समस्त जीवों के प्रति दया, क्रोध निग्रह, अकारण हिंसा का विरोध, अभ्यागत का आदर यही सब तो प्राचीनकाल से भारत के आदर्श रहे हैं। हमारे प्राचीन दर्शन, सभ्यता तथा संस्कृति पर बार-बार आघात होने के बावजूद भी हमारे संस्कार में आज भी वे प्राचीन आदर्श रचे-बसे हैं। यही कारण है कि एक आम भारतीय कभी हिंसक नहीं रहा। पर ऐसा प्रतीत होता है कि आज देश भर में व्याप्त भ्रष्टाचार और मँहगाई कहीं भारतीयों को हिंसक तो नहीं बना डालेगा?
एक युवक के द्वारा केन्द्रीय मन्त्री को थप्पड़ मारना आखिर क्या इंगित करता है?
इस सन्दर्भ में आनलाईन दैनिक भास्कर में प्रकाशित इस निन्दनीय कार्य के समाचार में कुछ टिप्पणियाँ इस प्रकार की भी हैं -
क्या ये भ्रष्टाचार, मँहगाई और घपले भारतीयों को हिंसक बना कर छोड़ेंगे?

11:03 AM
जी.के. अवधिया
















5 टिप्पणियाँ:
chinta ka vishya hai
आपकी बातों से कुछ हद तक सहमत हूँ मगर हर चीज़ के एक हद होती है और बढ़ती हुई महंगाई और भ्रष्टाचार ने यह हद पार करदी है। और लोगों को इस आक्रोश के लिए मजबूर कर दिया है। शायद यही वजह है की लोग मात्र इस एक करारे चांटे से ही खुश हैं ....
देश को अच्छे भविष्य के लिये शुभकामनायें।
प्रवीण जी कह रहे हैं कि भारतीय कुम्भकर्णी नींद सो रहे हैं। ये शान्तिप्रिय लोग हैं, बस ईश्वर की आराधना में रत रहते हैं। देश की इन्हें चिन्ता नहीं है। इक्का-दुक्का घटनाओं से कहाँ देश जागता है?
good,
आप के लेख पढ़कर बहुत खुशी हुई कि मैं क्या ढूँढ रहा था वह यहाँ से मिला
धन्यवाद
http://www.hindisopan.blogspot.com
http://www.mlpmschoolnews.blogspot.com
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