Thursday, September 29, 2011

लता मंगेषकर की 82वें जन्मदिन पर उनके द्वारा पचास से अस्सी दशक तक गाये सुमधुर गीतों की सूची

मेलोडियस फिल्मी गीतों की बात हो और लता मंगेषकर का नाम न आए ऐसा हो ही नहीं सकता। जी हाँ, वही लता मंगेषकर जिन्होंने कल अपना वाँ जन्म दिन मनाया है। हमारी शुभकामानाएँ हैं कि भारतीय फिल्म संगीत के क्षेत्र की स्वर कोकिला लता मंगेषकर जी दीर्घजीवी हों। लता मंगेषकर जी के कण्ठ-माधुर्य के विषय में कुछ बताना सूरज को दिया दिखाना ही है। यह उनकी मधुर कण्ठ स्वर का ही कमाल है कि पाकिस्तानी कहा करते थे कि भारत हमें लता मंगेषकर दे दे और कश्मीर ले ले।

तो प्रस्तुत है लता मंगेषकर के द्वारा पचास से अस्सी दशक तक गाये सुमधुर गीतों की सूची जिनमें उनके द्वारा गाये गए सोलो, डुएड और कोरस गीत सम्मिलित हैं।
गीत के बोल गायक/गायिका संगीत निर्देशक गीतकार फिल्म प्रदर्शन वर्ष
चले जाना नहीं नैन मिलाके लता मंगेषकर हुस्नलाल भगतराम राजेन्द्र कृशन बड़ी बहन 1950
छुप छुप खड़े हो लता मंगेषकर, प्रेमलता हुस्नलाल भगतराम कमर जलालाबादी बड़ी बहन 1950
गोरे गोरे ओ बाँके छोरे लता मंगेषकर सी.रामचन्द्र राजेन्द्र कृशन समाधि 1950
जो दिल में खुशी बन कर आये लता मंगेषकर हुस्नलाल भगतराम राजेन्द्र कृशन बड़ी बहन 1950
महफिल में जल उठी शमा लता मंगेषकर सी.रामचन्द्र प्यारेलाल संतोषी निराला 1950
आ जाओ तड़पते हैं अरमां लता मंगेषकर शंकर जयकिशन हसरत जायपुरी आवारा 1951
बचपन के दिन भुला न देना लता मंगेषकर नौशाद शकील बदाँयूनी दीदार 1951
भोली सूरत दिल के खोटे चीतलकर, लता मंगेषकर सी.रामचन्द्र राजेन्द्र कृशन अलबेला 1951
दम भर जो उधर मुँह फेरे लता मंगेषकर, मुकेश शंकर जयकिशन शैलेन्द्र आवारा 1951
धीरे से आजा री अँखियन में लता मंगेषकर सी.रामचन्द्र राजेन्द्र कृशन अलबेला 1951
इक बेवफा से प्यार किया लता मंगेषकर शंकर जयकिशन हसरत जायपुरी आवारा 1951
घर आया मेरा परदेसी लता मंगेषकर शंकर जयकिशन शैलेन्द्र आवारा 1951
जबसे बलम घर आये लता मंगेषकर शंकर जयकिशन हसरत जायपुरी आवारा 1951
ले जा मेरी दुआयें ले जा लता मंगेषकर नौशाद शकील बदाँयूनी दीदार 1951
शाम ढले खिड़की तले चीतलकर, लता मंगेषकर सी.रामचन्द्र राजेन्द्र कृशन अलबेला 1951
शोला जो भड़के दिल मेरा धड़के चीतलकर, लता मंगेषकर सी.रामचन्द्र राजेन्द्र कृशन अलबेला 1951
तेरे बिना आग ये चांदनी तू आ जा लता मंगेषकर, मन्ना डे शंकर जयकिशन शैलेन्द्र आवारा 1951
ठंडी हवायें लहरा के आयें लता मंगेषकर सचिन देव बर्मन साहिर लुधियानवी नौजवान 1951
तुम न जाने किस जहाँ में लता मंगेषकर सचिन देव बर्मन साहिर लुधियानवी सजा 1951
ऐ मेरे दिल कहीं और चल लता मंगेषकर शंकर जयकिशन शैलेन्द्र दाग 1952
बचपन के मुहब्बत को लता मंगेषकर नौशाद शकील बदाँयूनी बैजू बावरा 1952
चांदनी रातें प्यार की बातें हेमन्त कुमार, लता मंगेषकर सचिन देव बर्मन साहिर लुधियानवी जाल 1952
न मिलता गम तो बरबादी के लता मंगेषकर नौशाद शकील बदाँयूनी अमर 1952
ये रात ये चांदनी फिर कहाँ हेमन्त कुमार, लता मंगेषकर सचिन देव बर्मन साहिर लुधियानवी जाल 1952
अकेली मत जइयो राधे जमुना के पार मोहम्मद रफी, लता मंगेषकर नौशाद शकील बदाँयूनी बैजू बावरा 1953
बचपन के मुहब्बत को लता मंगेषकर नौशाद शकील बदाँयूनी बैजू बावरा 1953
झूले में पवन के आई बहार मोहम्मद रफी, लता मंगेषकर नौशाद शकील बदाँयूनी बैजू बावरा 1953
किसी ने अपना बना के मुझको लता मंगेषकर शंकर जयकिशन शैलेन्द्र पतिता 1953
मोहे भूल गये साँवरिया लता मंगेषकर नौशाद शकील बदाँयूनी बैजू बावरा 1953
मुहब्बत ऐसी धड़कन है लता मंगेषकर सी. रामचन्द्र हसरत जयपुरी अनारकली 1953
मेरे किस्मत के खरीदार अब तो आ जा लता मंगेषकर सी. रामचन्द्र शैलेन्द्र अनारकली 1953
आ जा री आ निंदिया तू आ लता मंगेषकर सलिल चौधरी शैलेन्द्र दो बीघा जमीन 1953
आ जा रे अब मेरा दिल पुकारा लता मंगेषकर, मुकेश शंकर जयकिशन हसरत जयपुरी आह 1953
बचपन के मुहब्बत को लता मंगेषकर नौशाद शकील बदाँयूनी बैजू बावरा 1953
दूर कोई गाये लता मंगेषकर, मोहाम्मद रफी, शमशाद बेगम नौशाद शकील बदाँयूनी बैजू बावरा 1953
दुआ कर गमे दिल खुदा से दुआ कर लता मंगेषकर सी. रामचन्द्र शैलेन्द्र अनारकली 1953
