Wednesday, February 9, 2011

हिन्दी कहावतें तथा लोकोक्तियाँ – 19 (Hindi Proverbs)

तबेले की बला बंदर के सिर

अर्थः अपना अपराध दूसरे के सिर मढ़ना।

तन को कपड़ा न पेट को रोटी

अर्थः अत्यन्त दरिद्र।

तलवार का खेत हरा नहीं होता

अर्थः अत्याचार का फल अच्छा नहीं होता।

ताली दोनों हाथों से बजती है

अर्थः केवल एक पक्ष होने से लड़ाई नहीं हो सकती।

तिरिया बिन तो नर है ऐसा, राह बटाऊ होवे जैसा

अर्थः स्त्री के बिना पुरूष अधूरा होता है।

तीन बुलाए तेरह आए, दे दाल में पानी

अर्थः समय आ पड़े तो साधन निकाल लेना पड़ता है।

तीन में न तेरह में

अर्थः निष्पक्ष होना।

तेरी करनी तेरे आगे, मेरी करनी मेरे आगे

अर्थः सबको अपने-अपने कर्म का फल भुगतना ही पड़ता है।

तुम्हारे मुँह में घी शक्कर

अर्थः शुभ सन्देश।

तुरत दान महाकल्याण,

अर्थः काम को तत्काल निबटाना।

तू डाल-डाल मैं पात-पात

अर्थः चालाक के साथ चालाकी चलना।

तेल तिलों से ही निकलता है

अर्थः सामर्थ्यवान व्यक्ति से ही प्राप्ति होती है।

तेल देखो तेल की धार देखो

अर्थः धैर्य से काम लेना।

तेल न मिठाई, चूल्हे धरी कड़ाही

अर्थः दिखावा करना।

तेली का तेल जले, मशालची की छाती फटे

अर्थः दान कोई करे कुढ़न दूसरे को हो।

तेली के बैल को घर ही पचास कोस

अर्थः घर में रहने पर भी अक्ल का अंधा कष्ट ही भोगता है।

तेली खसम किया, फिर भी रूखा खाया

अर्थः सामर्थ्यतवान की शरण में रहकर भी दु:ख उठाना।

3 टिप्पणियाँ:

निर्मला कपिला said...

ये भी शानदार प्रस्तुति। धन्यवाद।

प्रवीण पाण्डेय said...

कई नये मुहावरे मिले।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुंदर जी

 
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