आप सोच रहे होंगे कि ये 'मुबारकबाद' के साथ 'मगर'?
पर मैं भी क्या करूँ? जहाँ आपको मुबारकबाद देते हुए मुझे खुशी हो रही है वहीं यह सोचकर मेरे हृदय में पीड़ा भी हो रही है किः
- हमने कैसे अपने स्वयं के साल को भुलाकर दूसरों के साल को पूरी तरह से अपना लिया है। यह तो एक बच्चा भी जानता है कि आज ग्रैगेरियन कैलेण्डर के सन् 2011वें वर्ष के जनवरी माह की 1 तारीख है, किन्तु हम में से बहुत कम लोग ही बता पाएँगे कि आज विक्रम संवत के 2067वें वर्ष के पौष माह के कृष्ण पक्ष की 12वीं तिथि है।
- हमें ग्रैगेरियन कैलेण्डर के बारहों माह के नाम अच्छी तरह से याद हैं पर हमारे अपने पंचांग के बारहों माह के नाम शायद ही याद हैं।
- हमारे बच्चे अंग्रेजी वर्णमाला, अंको, संख्याओं आदि को भलीभाँति जानते हैं किन्तु देवनागरी लिपि और अंकों के विषय में वे शायद ही कुछ जानते हैं।
- हमने पहनावा तक दूसरों का अपना लिया है, आज धोती-कुरता जैसा भारतीय पहनावा पहनने में हमें शर्म आती है।
- हिन्दी बोलना हेय समझा जाता है और अंग्रेजी बोलना शान!
इस पीड़ा ने ही 'मुबारकबाद' के साथ 'मगर' लगाने के लिए विवश कर दिया। आशा है कि आप इसे अन्यथा नहीं लेंगे।
आज तो हमें लॉर्ड मैकॉले को महानतम व्यक्ति कहने की प्रबल इच्छा हो रही है क्योंकि वह बहुत बुद्धिमान था, दुश्मन को दुश्मन के ही हथियार से मारना वह जानता था। वह जानता था कि भारत अपनी शिक्षा पद्धति के कारण से ही समस्त विश्व का गुरु बना हुआ था, इसीलिए उसने एक ऐसी शिक्षा पद्धति बनाई जिसने भारत की शिक्षा पद्धति का ही नाश कर के रख दिया। उसने एक ऐसी शिक्षा-प्रणाली बना दिया, जो कि भारतीयों को अपनी संस्कृति और सभ्यता से दूर ले जाए और उनमें राष्ट्रीय भावना पैदा ही ना होने दे। उसने अंग्रेजी पढ़े-लिखे लोगों की एक अलग जमात खड़ा करके रख दिया जिन्हें अपने देशवासियों से सहानुभूति ही नहीं रही या रही भी तो बहुत कम। देश के प्राचीन गौरव, परम्परा, इतिहास आदि से उन्हें कुछ मतलब ही नहीं रहा।
चलते-चलते
यह तो आप जानते ही हैं कि अंग्रेजी नववर्ष प्रतिवर्ष 1 जनवरी को अर्थात् 31 दिसम्बर के रात्रि के बारह बजने के पश्चात् आरम्भ होता है और हिन्दू नववर्ष प्रतिवर्ष चैत्र शुक्ल प्रतिपदा के सूर्योदय होते ही आरम्भ होता है। आइए देखें दोनों में क्या अन्तर हैः
हिन्दू जागृति से साभार
11:59 AM
जी.के. अवधिया














25 टिप्पणियाँ:
आपको कोटि कोटि धन्यवाद अवधिया जी , कुछ इसी तरह के विचार मेरे भी हैं और मैं समझता हूँ इसी तरह के और अथक प्रयास की आवश्यकता है सोए हुए आर्यों को जगाने के लिए !
चित्रो द्वारा तो प्रत्यक्ष विरोधाभास दर्शा दिया……
मगर………>>>
आपको तो सदैव ही हमारी शुभकामनाएं रहती है यह पाश्चात्य नव-वर्ष का प्रथम दिन है, अवसरानुकूल है आज शुभेच्छा प्रकट करूँ………
आपके हितवर्धक कार्य और शुभ संकल्प मंगलमय परिपूर्ण हो, शुभाकांक्षा!!