झूले में पवन के आई बहार लता मंगेषकर, मोहम्मद रफ़ी नौशाद शकील बदाँयूनी बैजू बावरा 1953
किसी ने अपना बना के मुझको लता मंगेषकर शंकर जयकिशन शैलेन्द्र पतिता 1953
मिट्टी से खेलते हो बार बार किसलिये लता मंगेषकर शंकर जयकिशन शैलेन्द्र पतिता 1953
मोहे भूल गये साँवरियालता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीबैजू बावरा1953
मुहब्बत ऐसी धड़कन हैलता मंगेषकरसी. रामचन्द्रहसरत जयपुरीअनारकली1953
राजा की आयेगी बारातलता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्रआह1953
तू गंगा की मौज मैं जमुना का धारालता मंगेषकर, मोहम्मद रफ़ीनौशादशकील बदाँयूनीबैजू बावरा1953
याद किया दिल ने कहाँ हो तुमहेमन्त कुमार, लता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीपतिता1953
ये शाम की तनहाइयाँ ऐसे में तेरा गमलता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्रआह1953
ये जिंदगी उसी की है जो किसी का हो गयालता मंगेषकरसी. रामचन्द्रराजेन्द्र कृशनअनाकली1953
जिंदगी प्यार की दो चार घड़ी होती हैहेमन्त कुमार, लता मंगेषकरसी. रामचन्द्रराजेन्द्र कृशनअनाकली1953
आ नील गगन तले प्यार हम करेंहेमन्त कुमार, लता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीबादशाह1954
देखो वो चांद छुपकेहेमन्त कुमार, लता मंगेषकरहेमन्त कुमारएस.एच. बिहारीशर्त1954
दिल जले तो जलेलता मंगेषकरसचिन देव बर्मनसाहिर लुधियानवीटैक्सी ड्राइव्हर1954
जादूगर सैंया छोड़ो मोरी बैंयालता मंगेषकरहेमन्त कुमारराजेन्द्र कृशननागिन1954
जायें तो जायें कहाँलता मंगेषकरसचिन देव बर्मनसाहिर लुधियानवीटैक्सी ड्राइव्हर1954
मन डोले मेरा तन डोलेलता मंगेषकरहेमन्त कुमारराजेन्द्र कृशननागिन1954
मेरा बदली में छुप गया चांद रेलता मंगेषकरहेमन्त कुमारराजेन्द्र कृशननागिन1954
मेरा दिल ये पुकारे आजालता मंगेषकरहेमन्त कुमारराजेन्द्र कृशननागिन1954
ऊँची ऊँची दुनिया की दीवारेंलता मंगेषकरहेमन्त कुमारराजेन्द्र कृशननागिन1954
सुन रसिया मन बसियालता मंगेषकरहेमन्त कुमारराजेन्द्र कृशननागिन1954
सुन री सखी मोहे सजना बुलायेलता मंगेषकरहेमन्त कुमारराजेन्द्र कृशननागिन1954
तेरी याद में जल कर देख लियालता मंगेषकरहेमन्त कुमारराजेन्द्र कृशननागिन1954
अपलम चपलमलता मंगेषकर, उषा खन्नासी. रामचन्द्रराजेन्द्र कृशनआजाद1955
भुला नहीं देनालता मंगेषकर, मोहम्मद रफीनौशादकुमार बाराबंकवीबारादरी1955
फैली हुई है सपनों की बाहेंलता मंगेषकरसचिन देव बर्मनसाहिर लुधियानवीहाउस नं. 441955
इचक दाना बीचक दानालता मंगेषकर, मुकेशशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीश्री 4201955
जा री जा री ओ कारी बदरियालता मंगेषकरसी. रामचन्द्रराजेन्द्र कृशनआजाद1955
जीवन के सफर में राहीलता मंगेषकरसचिन देव बर्मनसाहिर लुधियानवीमुनीमजी1955
कितना हसीं है मौसमचीतलकर, लता मंगेषकरसी रामचन्द्रराजेन्द्र कृशनआजाद1955
मेरा सलाम ले जालता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीउड़न खटोला1955
मोरे सैंया जी उतरेंगे पारलता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीउड़न खटोला1955
मुझपे इल्जामे बेवफाई हैलता मंगेषकरसी रामचन्द्रजां निसार अख्तरयास्मीन1955
राधा ना बोले ना बोले ना बोले रेलता मंगेषकरसी रामचन्द्रराजेन्द्र कृशनआजाद1955
ओ जाने वाले मुड़ के जरालता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीश्री 4201955
प्यार हुआ इकरार हुआ हैलता मंगेषकर, मन्ना डेशंकर जयकिशनशैलेन्द्रश्री 4201955
रमैया वस्ता वैयालता मंगेषकर, मोहम्मद रफी, मुकेशशंकर जयकिशनशैलेन्द्रश्री 4201955
सुनो छोटी सी गुड़िया की लम्बी कहानीलता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीसीमा1955
आ जा के इंतजार मेंलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीशंकर जयकिशनशैलेन्द्रहलाकू1956
आ जा सनम मधुर चांदनी में हमलता मंगेषकर, मन्ना डेशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीचोरी चोरी1956
दिल का न करना ऐतबार कोईलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीशंकर जयकिशनशैलेन्द्रहलाकू1956
गुजरा हुआ जमाना आता नहीं दुबारालता मंगेषकरएस.एस. मोहिन्दरतनवीर नक़वीशीरी फरहाद1956
उस पार साजन इस पार सारेलता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीचोरी चोरी1956
