Friday, November 11, 2011

भ्रष्टाचार और भाषणबाजी

यू.पी.ए. अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपने भाषण में कहा है कि ‘महज भाषणबाजी’ करने या ‘दूसरों पर उंगली उठाने’ से भ्रष्टाचार का उन्मूलन नहीं हो सकता। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि हर किसी को अपने अंदर झाँकने की जरूरत है...।

अब प्रश्न यह उठता है कि क्या सोनिया जी ने कभी खुद अपनी पार्टी कांग्रेस के भीतर झाँक कर देखा है क्या? यदि देखा है तो उन्हें यह नहीं दिखा क्या कि पिछले चालीस साल से लोकपाल विधेयक को रोके रखे रहने के लिए किन लोगों नें भाषणबाजी किया है? क्या उन्हें जीप घोटाला (1948), एल.आई.सी. स्कैण्डल (1958), नागरवाला काण्ड (1970), मारुति घोटाला (1974), तेल घोटाला (1976), बोफोर्स घोटाला (1987), हर्षद मेहता काण्ड (1991), 2 G स्पैक्ट्रम घोटाला (2002) ...... जैसे घोटाले नजर नहीं आए क्या? यह नहीं दिखा क्या कि इन घोटालों के घोटालेबाजों को सजा मिली कि नहीं?

1951 में प्रतिष्ठित सिविल सर्व्हेंट ए.डी. गोरवाला के द्वारा प्रस्तुत Report on Public Administration, Planning Commission, Government of India 1951 में लिखे निम्न अवलोकन नजर नहीं आए क्या?

"नेहरू के मन्त्रिमण्डल में कुछ मन्त्री भ्रष्ट थे और इस बात की जानकारी प्रायः सभी को थी।" (Quite a few of Nehru's ministers were corrupt and this was common knowledge.)

"एक अत्यन्त जिम्मेदार सिविल सर्व्हेंट के आफिसियल रिपोर्ट में उल्लेख है कि सरकार अपने मन्त्रियों को बचाने के लिए गलत रास्ते अपनाती है।" (Even a highly responsible civil servant in an official report as early as 1951 maintained that the Government went out of its way to shield its ministers.)

काश सोनिया जी के कथन के अनुसार कांग्रेस अपने भीतर झाँक कर देखती!

0 टिप्पणियाँ:

 
Design by Free WordPress Themes | Bloggerized by Lasantha - Premium Blogger Themes | fantastic sams coupons