प्रस्तुत हैं हिन्दी की कुछ लोकोक्तियाँ तथा मुहावरे और उनके अर्थ। उनके अर्थ मैंने अपनी अल्पबुद्धि के अनुसार बनाए हैं और उनमें त्रुटि की सम्भावना है अतः यदि आपको त्रुटियाँ नजर आएँ तो कृपया टिप्पणी करके सही अर्थ बताने का कष्ट करें।
चक्की में कौर डालोगे तो चून पाओगे
अर्थः कुछ पाने के लिए कुछ लगाना ही पड़ता है।
चट मँगनी पट ब्याह
अर्थः त्वरित गति से कार्य होना।
चढ़ जा बेटा सूली पर, भगवान भला करेंगे
अर्थः बिना सोचे विचारे खतरा मोल लेना।
चने के साथ कहीं घुन न पिस जाए
अर्थः दोषी के साथ कहीं निर्दोष न मारा जाए।
चमगादड़ों के घर मेहमान आए, हम भी लटके तुम भी लटको
अर्थः गरीब आदमी क्या आवभगत करेगा।
चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए
अर्थः महा कंजूस।
चमार चमड़े का यार
अर्थः स्वार्थी व्यक्ति।
चरसी यार किसके दम लगाया खिसके
अर्थः स्वार्थी व्यक्ति स्वार्थ सिद्ध होते ही मुँह फेर लेता है।
चलती का नाम गाड़ी
अर्थः कार्य चलते रहना चाहिए।
चाँद को भी ग्रहण लगता है
अर्थः भले आदमी की भी बदनामी हो जाती है।
चाकरी में न करी क्या?
अर्थः नौकरी में मालिक की आज्ञा अवहेलना नहीं की जा सकती।
चार दिन की चाँदनी फिर अँधियारी रात
अर्थः सुख थोड़े ही दिन का होता है।
चिकना मुँह पेट खाली
अर्थः देखने में अच्छा-भला भीतर से दु:खी।
चिकने घड़े पर पानी नहीं ठहरता
अर्थः लिर्लज्ज़ आदमी पर किसी बात का असर नहीं पड़ता।
चिकने मुँह को सब चूमते हैं
अर्थः समृद्ध व्यक्ति के सभी यार होते हैं।
चिडिया की जान गई, खाने वाले को मजा न आया
अर्थः भारी काम करने पर भी सराहना न मिलना।
चित भी मेरी पट भी मेरी अंटी मेरे बाबा का
अर्थः हर हालत में अपना ही लाभ देखना।
चिराग तले अँधेरा
अर्थः पास की चीज़ दिखाई न पड़ना।
चिराग में बत्ती और आँख में पट्टी
अर्थः शाम होते ही सोने लगना।
10:49 AM
जी.के. अवधिया








5 टिप्पणियाँ:
जानकारी को अपडेट कराने के लिये धन्यवाद.
चिराग में ... शायद इस अर्थ में भी प्रयोग होता है कि अंधेरा होते ही चीजें ओझल होने लगती हैं.
ज्ञान बढ़ रहा है।
बहुत सुंदर जी
जानकारी केलिए धन्यवादजी,
आँख में राई-नोन माने क्या है?
यशपालजी की कहानी
आदमी के बच्चे में देखा।
I m from Kerala
plz help me
parazak@gmail.com
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