Friday, September 2, 2011

सत्ताधीश का सिद्धान्त

हमारा सबसे प्रथम उद्देश्य है सत्ता प्राप्त करना और एक बार प्राप्त कर लेने के बाद उस पर बने रहना।

हम जानते हैं कि देश की जनता का एक बड़ा वर्ग अशिक्षित है। ये अशिक्षित लोग अपने वोट का महत्व नहीं जानते, महज कम्बल, कपड़े, दारू आदि देकर हम इनसे वोट ले सकते हैं। और जो शिक्षित हैं उन्हें दी गई शिक्षा सिर्फ यह सिखाती है की बड़ी से बड़ी नौकरी पाकर अधिक से अधिक रुपये कमाना ही हमारी शिक्षा का उद्देश्य है। ऐसे लोगों से भी प्रलोभन देकर उनका वोट आसानी के साथ हासिल किया जा सकता है। अतः जनता अशिक्षित हो या शिक्षित, हमारे बहकावे में आने से उसे कोई रोक नहीं सकता।

हमें पता है कि एक बार सत्ता में आ जाने के बाद हम सर्वशक्तिमान हो जाते हैं, कोई भी हमारा विरोध नहीं कर सकता और यदि भूल से भी किसी ने हम पर किसी प्रकार का कलंक लगाने की कोशिश की तो उसे हम अपने से अधिक कलंकित कर देंगे। हमारे काले धन की बात करने वाले की जाँच करके हम उसे ही काला धन जमा करने वाला सिद्ध कर देंगे, हमारे भ्रष्टाचारी होने की बात करने वाले को हम और भी बड़ा भ्रष्टाचारी सिद्ध कर देंगे। कोई भी यदि जनता को सही ज्ञान देने की कोशिश करेगा तो उसे कुचल कर रख दिया जाएगा।

हम मँहगाई कम करने की घोषणा अवश्य करेंगे किन्तु काम मँहगाई बढ़ाने वाला ही करेंगे ताकि मँहगाई की मार में सारे गरीब पिस कर मर जाएँ और देश से गरीबी दूर हो जाए। जब कोई गरीब बचेगा ही नहीं तो गरीबी कहाँ से आएगी?

केवल हमारा हित ही देश का हित है इसलिए हम येन-केन-प्रकारेण अपना ही हित करते रहेंगे।

3 टिप्पणियाँ:

ajit gupta said...

यह ऐसा राक्षसी तंत्र पैदा हो गया है जिससे पार पाना कठिन काम होता जा रहा है। लेकिन जब तानाशाह ही मिट गए तो इन‍का भी अन्‍त अवश्‍य होगा।

Rahul Singh said...

जन प्रतिनिधि हमारे सच्‍चे प्रतिनिधि होते हैं, हो सकता है कि वे हम आप की तरह न हो, हो सकता है, बेहतर हों.

प्रवीण पाण्डेय said...

सबको सम्मिलित प्रयास करना है इस स्थिति से बाहर निकलने के लिये।

 
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