा यह मालूम है कि अधिनायक कौन है मोहन जी है कि माताजी अथवा भैया जी ..... हमें भी क्या, भाड़ में गई दुनियादारी ! :-)
संजय बेंगाणी जी की टिपण्णि से सहमत है जी, ओर अदा जी ने भी सही लिखा है कि यह ...कहते हैं गुरुदेव रविन्द्र नाथ ठाकुर ने इसे जॉर्ज पंचम की स्तुति में लिखा था...
वेसे हम ने अपने आप उस समय कुछ भी तेयार नही किया सबिधान भी इधर उधर से उठा रखा है, जय हो नेहरु चा चा, जब मकान की नींव ही कमजोर पडी हो तो मकान कितने समय खडा रह सकता है?
अवधिया जी .. अच्छा किया ये पोस्ट दाल कर ... हम तो इस पुरे विषय वास्तु से अनभिज्ञ थे .... आपके पोस्ट से बहुत कुछ सिखने को मिल रहा है ...
चलते चलते इतना तो ...... भारत की दुर्दशा का सबसे बड़ा कारन नेहरु है ... नेहरु है .....
माफी चाहूँगा, आज आपकी रचना पर कोई कमेन्ट नहीं, सिर्फ एक निवेदन करने आया हूँ. आशा है, हालात को समझेंगे. ब्लागिंग को बचाने के लिए कृपया इस मुहिम में सहयोग दें.
क्या ब्लागिंग को बचाने के लिए कानून का सहारा लेना होगा?
Suresh Chauhan said....
Jan gan man ek gulami ka partik geet h,jo angrege adhikari geo.. pancham ki stuti me calcutta jansbha me year 1911 me (welcome song ke roop me) gaya gya.
Isse adhik chatukarita/talve chatne
ki baat dusri nahi ho sakti h.Lanat h ase desh ke gddaaro ko.
(((VANDE MAATRAM)))
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