जा रे जा बालमवालता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्रबसंत बहार1956
जागो मोहन प्यारेलता मंगेषकरसलिल चौधरीशैलन्द्रजागते रहो1956
जहाँ मैं जाती हूँ वहीं चले आते होलता मंगेषकर, मन्ना डेशंकर जयकिशनशैलेन्द्रचोरी चोरी1956
नैन मिले चैन कहाँलता मंगेषकर, मन्ना डेशंकर जयकिशनशैलेन्द्रबसंत बहार1956
पंछी बनूँ उड़ती फिरूं मस्त गगन मेंलता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीचोरी चोरी1956
रसिक बलमालता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीचोरी चोरी1956
ये रात भीगी भीगीलता मंगेषकर, मन्ना डेशंकर जयकिशनशैलेन्द्रचोरी चोरी1956
ये वादा करो चांद के सामनेलता मंगेषकर, मुकेशशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीराजहठ1956
आ लौट के आजा मेरे मीतलता मंगेषकरएस एन त्रिपाठीभरत व्यासरानी रूपमती1957
ऐ मालिक तेरे बंदे हमलता मंगेषकरवसंत देसाईभरत व्यासदो आँखें बारह हाथ1957
बोल री कठपुतली डोरीलता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्रकठपुतली1957
वृन्दावन का कृशन कन्हैयालता मंगेषकर मोहम्मद रफीहेमन्त कुमारराजेन्द्र कृशनमिस मेरी1957
चांद फिर निकलालता मंगेषकरसचिन देव बर्मनमजरूह सुल्तानपुरीपेइंग गेस्ट1957
छुप गया कोई रे दूर से पुकार केलता मंगेषकरहेमन्त कुमारराजेन्द्र कृशनचम्पाकली1957
दुनिया में हम आये हैं तोलता मंगेषकर, मीना मंगेषकर, उषा मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीमदर इंडिया1957
घूंघट नहीं खोलूंगी सैंया तोरे आगेलता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीमदर इंडिया1957
होली आई रे कन्हाईलता मंगेषकर, मोहम्मद रफी, शमशाद बेगमनौशादशकील बदाँयूनीमदर इंडिया1957
जीवन की बीना का तार बोलेलता मंगेषकरएस एन त्रिपाठीभरत व्यासरानी रूपमती1957
झूमे रेऽऽ नीला अम्बर झूमेलता मंगेषकर, तलत महमूदसलिल चौधरीशैलेन्द्रएक गाँव की कहानी1957
मतवाला जिया डोले पियालता मंगेषकर, मोहम्मद रफीनौशादशकील बदाँयूनीमदर इंडिया1957
मेरी वीणा तुम बिन रोयेलता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनदेख कबीरा रोया1957
नाच रे मयूर झनझना के घुंघरूलता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीकठपुतली1957
नगरी नगरी द्वारे द्वारेलता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीमदर इंडिया1957
ओ जानेवालों जाओ न घर अपना छोड़ केलता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीमदर इंडिया1957
ओ मेरे लाल आ जालता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीमदर इंडिया1957
ओ रात के मुसाफिरलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीहेमन्त कुमारराजेन्द्र कृशनमिस मेरी1957
फिर वही शाम वही गमतलत महमूद, लता मंगेषकरसी रामचंद्रराजेन्द्र कृशनबारिश1957
सब कुछ लुटा के होश में आये तो क्या कियालता मंगेषकररविप्रेम धवनएक साल1957
तारों की जुबाँ पर हैलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीसी रामचन्द्रपरवेज शम्सीनौशेरवान-ए-आदिल1957
तू प्यार करे या ठुकरायेलता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनदेख कबीरा रोया1957
ये मर्द बड़े दिल सर्दलता मंगेषकरहेमन्त कुमारराजेन्द्र कृशनमिस मेरी1957
जरा सामने तो आओ छलियेलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीएस एन त्रिपाठीभरत व्यासजनम जनम के फेरे1957
आ जा रे परदेसीलता मंगेषकरसलिल चौधरीशैलेन्द्रमधुमती1958
चाहे पास हो चाहे दूर होलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीकल्याणजी आनन्दजीभरत व्याससम्राट चन्द्रगुप्त1958
दिल का खिलौना हाये टूट गयालता मंगेषकरवसंत देसाईभरत व्यासगूंज उठी शहनाई1958
दिल की दुनिया बसाके सँवरियालता मंगेषकरसी रामचन्द्रराजेन्द्र कृशनअमरदीप1958
दिल तड़प तड़प के कह रहा हैलता मंगेषकर, मुकेशसलिल चौधरीशैलेन्द्रमधुमती1958
घड़ी घड़ी मोरा दिल धड़केलता मंगेषकरसलिल चौधरीशैलेन्द्रमधुमती1958
हम प्यार में जलने वालों कोलता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनजेलर1958
जाना था हमसे दूरलता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनअदालत1958
जीवन में पिया तेरा साथ रहेलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीवसंत देसाईभरत व्यासगूंज उठी शहनाई1958
