प्रस्तुत हैं हिन्दी की कुछ लोकोक्तियाँ तथा मुहावरे और उनके अर्थ। उनके अर्थ मैंने अपनी अल्पबुद्धि के अनुसार बनाए हैं और उनमें त्रुटि की सम्भावना है अतः यदि आपको त्रुटियाँ नजर आएँ तो कृपया टिप्पणी करके सही अर्थ बताने का कष्ट करें।
छलनी कहे सूई से तेरे पेट में छेद
अर्थः अपने अवगुणों को न देखकर दूसरों की आलोचना करना।
छाज (सूप) बोले तो बोले, छलनी भी बोले जिसमें हजार छेद
अर्थः ज्ञानी के समक्ष अज्ञानी का बोलना।
छीके कोई,नाक कटावे कोई
अर्थः किसी के दोष का फल किसी दूसरे के द्वारा भोगना।
छुरी खरबूजे पर गिरे या खरबूजा छुरी पर
अर्थः हर तरफ से हानि हानि होना।
छोटा मुँह बड़ी बात
अर्थः अपनी योग्यता से बढ़कर बात करना।
छोटे मियाँ तो छोटे मियाँ,बड़े मियाँ सुभानअल्लाह
अर्थः छोटे के अवगणों से बड़े के अवगुण अधिक होना।
जंगल में मोर नाचा किसने देखा
अर्थः कद्र न करने वालों के समक्ष योग्यता प्रदर्शन।
जड़ काटते जाएं, पानी देते जाएं
अर्थः भीतर से शत्रु ऊपर से मित्र।
जने-जने की लकड़ी, एक जने का बोझ
अर्थः अकेला व्यक्ति काम पूरा नहीं कर सकता किन्तु सब मिल काम करें तो काम पूरा हो जाता है।
जब चने थे दॉंत न थे, जब दाँत भये तब चने नहीं
अर्थः कभी वस्तु है तो उसका भोग करने वाला नहीं और कभी भोग करने वाला है तो वस्तु नहीं।
जब तक जीना तब तक सीना
अर्थः आदमी को मृत्युपर्यन्त काम करना ही पड़ता है।
जब तक साँस तब तक आस
अर्थः अंत समय तक आशा बनी रहती है।
जबरदस्ती का ठेंगा सिर पर
अर्थः जबरदस्त आदमी दबाव डाल कर काम लेता है ।
जबरा मारे रोने न दे
अर्थः जबरदस्त आदमी का अत्याचार चुपचाप सहन करना पड़ता है।
जबान को लगाम चाहिए
अर्थः सोच-समझकर बोलना चाहिए।
ज़बान ही हाथी चढ़ाए, ज़बान ही सिर कटाए
अर्थः मीठी बोली से आदर और कड़वी बोली से निरादर होता है।
जर का जोर पूरा है, और सब अधूरा है
अर्थः धन में सबसे अधिक शक्ति है।
जर है तो नर नहीं तो खंडहर
अर्थः पैसे से ही आदमी का सम्मान है।
जल में रहकर मगर से बैर
अर्थः जहाँ रहना हो वहाँ के शक्तिशाली व्यक्ति से बैर ठीक नहीं होता ।
जस दूल्हा तस बाराती
अर्थः स्वभाव के अनुसार ही मित्रता होती है।
छलनी कहे सूई से तेरे पेट में छेद
अर्थः अपने अवगुणों को न देखकर दूसरों की आलोचना करना।
छाज (सूप) बोले तो बोले, छलनी भी बोले जिसमें हजार छेद
अर्थः ज्ञानी के समक्ष अज्ञानी का बोलना।
छीके कोई,नाक कटावे कोई
अर्थः किसी के दोष का फल किसी दूसरे के द्वारा भोगना।
छुरी खरबूजे पर गिरे या खरबूजा छुरी पर
अर्थः हर तरफ से हानि हानि होना।
छोटा मुँह बड़ी बात
अर्थः अपनी योग्यता से बढ़कर बात करना।
छोटे मियाँ तो छोटे मियाँ,बड़े मियाँ सुभानअल्लाह
अर्थः छोटे के अवगणों से बड़े के अवगुण अधिक होना।
जंगल में मोर नाचा किसने देखा
अर्थः कद्र न करने वालों के समक्ष योग्यता प्रदर्शन।
जड़ काटते जाएं, पानी देते जाएं
अर्थः भीतर से शत्रु ऊपर से मित्र।
जने-जने की लकड़ी, एक जने का बोझ
अर्थः अकेला व्यक्ति काम पूरा नहीं कर सकता किन्तु सब मिल काम करें तो काम पूरा हो जाता है।
जब चने थे दॉंत न थे, जब दाँत भये तब चने नहीं
अर्थः कभी वस्तु है तो उसका भोग करने वाला नहीं और कभी भोग करने वाला है तो वस्तु नहीं।
जब तक जीना तब तक सीना
अर्थः आदमी को मृत्युपर्यन्त काम करना ही पड़ता है।
जब तक साँस तब तक आस
अर्थः अंत समय तक आशा बनी रहती है।
जबरदस्ती का ठेंगा सिर पर
अर्थः जबरदस्त आदमी दबाव डाल कर काम लेता है ।
जबरा मारे रोने न दे
अर्थः जबरदस्त आदमी का अत्याचार चुपचाप सहन करना पड़ता है।
जबान को लगाम चाहिए
अर्थः सोच-समझकर बोलना चाहिए।
ज़बान ही हाथी चढ़ाए, ज़बान ही सिर कटाए
अर्थः मीठी बोली से आदर और कड़वी बोली से निरादर होता है।
जर का जोर पूरा है, और सब अधूरा है
अर्थः धन में सबसे अधिक शक्ति है।
जर है तो नर नहीं तो खंडहर
अर्थः पैसे से ही आदमी का सम्मान है।
जल में रहकर मगर से बैर
अर्थः जहाँ रहना हो वहाँ के शक्तिशाली व्यक्ति से बैर ठीक नहीं होता ।
जस दूल्हा तस बाराती
अर्थः स्वभाव के अनुसार ही मित्रता होती है।

10:26 AM
जी.के. अवधिया










3 टिप्पणियाँ:
धन्यवाद..
बहुत खुब जी, धन्यवाद
अच्छा संग्रह।
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