Sunday, May 22, 2011

तब याद हमें भी कर लेना

आँचल में सजा लेना कलियाँ जुल्फों में सितारे भर लेना
ऐसे ही कभी जब शाम ढले तब याद हमें भी कर लेना

आया था यहाँ बेगाना सा चल दूँगा कहीं दीवाना सा
दीवाने की खातिर तुम कोई इल्जाम न अपने सर लेना

रस्ता जो मिले अन्जान कोई आ जाए अगर तूफान कोई
अपने को अकेला जान के तुम आँखों में न आँसू भर लेना

फिल्म फिर वही दिल लाया हूँ का यह गाना मेरे पसंदीदा गीतों में से है। इसके गीतकार है मज़रूह सुल्तानपुरी और संगीतकार ओ.पी. नैयर!

4 टिप्पणियाँ:

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर गाना| धन्यवाद|

प्रवीण पाण्डेय said...

हमें भी अच्छा लगता है यह गीत।

सुशील बाकलीवाल said...

बहुत खुबसूरत गीत याद दिलाया आपने । वाह...

Hamarivani said...

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