प्रस्तुत हैं हिन्दी की कुछ लोकोक्तियाँ तथा मुहावर और उनका अर्थ। उनके अर्थ मैंने अपनी अल्पबुद्धि के अनुसार बनाए हैं और उनमें त्रुटि की सम्भावना है अतः यदि आपको त्रुटियाँ नजर आएँ तो कृपया टिप्पणी करके सूचित करने का कष्ट करें।
अपनी गॉंठ पैसा तो पराया आसरा कैसा
अर्थः समर्थ व्यक्ति को दूसरे के आसरे की आवश्यकता नहीं होती।
अपनी चिलम भरने के लिए दूसरे का झोपड़ा जलाना
अर्थः अपने छोटे से स्वार्थ के लिए दूसरे की भारी हानि कर देना।
अपनी छाछ को कोई खट्टा नहीं कहता
अर्थः अपनी चीज़ को कोई खराब नहीं बताता।
अपनी जाँघ उघारिए आपहि मरिए लाज
अर्थः अपने अवगुणों को दूसरों के समक्ष प्रस्तुत करके आप ही पछताना।
अपनी नींद सोना, अपनी नींद जागना
अर्थः मर्जी का मालिक होना।
अपनी नाक कटे तो कटे दूसरों का सगुन तो बिगड़े
अर्थः दूसरों का नुकसान करने के लिए अपने नुकसान की भी परवाह न करना।
अपनी पगड़ी अपने हाथ
अर्थः व्यक्ति अपनी इज्जत की रक्षा स्वयं ही कर सकता है।
अपने किए का क्या इलाज
अर्थः अपने द्वारा किए गए कर्म का फल भोगना ही पड़ता है।
अपने मरे बिना स्वर्ग नहीं दिखता
अर्थः दूसरों के भरोसे काम नहीं होता, सफलता पाने के लिए स्वयं परिश्रम करना पड़ता है।
अपने पूत को कोई काना नहीं कहता
अर्थः अपनी चीज को कोई बुरा नहीं कहता।
अपने मुँह मिया मिट्ठू बनाना
अर्थः अपनी बड़ाई आप करना।
अब की अब, तब की तब
अर्थः भविष्य की चिंता छोड़कर वर्तमान की ही चिंता करनी चाहिए।
अब सतवंती होकर बैठी लूट लिया सारा संसार
अर्थः उम्र भर बुरे कर्म करने के बाद अच्छा होने का दिखावा करना।
अभी तो तुम्हारे दूध के दाँत भी नहीं टूटे
अर्थः अभी तुम नादान हो।
अभी दिल्ली दूर है
अर्थः सफलता अभी दूर है।
अरहर की टट्टी गुजराती ताला
अर्थः मामूली वस्तु की रक्षा के लिए खर्च की परवाह न करना।
अजब तेरी माया, कहीं धूप कहीं छाया
अर्थः जीवन में सुख और दुःख आते ही रहते हैं।
अशर्फियाँ लुटाकर कोयलों पर मोहर लगाना
अर्थः अच्छे-बुरे का ज्ञान न होना।
आँख एक नहीं कजरौटा दस-दस
अर्थः व्यर्थ का आडम्बर करना।
Online English Test 2
3 hours ago
11:47 AM
जी.के. अवधिया








3 टिप्पणियाँ:
यह तीनों पोस्ट सुन्दर संग्रह है।
संग्रहणीय हैं...
जारी रखें, इस सिलसिले को.
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