Wednesday, July 14, 2010

उलझने का नइ टपका डालूँगा


बच्चा समझता है स्साला! जानता नइ कितना बड़ा 'भाई' हूँ!!
फोटो : वोर्थ१०००.कॉम के सौजन्य से !

15 टिप्पणियाँ:

संजीव तिवारी .. Sanjeeva Tiwari said...

उई रामा ! भाई चाकू लेके आई रेला है, भागो .... !

ajit gupta said...

इस भाई को किस देश से ले आए हैं? अरे बाप रे बाप बड़ा डर लग रहा है।

बिलासपुर टाईम्स said...

shaandaar !

honesty project democracy said...

अवधिया जी इस भाई को हमारे देश के गरीबों का खून चूसने वाले मंत्रियों के पीछे लगा दीजिये ,क्या पता इस भाई को देखकर भ्रष्ट मंत्रियों को थोरी शर्म आ जाये ...!

रंजन said...

mast

प्रवीण पाण्डेय said...

बड़ा डर लग रहा है

P.N. Subramanian said...

गजब का शाट

राज भाटिय़ा said...

टिपण्णी देदे वर्ना इस भाई को भेज दुंगा... समझे क्या एक खोखा टिपाण्णी

Udan Tashtari said...

अब जान गये इसलिए बिना नानुकुर के टिप्पणी करके जा रहे हैं. फिर बुलाओगे, तो फिर आयेंगे. :)

राजकुमार सोनी said...

बहुत ही चिन्तनीय पोस्ट.
बच्चे के हाथ में चाकू


बच्चों के नन्हें हाथों तो चांद-सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़कर वे भी हम जैसे हो जाएंगे

जो काम बाद में करना है वह अभी से.
कहां से लाएं अवधिया जी इतनी खतरनाक फोटो

अजय कुमार said...

धान के देश में
भाई बच्चे के भेष में ॥

शिवम् मिश्रा said...

एक बेहद उम्दा पोस्ट के लिए आपको बहुत बहुत बधाइयाँ और शुभकामनाएं !
आपकी चर्चा ब्लाग4वार्ता पर है यहां भी आएं

Divya said...

jabardast !

ललित शर्मा said...

बच्चे के हाथ में छूरा- बहुत गलत बात है।


आईए "ब्रह्माण्ड भैंस सुंदरी प्रतियोगिता" में

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

पोज़ बढ़िया है...लेकिन केवल फोटो खिंचाने तक ही ..

 
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