मस्ती भरा है समांलता मंगेषकर, मन्ना डेदत्तारामहसरत जयपुरीपरवरिश1958
मेरे मन का बावरा पंछीलता मंगेषकरसी रामचन्द्रराजेन्द्र कृशनअमरदीप1958
नींद ना मुझको आयेहेमन्त कुमार, लता मंगेषकरकल्याणजी आनन्दजीप्यारेलाल संतोषीपोस्ट बाक्स 9991958
सारी सारी रात तेरी याद सतायेलता मंगेषकररोशनफार्रुख कैसरअजी बस शुक्रिया1958
तेरे सुर और मेरे गीतलता मंगेषकरवसंत देसाईभरत व्यासगूंज उठी शहनाई1958
उनको ये शिकायत हैलता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनअदालत1958
यूँ हसरतों के दागलता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनअदालत1958
बन के पंछी गाये प्यार का तरानालता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीअनाड़ी1959
भैया मेरे राखी के बंधन को निभानालता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्रछोटी बहन1959
धीरे धीरे चल ऐ चांद गगन मेंलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीलव मेरेज1959
दिल का खिलौना हाये टूट गयालता मंगेषकरवसंत देसाईभरत व्यासगूंज उठी शहनाई1959
दिल की नजर सेलता मंगेषकर, मुकेशशंकर जयकिशनशैलेन्द्रअनाड़ी1959
दुनियावालों से दूरलता मंगेषकर, मुकेशशंकर जयकिशनशैलेन्द्रउजाला1959
झूमता मौसम मस्त महीनालता मंगेषकर, मन्ना डेशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीउजाला1959
कहे झूम झूम रात ये सुहानीलता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्रलव मेरेज1959
कोई रंगीला सपनों में आकेलता मंगेषकर, मन्ना डेशंकर जयकिशनशैलेन्द्रउजाला1959
लागी छूटे ना अब तो सनमलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीचित्रगुप्तमजरूह सुल्तानपुरीकाली टोपी लाल रूमाल1959
मैं रंगीला प्यार का राहीलता मंगेषकर, सबीर सेनशंकर जयकिशनशैलेन्द्रछोटी बहन1959
तेरा जाना दिल के अरमानों का लुट जानालता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीअनाड़ी1959
तेरे प्यार का आसरा चाहता हूँलता मंगेषकर, महेन्द्र कपूरएन दत्तासाहिर लुधियानवीधूल का फूल1959
तुम्हें याद होगा कभी हम मिले थेहेमन्त कुमारकल्याणजी आनन्दजीगुलशन बावरासट्टा बाजार1959
वो चांद खिलालता मंगेषकर, मुकेशशंकर जयकिशनशैलेन्द्रअनाड़ी1959
आ अब लौट चलेंलता मंगेषकर, मुकेशशंकर जयकिशनशैलेन्द्रजिस देश में गंगा बहती है1960
आँखों में रंग क्यों आयालता मंगेषकर, मुकेशशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीएक फूल चार काँटे1960
आहा रिमझिम के ये प्यारे प्यारे गीत लियेलता मंगेषकर, तलत महमूदसलिल चौधरीशैलेन्द्रउसने कहा था1960
अजीब दास्तां है येलता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्रदिल अपना और प्रीत पराई1960
बदले बदले मेरे सरकार नजर आते हैंलता मंगेषकररविशकील बदाँयूनीचौदहवीं का चांद1960
बनवारी रे जीने का सहारा तेरा नाम रेलता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीएक फूल चार काँटे1960
बेगानी शादी में अब्दुल्ला दीवानालता मंगेषकर, मुकेशशंकर जयकिशनशैलेन्द्रजिस देश में गंगा बहती है1960
बेकस पे करम कीजियेलता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीमुगल-ए-आजम1960
दिल अपना और प्रीत पराईलता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्रदिल अपना और प्रीत पराई1960
दो सितारों का जमीं पर है मिलनलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीनौशादशकील बदाँयूनीकोहिनूर1960
है आग हमारे सीने मेंगीता दत्त, लता मंगेषकर, महेन्द्र कपूर, मुकेशशंकर जयकिशनशैलेन्द्रजिस देश में गंगा बहती है1960
जाने कैसे सपनों में खो गईं अँखियाँलता मंगेषकररवि शंकरशैलेन्द्रअनुराधा1960
जारे बदरा बैरी जालता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनबहाना1960
जब रात है ऐसी मतवालीलता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीमुगल-ए-आजम1960
कैसे दिन बीत कैसी बीती रतियाँलता मंगेषकररवि शंकरशैलेन्द्रअनुराधा1960
मचलती आरजू खड़ी बाहें पसारेलता मंगेषकरसलिल चौधरीशैलेन्द्रउसने कहा था1960
मेरा दिल अब तेरा ओ साजनालता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्रदिल अपना और प्रीत पराई1960