आपका जीवन ध्येय निरंतर वर्द्धमान होकर उत्कर्ष लक्ष्यों को प्राप्त करे।
नव वर्ष पर हार्दिक शुभ कामनाएं मेरे ब्लॉग पर आकर प्रोत्साहन देने के लिए आभार|
आशा
यही है आधुनिकता
जब रात के बारह बजे हों
नशे में पैर डगमगा रहे हों
हैप्पी न्यू इयर बोलते हुए
जमीन पर औंधे पड़े हों।
हम नहीं देखना चाहते भोर
सुबह की पहली अनछुई किरण
मन्दिर से आता घण्टियों का नाद
वेद मंत्रों से गूजती दिशाएं
हम तो बस आधुनिक हैं
कुछ शब्द हमने चुरा लिए हैं
कभी आई लव यू और
कभी हैप्पी न्यू ईयर
।
नव वर्ष पर हार्दिक शुभ कामनाएं !
वाह वाह , बहुत अच्छा सचित्र तुलनात्मक तथ्य दिए हैं ।
लेकिन अगर मगर छोडिये ।
अभी तो नव वर्ष की शुभकामनायें स्वीकारिये अवधिया जी ।
आपको और आपके परिवार को मेरी और मेरे परिवार की और से एक सुन्दर, सुखमय और समृद्ध नए साल की हार्दिक शुभकामना ! भगवान् से प्रार्थना है कि नया साल आप सबके लिए अच्छे स्वास्थ्य, खुशी और शान्ति से परिपूर्ण हो !!
जी.के. अवधिया जी आप की बात से सहमत हे जी, आप ने बिलकुल सही कहा, ओर यही बाते देख कर कई बार गुस्सा आता हे, अग्रेजी भाषा तो हम लोगो पर इस तरह से हावी हे कि भारत ने ही कई स्कूलो मे हिन्दी बोलने पर जुर्माना देना पडता हे, मै हमेशा अड जाता हुं भारत मे कि मेरे साथ हिन्दी मे बात करो( विदेश को छोड कर) मै भारत के दोरान ज्यादातर भारतिया पोशाक ही पहनता हुं, जब तक हम अपनी सभ्यता, अपनी भाषा की, अपने देश की,अपने पहरावे की, दिल से इज्जत नही करेगे, तब तक दुनिया भी हमे इज्जत से नही देखेगी, हम अग्रेजी बोल कर अपने ऊपर पढे लिखे का ठपा नही एक गुलाम होने का ठपा लगाते हे. धन्यवाद
@ मान्यवर जी. के. अवधिया जी ! आप को व दीगर सभी भाई बहनों को सादर प्रणाम ! आपको नए दिन की नई सुबह मुबारक हो ।
आज नववर्ष के अवसर पर आपकी चिंता और चिंतन दोनों ही जायज़ हैं ।
अपनी संस्कृति भूलने वालों को तो फिर भी माफ़ किया जा सकता है लेकिन जो लोग केंद्र में राष्ट्रीय संस्कृति वाहिनी सरकार लाना चाहते हैं वे भी आज अंग्रेजी नववर्ष का जश्न क्यों मना रहे हैं ?
कृपया देखिये कि अब ये तत्व विदेशी सोच के प्रभाव में आकर बहन कहने पर भी पाबंदी लगा रहे हैं ।
तीन अलग अलग जगहों पर मेरा एक विस्तृत लेख
'देशभक्ति का दावा और उसकी हकीक़त'
http://ahsaskiparten.blogspot.com/2010/12/patriot.html
http://lucknowbloggersassociation.blogspot.com/2010/12/p
http://blog-parliament.blogspot.com
... gambheer maslaa ... saarthak charchaa !
नया साल शुभा-शुभ हो, खुशियों से लबा-लब हो
न हो तेरा, न हो मेरा, जो हो वो हम सबका हो !!
