भारत की प्रथम फिल्म
दादा साहेब फाल्के द्वारा निर्मित फिल्म "राजा हरिश्चन्द्र", जो कि 3 मई 1913 को रिलीज़ हुई थी, को भारत का प्रथम फिल्म माना जाता है। 50 मिनट की 3700 फीट लंबी यह फिल्म चार रीलों की थी। यहाँ पर यह उल्लेखनीय है कि श्री एच.एस. भटवडेकर और श्री हीरालाल सेन नामक व्यक्तियों ने क्रमशः मुंबई (पूर्व नाम बंबई) और कोलकाता (पूर्व नाम कलकत्ता) में लघु चलचित्रों का निर्माण प्रारंभ कर दिया और सन् 1899 मे श्री भटवडेकर ने भारत के प्रथम लघु चलचित्र बनाने में सफलता प्राप्त की किन्तु दादा साहेब फाल्के के फिल्म "राजा हरिश्चन्द्र" को भी भारत की पहली फिल्म होने का गौरव प्राप्त है।
यहाँ पर यह बताना अनुचित नहीं होगा कि बेआवाज फिल्मों के जमाने की प्रमुखतः धार्मिक फिल्मों का प्रचल रहा; उस जमाने की कुछ प्रमुख फिल्में हैं - भस्मासुर मोहनी, सत्यवान-सावित्री, लंका दहन, कृष्ण जन्म, कालिया मर्दन, बालि-सुग्रीव, नल-दमयंती, परशुराम, दक्ष प्रजापति, सत्यभामा विवाह, द्रौपदी वस्त्रहरण, जरासंध वध, शिशुपाल वध, लव-कुश, सती महानंदा, सेतुबंधन, वत्सला हरण, गज गौरी, कृष्णावतार, सती पद्मिनी, सावित्री, मुरलीवाला, लंका, गोपालकृष्ण।
भारत की प्रथम महिला फिल्म कलाकार
दुर्गाबाई और उनकी पुत्री कमलाबाई गोखले भारत की पहली महिला फिल्म कलाकार हैं जिन्होंने दादा साहेब फाल्के की दूसरी बेआवाज फिल्म "मोहिनी भस्मासुर", जो कि सन् 1913 में बनी थी, में अभिनय किया था।
भारत की प्रथम बॉक्स आफिस हिट फिल्म
सन् 1917 में दादा साहेब फाल्के द्वारा बनाई गई फिल्म "लंका दहन", जो कि बंबई (वर्तमान मुंबई) में 23 हफ्ते तक चली थी, भारत की पहली बॉक्स आफिस हिट फिल्म है। उपलब्ध रेकॉर्ड के अनुसार इसकी टिकट खिड़की की आमदनी इतनी अधिक थी कि उसके परिवहन के लिए सशस्त्र सुरक्षादल से रक्षित बैलगाड़ी का प्रयोंग किया गया था!
भारत की प्रथम सेंसर सर्टिफिकेट वाली फिल्म
भारत में सन् 1918 में सेंसरशिप एक्ट बनाया गया जिसके अन्तर्गत् सन् 1920 में प्रदर्शित फिल्म "आर्फन्स आफ द स्टोर्म" को सेंसर बोर्ड के समक्ष लाया गया तथा इस फिल्म के कुछ दृश्यों को काटने के बाद सेंसर बोर्ड ने इसे प्रदर्शन के लिए सर्टिफिकेट प्रदान किया था। यही भारत की पहली सेंसर सर्टिफिकेट वाली फिल्म है।
भारत की प्रथम प्रतिबन्धित (Banned) फिल्म
सन् 1921 में प्रदर्शित फिल्म "भक्त विदुर" भारत की पहली फिल्म है जिसे कि सेंसरशिप के अन्तर्गत सिंध तथा मद्रास (वर्तमान चेन्नई) में प्रदर्शन के लिए प्रतिबन्धित किया गया था।
भारत की प्रथम सवाक् (बोलती) फिल्म
अर्देशिर ईरानी की फिल्म "आलम आरा", जो कि फरवरी 1931 में प्रदर्शित हुई थी, भारत की पहली सवाक् (बोलती) फिल्म है। 10,500 फीट लंबी इस फिल्म में सात गाने थे।
भारत की प्रथम सवाक् (बोलती) फिल्म महिला कलाकार
सन् 1931 में प्रदर्शित पहली सवाक् (बोलती) फिल्म "आलम आरा" की नायिका रानी जुबैदा थीं, अतः वे ही भारत की पहली सवाक् (बोलती) फिल्म महिला कलाकार हैं। फिल्म "आलम आरा" के प्रदर्शन के पहले रानी जुबैदा ने 36 बेआवाज फिल्मों में भी काम किया था।
भारत का प्रथम फिल्मी गाना
सन् 1931 में प्रदर्शित पहली सवाक् (बोलती) फिल्म "आलम आरा" के लिए पहली बार डब्ल्यू एम खान ने "दे दे खुदा के नाम पर प्यारे" गाना गाया था।
