Friday, December 31, 2010

सरकारी नौकरों की सेवानिवृति होती है तो सरकार चलाने वालों की सेवानिवृति क्यों नहीं होती?

कानूनन सरकारी नौकरों को अधिकतम साठ साल की उम्र तक ही काम करने दिया जा सकता है।

  • क्या साठ साल की उम्र पार होते ही उनकी कार्यक्षमता समाप्त हो जाती है जो उन्हें सेवानिवृत कर दिया जाता है?
  • यदि ऐसा है तो साठ साल की उम्र के बाद नेताओं की कार्यक्षमता क्यों और कैसे बनी रहती है?
  • एक सरकारी नौकर यदि 60 साल की उम्र के बाद कार्यालय चलाने में अक्षम हो जाता है तो फिर 78 साल की उम्र में भी हमारे प्रधानमन्त्री देश कैसे चला रहे हैं?
  • क्या देश में कानून सभी के लिए एक जैसे नहीं होने चाहिए?
  • यदि 78 साल की उम्र में भी हमारे प्रधानमन्त्री देश कैसे चला रहे हैं तो 60 साल की उम्र के बाद सरकारी नौकरों को दफ्तर चलाने की अनुमति नहीं देना चाहिए?
  • क्या जनता और नेता के लिए अलग अलग नियम-कानून हैं?

13 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय said...

नियम और कार्यप्रणाली, दोनों ही अलग हैं।

arganikbhagyoday said...

sochane ki bat hai !

सुज्ञ said...

बात में दम है।

Rahul Singh said...

सरकार चलाने वालों को हर पांचवे साल और कभी-कभी जल्‍दी भी परीक्षा में पास होना पड़ता है.

अन्तर सोहिल said...

विचारणीय सवाल है

प्रणाम

राज भाटिय़ा said...

सही कहा जी आप ने

महेन्द्र मिश्र said...

कायदे से यही होना चाहिए .. ... नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनायें ...

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

आप से सहमत...

ललित शर्मा said...


नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं

चुड़ैल से सामना-भुतहा रेस्ट हाउस और सन् 2010 की विदाई

राज भाटिय़ा said...

आप को परिवार समेत नये वर्ष की शुभकामनाये.

ललित शर्मा said...


नूतन वर्ष 2011 की शुभकामनाएं

आपकी पोस्ट 1/1/11-1/11 की प्रथम वार्ता में शामिल है।

खुशदीप सहगल said...

सुदूर खूबसूरत लालिमा ने आकाशगंगा को ढक लिया है,
यह हमारी आकाशगंगा है,
सारे सितारे हैरत से पूछ रहे हैं,
कहां से आ रही है आखिर यह खूबसूरत रोशनी,
आकाशगंगा में हर कोई पूछ रहा है,
किसने बिखरी ये रोशनी, कौन है वह,
मेरे मित्रो, मैं जानता हूं उसे,
आकाशगंगा के मेरे मित्रो, मैं सूर्य हूं,
मेरी परिधि में आठ ग्रह लगा रहे हैं चक्कर,
उनमें से एक है पृथ्वी,
जिसमें रहते हैं छह अरब मनुष्य सैकड़ों देशों में,
इन्हीं में एक है महान सभ्यता,
भारत 2020 की ओर बढ़ते हुए,
मना रहा है एक महान राष्ट्र के उदय का उत्सव,
भारत से आकाशगंगा तक पहुंच रहा है रोशनी का उत्सव,
एक ऐसा राष्ट्र, जिसमें नहीं होगा प्रदूषण,
नहीं होगी गरीबी, होगा समृद्धि का विस्तार,
शांति होगी, नहीं होगा युद्ध का कोई भय,
यही वह जगह है, जहां बरसेंगी खुशियां...
-डॉ एपीजे अब्दुल कलाम

नववर्ष आपको बहुत बहुत शुभ हो...

जय हिंद...

अविनाश वाचस्पति said...

नये वर्ष में इंटरनेट से इंट्रेस्टिंग प्रवेश
पेट्रोल पानी मिट्टी का तेल बचायेगा
जो आयेगा ग्‍यारह में आशीष भरपूर पायेगा
यह इंटरनेट है प्‍यारे
सदा ही यूं गुदगुदायेगा
10 का 11
11 का 111

 
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