सार्थक चिंतन ...चित्रों के माध्यम से अन्तर बताना सहज और प्रेरणादायक है ...फिर भी ..
नव वर्ष की शुभकामनाएँ
हम और हमारा देश भटका हुआ है.
सार्थक चिंतन जारी रहे. शुभकामनाएं बस यही कि
नया साल शुभ और प्रगति-दायिनी हो
चित्रों ने सब स्पष्ट कर दिया।
नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं
ब्लॉग को पढने और सराह कर उत्साहवर्धन के लिए शुक्रिया.
नववर्ष की शुभ मंगल कामनाएँ स्वीकार करें...
सर्वे भवन्तु सुखिनः । सर्वे सन्तु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यन्तु । मा कश्चित् दुःख भाग्भवेत्॥
सभी सुखी होवें, सभी रोगमुक्त रहें, सभी मंगलमय घटनाओं के साक्षी बनें, और किसी को भी दुःख का भागी न बनना पड़े .
नव - वर्ष २०११ की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं !
सर्वस्तरतु दुर्गाणि सर्वो भद्राणि पश्यतु।
सर्वः कामानवाप्नोतु सर्वः सर्वत्र नन्दतु॥
सब लोग कठिनाइयों को पार करें। सब लोग कल्याण को देखें। सब लोग अपनी इच्छित वस्तुओं को प्राप्त करें। सब लोग सर्वत्र आनन्दित हों
सर्वSपि सुखिनः संतु सर्वे संतु निरामयाः।
सर्वे भद्राणि पश्यंतु मा कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्॥
सभी सुखी हों। सब नीरोग हों। सब मंगलों का दर्शन करें। कोई भी दुखी न हो।
बहुत अच्छी प्रस्तुति। नव वर्ष 2011 की हार्दिक शुभकामनाएं!
साल ग्यारह आ गया है!
सत्य कहा आपने...
नव वर्ष की बहुत-बहुत बधाई ।
लाजवाब प्रस्तुति. अपनी एक टिप्पणी दुहरा रहा हूं-
हम में से अधिकतर बच्चों के सिर्फ अंगरेजी ज्ञान से संतुष्ट नहीं होते बल्कि उसकी फर्राटा अंगरेजी पर पहले चमत्कृत फिर गौरवान्वित होते हैं. चैत-बैसाख की कौन कहे हफ्ते के सात दिनों के नाम और 1 से 100 तक की क्या 20 तक की गिनती पूछने पर बच्चा कहता है, क्या पापा..., पत्नी कहती है आप भी तो... और हम अपनी 'दकियानूसी' पर झेंप जाते हैं.
तुलनात्मक चित्रों ने सब कुछ कह दिया
अगर मगर के साथ ही सही पर शुभकामनाएं !
महात्मा गाँधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा के ब्लॉग हिन्दी विश्व पर राजकिशोर के ३१ डिसेंबर के 'एक सार्थक दिन' शीर्षक के एक पोस्ट से ऐसा लगता है कि प्रीति सागर की छीनाल सस्कृति के तहत दलाली का ठेका राजकिशोर ने ही ले लिया है !बहुत ही स्तरहीन , घटिया और बाजारू स्तर की पोस्ट की भाषा देखिए ..."पुरुष और स्त्रियाँ खूब सज-धज कर आए थे- मानो यहां स्वयंवर प्रतियोगिता होने वाली ..."यह किसी अंतरराष्ट्रीय स्तर के विश्वविद्यालय के औपचारिक कार्यक्रम की रिपोर्टिंग ना होकर किसी छीनाल संस्कृति के तहत चलाए जाने वाले कोठे की भाषा लगती है ! क्या राजकिशोर की माँ भी जब सज कर किसी कार्यक्रम में जाती हैं तो किसी स्वयंवर के लिए राजकिशोर का कोई नया बाप खोजने के लिए जाती हैं !
जय हो
आपके ब्लॉग पर इसीलिये तो आता हूँ मैं
इस बेहतरीन पोस्ट के लिये धन्यवाद
प्रणाम
Post a Comment