मेरी जान कुछ भी कीजियेलता मंगेषकर, मुकेशकल्याणजी आनन्दजीकमर जलालाबादीछलिया1960
मुहब्बत की झूठी कहानी पे रोयेलता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीमुगल-ए-आजम1960
ओ बसंती पवन पागललता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्रजिस देश में गंगा बहती है1960
ओ सजना बरखा बहार आईलता मंगेषकरसलिल चौधरीशैलेन्द्रपरख1960
प्यार किया तो डरना क्यालता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीमुगल-ए-आजम1960
तन रंग लो जी आज मन रंग लोलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीनौशादशकील बदाँयूनीकोहिनूर1960
तेरी महफिल में किस्मत आजामा कर हम भी देखेंगेलता मंगेषकर, शमशाद बेगमनौशादशकील बदाँयूनीमुगल-ए-आजम1960
तेरी राहों में खड़े हैं दिल थाम केलता मंगेषकरकल्याणजी आनन्दजीकमर जलालाबादीछलिया1960
ये दिल की लगी कम क्या होगीलता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीमुगल-ए-आजम1960
ये वादा करें चांद के सामनेलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीकल्याणजी आनन्दजीके एल परदेसीदिल भी तेरा हम भी तेरे1960
जिंदगी भर नहीं भूलेगी ओ बरसात की रातलता मंगेषकररोशनसाहिर लुधियानवीबरसात की रात1960
अल्ला तेरो नाम ईश्वर तेरो नामलता मंगेषकरजयदेवसाहिर लुधियानवीहम दोनों1961
बदली से निकला है चांदलता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनसंजोग1961
भूली हुई यादें मुझे इतना ना सताओलता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनसंजोग1961
दिल मेरा एक आस का पंछीलता मंगेषकर, सुबीर सेनशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीआस का पंछी1961
दो हंसों का जोड़ा बिछड़ गयो रेलता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीगंगा जमना1961
इक मंजिल राही दोलता मंगेषकर, मुकेशमदन मोहनराजेन्द्र कृशनसंजोग1961
घर आजा घिर आये बदरा साँवरियालता मंगेषकरराहुल देव बर्मनशैलेन्द्रछोटे नवाब1961
इतना ना मुझसे तू प्यार बढ़ालता मंगेषकर, तलत महमूदसलिल चौधरीराजेन्द्र कृशनछाया1961
जा रे, जा रे उड़ जा रे पंछीलता मंगेषकरसलिल चौधरीमजरूह सुल्तानपुरीमाया1961
जीत ही लेंगे बाजी हम तुमलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीखैयामकैफी आजमीशोला और शबनम1961
जिया हो जिया कुछ बोल दोलता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीजब प्यार किसी से होता है1961
ज्योति कलश छलकेलता मंगेषकरसुधीर फड़केपं. नरेन्द्र शर्माभाभी की चूड़ियाँ1961
सौ साल पहले मुझे तुमसे प्यार थालता मंगेषकर, मोहम्मद रफीशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीजब प्यार किसी से होता है1961
तस्वीर तेरी दिल में जिस दिन से उतारी हैलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीसलिल चौधरीमजरूह सुल्तानपुरीमाया1961
वो भूली दास्तां लो फिर याद आ गईलता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनसंजोग1961
आज छेड़ो मुब्बत की शहनाइयाँलता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीसन आफ इंडिया1962
आपकी नजरों ने समझा प्यार के काबिल हमेंलता मंगेषकरमदन मोहनराजा मेहंदी अली खांअनपढ़1962
आपने याद दिलाया तो मुझे याद आयालता मंगेषकर, मोहम्मद रफीरोशनमजरूह सुल्तानपुरीआरती1962
आवाज दे के हमें तुम बुलाओलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीप्रोफेसर1962
बोल मेरी तकदीर में क्या हैलता मंगेषकर, मुकेशशंकर जयकिशनशैलेन्द्रहरियाली और रास्ता1962
दिल तोड़ने वाले तुझे दिल ढूँढ रहा हैलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीनौशादशकील बदाँयूनीसन आफ इंडिया1962
एहसान तेरा होगा मुझ परलता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीजंगली1962
है इसी में प्यार की आबरूलता मंगेषकरमदन मोहनराजा मेहंदी अली खांअनपढ़1962
कभी तो मिलेगी कहीं तो मिलेगीलता मंगेषकररोशनमजरूह सुल्तानपुरीआरती1962
कहीं दीप जले कहीं दिललता मंगेषकरहेमन्त कुमारकैफी आजमीबीस साल बाद1962
मैं चली मैं चलीलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीप्रफेसर1962
मैं तो तुम संग नैन मिला केलता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनमनमौजी1962
मुझे कितना प्यार है तुमसेलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीदिल तेरा दीवाना1962
