प्रस्तुत हैं हिन्दी की कुछ लोकोक्तियाँ तथा मुहावरे और उनके अर्थ। उनके अर्थ मैंने अपनी अल्पबुद्धि के अनुसार बनाए हैं और उनमें त्रुटि की सम्भावना है अतः यदि आपको त्रुटियाँ नजर आएँ तो कृपया टिप्पणी करके सही अर्थ बताने का कष्ट करें।
थका ऊँट सराय ताकता
अर्थः परिश्रम के पश्चात् विश्राम आवश्यक होता है।
थूक से सत्तू नहीं सनते
अर्थः कम सामग्री से काम पूरा नहीं हो पाता।
थोथा चना बाजे घना
अर्थः मूर्ख अपनी बातों से अपनी मूर्खता को प्रकट कर ही देता है।
दमड़ी की बुढिया ढाई टका सिर मुँड़ाई
अर्थः मामूली वस्तु के रख रखाव के लिए अधिक खर्च करना।
दबाने पर चींटी भी चोट करती है
अर्थः दुःख पहुँचाने पर निर्बल भी वार करता है।
दमड़ी की हाँड़ी गई, कुत्ते की जात पहचानी गई
अर्थः असलियत जानने के लिए थोड़ी सी हानि सह लेना।
दर्जी की सुई, कभी धागे में कभी टाट में
अर्थः परिस्थिति के अनुसार कार्य।
दलाल का दिवाला क्या, मस्जिद में ताला क्या
अर्थः निर्धन को लुटने का डर नहीं होता।
दाग लगाए लँगोटिया यार
अर्थः अपनों से धोखा खाना।
दाता दे भंडारी का पेट फटे
अर्थः दान कोई करे कुढ़न दूसरे को हो।
दादा कहने से बनिया गुड़ देता है
अर्थः मीठे बोल बोलने से काम बन जाता है।
दान के बछिया के दाँत नहीं देखे जाते
अर्थः मुफ्त में मिली वस्तु के गुण-अवगुण नहीं परखे जाते।
दाने-दाने पर लिखा है खाने वाले का नाम
अर्थः हक की वस्तु अवश्य ही मिलती है।
दाम सँवारे सारे काम
अर्थः पैसा सब काम करता है।
दाल में काला होना
अर्थः गड़बड़ होना।
दाल-भात में मसूरचंद
अर्थः जबरदस्ती दखल देनेवाला।
दाल में नमक, सच में झूठ
अर्थः थोड़ा सा झूठ बोलना गलत नहीं होता।
दिनन के फेर से सुमेरू होत माटी को
अर्थः बुरे समय में सोना भी मिट्टी हो जाता है।
दिल्ली अभी दूर है
अर्थः सफलता दूर है।

11:10 AM
जी.के. अवधिया










6 टिप्पणियाँ:
उत्कृष्ट संग्रह।
अच्छा संकलन ...
बहुत अच्छी जानकारी। धन्यवाद।
सुमेरु का अर्थ सोना है या पहाड़.
शृंखला पूरी करें...
अति सुन्दर !
Post a Comment