Sunday, May 15, 2011

हिन्दी कहावतें तथा लोकोक्तियाँ - 27 (Hindi Proverbs)


मुँह में राम बगल में छुरी

अर्थः ऊपर से मित्र भीतर से शत्रु।

मुँह माँगी मौत नहीं मिलती

अर्थः अपनी इच्छा से कुछ नहीं होता।

मुफ्त की शराब काज़ी को भी हलाल

अर्थः मुफ्त का माल सभी ले लेते हैं।

मुल्ला की दौड़ मस्जिद तक

अर्थः सीमित दायरा।

मोरी की ईंट चौबारे पर

अर्थः छोटी चीज का बड़े काम में लाना।

म्याऊँ के ठोर को कौन पकड़े

अर्थः कठिन काम कोई नहीं करना चाहता।

यह मुँह और मसूर की दाल

अर्थः औकात का न होना।

रंग लाती है हिना पत्थर पे घिसने के बाद

अर्थः दु:ख झेलकर ही आदमी का अनुभव और सम्मान बढ़ता है।

रस्सी जल गई पर ऐंठ न गई

अर्थः घमण्ड का खत्म न होना।

राजा के घर मोतियों का अकाल?

अर्थः समर्थ को अभाव नहीं होता।

रानी रूठेगी तो अपना सुहाग लेगी

अर्थः रूठने से अपना ही नुकसान होता है।

राम की माया कहीं धूप कहीं छाया

अर्थः कहीं सुख है तो कहीं दुःख है।

राम मिलाई जोड़ी, एक अंधा एक कोढ़ी

अर्थः बराबर का मेल हो जाना।

राम राम जपना पराया माल अपना

अर्थः ऊपर से भक्त, असल में ठग।

रोज कुआँ खोदना, रोज पानी पीना

अर्थः रोज कमाना रोज खाना।

रोगी से बैद

अर्थः भुक्तभोगी अनुभवी हो जाता है।

लड़े सिपाही नाम सरदार का

अर्थः काम का श्रेय अगुवा को ही मिलता है।

लड्डू कहे मुँह मीठा नहीं होता

अर्थः केवल कहने से काम नहीं बन जाता।

लातों के भूत बातों से नहीं मानते

अर्थः मार खाकर ही काम करने वाला।

लाल गुदड़ी में नहीं छिपते

अर्थः गुण नहीं छिपते।

3 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय said...

सुन्दर प्रस्तुति, आभार।

राज भाटिय़ा said...

बहुत सुन्दर प्रस्तुति,

महेन्द्र मिश्र said...

सुन्दर लगे दोहे मुहावरे ...उत्तम प्रस्तुति...आभार

 
Design by Free WordPress Themes | Bloggerized by Lasantha - Premium Blogger Themes | fantastic sams coupons