तेरा मेरा प्यार अमरलता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्रअसली नकली1962
तुझे जीवन की डोर से बांध लिया हैलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीअसली नकली1962
देखो रूठा ना करोलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीसचिन देव बर्मनहसरत जयपुरीतेरे घर के सामने1963
एक घर बनाउँगा तेरे घर के सामनेलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीसचिन देव बर्मनहसरत जयपुरीतेरे घर के सामने1963
हम तेरे प्यार में सारा आलम खो बैठेलता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीदिल एक मंदिर1963
हँसता हुआ नूरानी चेहराकमल बारोट, लता मंगेषकरलक्ष्मीकान्त प्यारेलालफारुख कैसरपारसमणि1963
जो वादा किया वो निभाना पड़ेगालता मंगेषकर, मोहम्मद रफीरोशनसाहिर लुधियानवीताजमहल1963
मेरे महबूब तुझे मेरी मुहब्बत की कसमलता मंगेषकरनौशादशकील बदाँयूनीमेरे महबूब1963
उइ माँ उइ माँ ये क्या हो गयालता मंगेषकरलक्ष्मीकान्त प्यारेलालफारुख कैसरपारसमणि1963
पाँव छू लेने दो फूलों को इनायत होगीलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीरोशनसाहिर लुधियानवीताजमहल1963
पंख होती तो उड़ आती रेलता मंगेषकररामलालहसरत जयपुरीसेहरा1963
रात भी है कुछ भीगी भीगीलता मंगेषकरजयदेवसाहिर लुधियानवीमुझे जीने दो1963
रुक जा रात ठहर जा रे चंदालता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्रदिल एक मन्दिर1963
तकदीर का फसानालता मंगेषकररामलालहसरत जयपुरीसेहरा1963
वो दिल कहाँ से लाउँ तेरी याद जो भुला देलता मंगेषकररविराजेन्द्र कृशनभरोसा1963
वो जब याद आये बहुत याद आयेलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीलक्ष्मीकान्त प्यारेलालफारुख कैसरपारसमणि1963
याद में तेरी जाग जाग के हमलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीनौशादशकील बदाँयूनीमेरे महबूब1963
अगर मुझसे मुहब्बत हैलता मंगेषकरमदन मोहनराजा मेहंदी अली खांआप की परछाइयाँ1964
इक शहंशाह ने बनवा के हसीं ताजमहललता मंगेषकर, मोहम्मद रफीनौशादशकील बदाँयूनीलीडर1964
हमने तुझको प्यार किया है जितनालता मंगेषकरकल्याणजी आनन्दजीइन्दीवरदुल्हा दुल्हन1964
हर दिल जो प्यार करेगालता मंगेषकर, महेन्द्र कपूर, मुकेशशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीसंगम1964
जय जय हे जगदम्बे मातालता मंगेषकरचित्रगुप्तमजरूह सुल्तानपुरीगंगा की लहरें1964
झूम झूम ढलती रातलता मंगेषकरहेमन्त कुमारकैफी आजमीकोहरा1964
जो हमने दास्तां अपनी सुनाईलता मंगेषकरमदन मोहनराजा मेहंदी अली खांवह कौन थी1964
मेरी आँखों से कोई नींद लिये जाता हैलता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनपूजा के फूल1964
नगमा-ओ-शेर की सौगात किसे पेश करूँलता मंगेषकरमदन मोहनसाहिर लुधियानवीगजल1964
नैना बरसे रिमझिम रिमझिमलता मंगेषकरमदन मोहनराजा मेहंदी अली खांवह कौन थी1964
ओ मेरे सनम ओ मेरे सनमलता मंगेषकर, मुकेशशंकर जयकिशनशैलेन्द्रसंगम1964
आज फिर जीने की तमन्ना हैलता मंगेषकरसचिन देव बर्मनशैलेन्द्रगाइड1965
अजी रूठ कर अब कहाँ जाइयेगालता मंगेषकर, मोहम्मद रफीशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीआरजू1965
बेदर्दी बालमा तुझको मेरा मन याद करता हैलता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीआरजू1965
दिल जो न कह सकालता मंगेषकररोशनसाहिर लुधियानवीभीगी रात1965
गाता रहे मेरा दिलकिशोर कुमार, लता मंगेषकरसचिन देव बर्मनशैलेन्द्रगाइड1965
गुमनाम है कोईलता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीगुमनाम1965
काँटों से खींच के ये आँचललता मंगेषकरसचिन देव बर्मनशैलेन्द्रगाइड1965
परदेसियों से ना अँखियाँ मिलानालता मंगेषकरकल्याणजी आनन्दजीआनन्द बख्शीजब जब फूल खिले1965
तुम्हीं मेरे मन्दिर तुम्हीं मेरी पूजालता मंगेषकररविराजेन्द्र कृशनखानदान1965
ये समां समां है ये प्यार कालता मंगेषकरकल्याणजी आनन्दजीआनन्द बख्शीजब जब फूल खिले1965
छुपा लो यूँ दिल में प्यार मेराहेमन्त कुमार, लता मंगेषकररोशनमजरूह सुल्तानपुरीममता1966
दुनिया में ऐसा कहाँ सबका नसीब हैलता मंगेषकररोशनआनन्द बख्शीदेवर1966
नैनों में बदरा छायेलता मंगेषकरमदन मोहनराजा मेहंदी अली खांमेरा साया1966