भारत में प्रथम फिल्म संगीत निर्देशन
सन् 1931 में प्रदर्शित पहली सवाक् (बोलती) फिल्म "आलम आरा" के लिए पहली बार फीरोजशाह मिस्त्री और बी ईरानी ने मिलकर संगीत निर्देशन का कार्य किया।
हिन्दी फिल्म में प्रथम बार अंग्रेजी गाना
सन् 1933 में प्रदर्शित फिल्म "कर्मा" में पहली बार देविका रानी ने एक अंग्रेजी गाना गाया था जिसके बोल थे - "Now The Moon Her Light Has Shed"। इस गाने के लिए Earnest Broadhurst नामक संगीतकार ने संगीत की रचना की थी।
भारत में प्रथम बार प्लेबैक सिस्टम
आर.सी. बोराल ने सन् 1935 में प्रदर्शित अपनी फिल्म "धूप छाँव" में पहली बार प्लेबैक सिस्टम का प्रयोग किया। इस फिल्म के एक समूहगान (chorus) को पारुल घोष ने सुप्रोवा सरकार और हरिमती के साथ मिलकर गाया था, तीनों गायिका ने फिल्म में काम करने वाली अन्य कलाकारों के लिए यह गाना गाया। उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व फिल्म में गानों को फिल्म के कलाकारों के द्वारा ही गाया जाना पड़ता था।
भारत की प्रथम महिला फिल्म संगीतकार
सन् 1935 में प्रदर्शित फिल्म "तलाश ए हक़" के लिए विख्यात कलाकारा नर्गिस की माँ जद्दनबाई ने संगीत दिया। उसी वर्ष बाम्बे टॉकीज की फिल्म "जवानी की हवा" के लिए सरस्वती देवी नामक महिला ने भी संगीत दिया।
भारत की प्रथम गोल्डन जुबली फिल्म
प्रभात सिनेमा के द्वारा सन् 1936 में निर्मित मराठी फिल्म "सन्त तुकाराम" भारत की पहली गोल्डन जुबली फिल्म है जो कि एक साल से भी अधिक समय तक चली थी। इस फिल्म का निर्देशन दामले और फतेहलाल ने किया था।
भारत की पहली रंगीन फिल्म
अर्देशिर ईरानी निर्मित तथा सन् 1937 में प्रदर्शित फिल्म "किसान कन्या" भारत की पहली रंगीन फिल्म थी। उल्लेखनीय है कि भारत की दूसरी रंगीन फिल्म सन् 1938 में निर्मित "मदर इण्डिया" है।
भारत की प्रथम सिनेमास्कोप फिल्म
सन् 1959 में प्रदर्शित गुरुदत्त की फिल्म "कागज के फूल" भारत की प्रथम सिनेमास्कोप फिल्म है। उल्लेखनीय है कि "कागज के फूल" एक श्वेत-श्याम (Black & White) फिल्म थी। सन् 1961 में प्रदर्शित महेश कौल की फिल्म "प्यार की प्यास" पहली रंगीन सिनेमास्कोप फिल्म है।
भारत की प्रथम 70-mm फिल्म
सन् 1967 में प्रदर्शित "अराउंड द वर्ल्ड" भारत की पहली 70-mm फिल्म है।
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आपको इस प्रश्नावली को हल करने में अवश्य ही आनन्द आएगा - हिन्दी प्रश्नावली – 1

11:22 AM
जी.के. अवधिया










8 टिप्पणियाँ:
अपके पास तो फिल्मी ग्यान का भंडार है। अच्छी जानकारी। धन्यवाद।
बेहद उम्दा जानकारीयो से भरी हुयी पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार !
उम्दा जानकारी..
बहुत ही बढिया जानकारी।
आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (25/10/2010) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा।
http://charchamanch.blogspot.com
जानकारी का बेहतरीन संकलन ।
इस सुंदर जानकारी के लिये धन्यवाद
फुटकर मिलने वाली जानकारी आपने अच्छी तरह एक साथ सजा दी है, बधाई.
यह बेहतरीन जानकारी दी.
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