ओ मेरे शाहेखुबालता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीलव्ह इन टोक्यो1966
रहें ना रहें हमलता मंगेषकररोशनमजरूह सुल्तानपुरीममता1966
रहते थे कभी जिनके दिल मेंलता मंगेषकररोशनमजरूह सुल्तानपुरीममता1966
तू जहाँ जहाँ चलेगालता मंगेषकरमदन मोहनराजा मेहंदी अली खांमेरा साया1966
दिल की गिरह खोल दोलता मंगेषकर, मन्ना डेशंकर जयकिशनशैलेन्द्ररात और दिन1967
दुनिया करे सवाललता मंगेषकररोशनसाहिर लुधियानवीबहू बेगम1967
हम तुम युग युग से ये गीत मिलन केलता मंगेषकर, मुकेशलक्ष्मीकान्त प्यारेलालआनन्द बख्शीमिलन1967
होठों पे ऐसी बातलता मंगेषकरसचिन देव बर्मनमजरूह सुल्तानपुरीज्वेल थीफ1967
कभी रात दिन हम दूर थेलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीकल्याणजी आनन्दजीआनन्द बख्शीआमने सामने1967
रात और दिन दिया जलेलता मंगेषकरशंकर जयकिशनशैलेन्द्ररात और दिन1967
सावन का महीना पवन करे सोरलता मंगेषकर, मुकेशलक्ष्मीकान्त प्यारेलालआनन्द बख्शीमिलन1967
चन्दन सा बदनलता मंगेषकरकल्याणजी आनन्दजीइंदीवरसरस्वतीचन्द्र1968
हमने देखी है इन आँखों की महकती खुशबूलता मंगेषकरहेमन्त कुमारगुलजारखामोशी1968
मैं तो भूल चली बाबुल का देशलता मंगेषकरकल्याणजी आनन्दजीइंदीवरसरस्वतीचन्द्र1968
ना तुम बेवफा हो ना हम बेवफा हैंलता मंगेषकरमदन मोहनराजेन्द्र कृशनएक कली मुसकाई1968
फूल तुम्हें भेजा है खत मेंलता मंगेषकर, मुकेशकल्याणजी आनन्दजीइंदीवरसरस्वतीचन्द्र1968
ये दिल तुम बिन कहीं लगता नहींलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीलक्ष्मीकान्त प्यारेलालसाहिर लुधियानवीइज्जत1968
गर तुम भुला ना दोगेलता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीयकीन1969
किसी राह में किसी मोड़ परलता मंगेषकर, मुकेशकल्याणजी आनन्दजीआनन्द बख्शीमेरे हमसफर1969
कोरा कागज था ये मन मेराकिशोर कुमार, लता मंगेषकरसचिन देव बर्मनआनन्द बख्शीआराधना1969
मेरा परदेसी ना आयालता मंगेषकरकल्याणजी आनन्दजीआनन्द बख्शीमेरे हमसफर1969
अच्छा तो हम चलते हैंकिशोर कुमार, लता मंगेषकरलक्ष्मीकांत प्यारेलालआनंद बख्शीआन मिलो सजना1970
बिंदिया चमकेगी चूड़ी खनकेगीलता मंगेषकरलक्ष्मीकांत प्यारेलालआनंद बख्शीदो रास्ते1970
हम थे जिनके सहारेलता मंगेषकरकल्याणजी आनन्दजीइन्दीवरसफर1970
झिलमिल सितारों का आँगन होगालता मंगेषकरलक्ष्मीकांत प्यारेलालआनंद बख्शीजीवन मृत्यु1970
आजा तुझको पुकारे मेरे गीत रेलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीकल्याणजी आनन्दजीआनंद बख्शीगीत1970
मिलो ना तुम तो हम घबरायेंलता मंगेषकरमदन मोहनकैफी आजमीहीर रांझा1970
ना कोई उमंग हैलता मंगेषकरराहुल देव बर्मनआनंद बख्शीकटी पतंग1970
रंगीला रे तेरे रंग मेंलता मंगेषकरसचिन देव बर्मननीरजप्रेम पुजारी1970
तुम मुझे यूँ भुला ना पाओगेलता मंगेषकरशंकर जयकिशनहसरत जयपुरीपगला कहीं का1970
यूँ ही तुम मुझसे बात करती होलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीकल्याणजी आनन्दजीइन्दीवरसच्चा झूठा1970
चलो दिलदार चलोलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीगुलाम मोहम्मदकैफ भोपालीपाकीजा1971
चलते चलते यूँ ही कोई मिल गया थालता मंगेषकरगुलाम मोहम्मदकैफी आजमीपाकीजा1971
इन्हीं लोगों ने ले लीना दुपट्टा मेरालता मंगेषकरगुलाम मोहम्मदमजरूह सुल्तानपुरीपाकीजा1971
इस जमाने में इस मुहब्बत नेलता मंगेषकरलक्ष्मीकांत प्यारेलालआनंद बख्शीमहबूब की मेंहदी1971
खिलते हैं गुल यहाँलता मंगेषकरसचिन देव बर्मननीरजशर्मीली1971
मुझे तेरी मुहब्बत का साहारा मिल गया होतालता मंगेषकर, मोहम्मद रफीलक्ष्मीकांत प्यारेलालआनंद बख्शीआप आये बहार आई1971
रैना बीति जायेलता मंगेषकरराहुल देव बर्मनआनंद बख्शीअमर प्रेम1971
ढाढ़े रहियो ओ बाँके यारलता मंगेषकरगुलाम मोहम्मदमजरूह सुल्तानपुरीपाकीजा1971
बीती ना बिताई रैनालता मंगेषकर, भूपेन्द्रराहुल देव बर्मनगुलजारपरिचय1972
एक प्यार का नगमा हैलता मंगेषकर, मुकेशलक्ष्मीकांत प्यारेलालसंतोष आनन्दशोर1972
गुम है किसी के प्यार मेंकिशोर कुमार,लता मंगेषकरराहुल देव बर्मनमजरूह सुल्तानपुरीरामपुर का लक्ष्मण1972
पत्ता पत्ता बूटा बूटालता मंगेषकर, मोहम्मद रफीलक्ष्मीकांत प्यारेलालमजरूह सुल्तानपुरीएक नजर1972
अब तो है तुमसे हर खुशी अपनीलता मंगेषकरसचिन देव बर्मनमजरूह सुल्तानपुरीअभिमान1973
अँखियों को रहने देलता मंगेषकरलक्ष्मीकांत प्यारेलालआनंद बख्शीबाबी1973
बनाके क्यूं बिगाड़ा रेलता मंगेषकरकल्याणजी आनन्दजीगुलशन बावराजंजीर1973
दीवाने हैं दीवानों को ना घर चाहियेलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीकल्याणजी आनन्दजीगुलशन बावराजंजीर1973
हम तुम एक कमरे में बंद होंलता मंगेषकर, शैलन्द्र सिंगलक्ष्मीकांत प्यारेलालआनंद बख्शीबाबी1973
झूठ बोले कौवा काटेलता मंगेषकर, शैलन्द्र सिंगलक्ष्मीकांत प्यारेलालआनंद बख्शीबाबी1973
लूटे कोई मन का नगरलता मंगेषकरसचिन देव बर्मनमजरूह सुल्तानपुरीअभिमान1973
ना मांगूँ सोना चांदीलता मंगेषकर, शैलन्द्र सिंगलक्ष्मीकांत प्यारेलालआनंद बख्शीबाबी1973
पिया बिना पिया बिनालता मंगेषकरसचिन देव बर्मनमजरूह सुल्तानपुरीअभिमान1973
तेरा मेरा साथ रहेलता मंगेषकररवीन्द्र जैनरवीन्द्र जैनसौदागर1973
तेरे मेरे मिलन की ये रैनाकिशोर कुमार, लता मंगेषकरसचिन देव बर्मनमजरूह सुल्तानपुरीअभिमान1973
तेरी बिंदिया रेलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीसचिन देव बर्मनमजरूह सुल्तानपुरीअभिमान1973
ये दिल और उनकी निगाहों के सायेलता मंगेषकरजयदेवपद्मा सचदेवप्रेम पर्वत1973
एक डाल पर तोता बोलेलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीरवीन्द्र जैनरवीन्द्र जैनचोर मचाये शोर1974
कहीं करती होगी वो मेरा इंतिजारलता मंगेषकर, मुकेशराहुल देव बर्मनमजरूह सुल्तानपुरीफिर कब मिलोगी1974
करवटें बदलते रहेकिशोर कुमार, लता मंगेषकरराहुल देव बर्मनआनंद बख्शीआप की कसम1974
रजनीगंधा फूल तुम्हारेलता मंगेषकरसलिल चौधरीयोगेशरजनीगंधा1974
वादा कर ले साजनालता मंगेषकर, मोहम्मद रफीकल्याणजी आनन्दजीगुलशन बावराहाथ की सफाई1974
अब के सजन सावन मेंलता मंगेषकरसचिन देव बर्मनआनंद बख्शीचुपके चुपके1975
भूल गया सब कुछ याद नहीं अब कुछकिशोर कुमार, लता मंगेषकरराजेश रोशनआनंद बख्शीजूली1975
चुपके चुपके चल री पुरवैयालता मंगेषकरसचिन देव बर्मनआनंद बख्शीचुपके चुपके1975
मेरे नैना सावन भादोंलता मंगेषकरराहुल देव बर्मनआनंद बख्शीमहबूबा1976
दिल तो है दिललता मंगेषकरकल्याणजी आनन्दजीप्रकाश मेहरामुकद्दर का सिकन्दर1978
सत्यं शिवं सुन्दरमलता मंगेषकरलक्ष्मीकांत प्यारेलालनरेन्द्र शर्मासत्यं शिवं सुन्दरम1978
यशोमति मैया सेलता मंगेषकर, मन्ना डेलक्ष्मीकांत प्यारेलालनरेन्द्र शर्मासत्यं शिवं सुन्दरम1978
शीशा हो या दिल होलता मंगेषकरलक्ष्मीकान्त प्यारेलालकैफी आजमीआशा1980
मुझे छू रही हैं तेरी गर्म साँसेलता मंगेषकर, मोहम्मद रफीराजेश रोशनगुलजारस्वयंवर1980
हम बने तुम बने इक दूजे के लियेलता मंगेषकर, एस पी बालसुब्रमणियमलक्ष्मीकान्त प्यारेलालआनन्द बख्शीएक दूजे के लिये1981
जिंदगी की ना टूटे लड़ीलता मंगेषकर, नितिन मुकेशलक्ष्मीकान्त प्यारेलालसन्तोष आनन्दक्रान्ति1981
तेरे मेरे बीच में कैसा है ये बन्धन अन्जानालता मंगेषकर, एस पी बालसुब्रमणियमलक्ष्मीकान्त प्यारेलालआनन्द बख्शीएक दूजे के लिये1981
देखो मैंने देखा है ये इक सपनाअमित कुमार, लता मंगेषकरराहुल देव बर्मनआनन्द बख्शीलव्ह स्टोरी1981
देखा एक ख्वाब तो ये सिलसिले हुयेकिशोर कुमार, लता मंगेषकरशिव हरिजावेद अख्तरसिलसिला1981
तुझ संग प्रीत लगाई सजनाकिशोर कुमार, लता मंगेषकरराजेश रोशनइन्दीवरकामचोर1982
दिखाई दिये यूँलता मंगेषकरखय्याममीर तकी मीरबाजार1982
मेरी किस्मत में तू नहीं शायदलता मंगेषकर, सुरेश वाडकरलक्ष्मीकान्त प्यारेलालसन्तोष आनन्दप्रेम रोग1983
ये गलियाँ ये चौबारालता मंगेषकरलक्ष्मीकान्त प्यारेलालसन्तोष आनन्दप्रेम रोग1983
ऐ दिले नादांलता मंगेषकरखय्यामजां निसार अख्तररजिया सुल्तान1983
मुहब्बत है क्या चीज हमको बताओलता मंगेषकर, सुरेश वाडकरलक्ष्मीकान्त प्यारेलालसन्तोष आनन्दप्रेम रोग1983
तुझसे नाराज नहीं जिंदगीलता मंगेषकरराहुल देव बर्मनगुलजारमासूम1983
भँवरे ने खिलाया फूललता मंगेषकर, सुरेश वाडकरलक्ष्मीकान्त प्यारेलालसन्तोष आनन्दप्रेम रोग1983
जब हम जवां होंगेलता मंगेषकरराहुल देव बर्मनआनन्द बख्शीबेताब1983
जिंदगी प्यार का गीत हैलता मंगेषकरउषा खन्नासावन कुमारसौतन1983
हमें और जीने की चाहत ना होतीलता मंगेषकरराहुल देव बर्मनगुलशन बावराअगर तुम ना होते1983
सागर किनारे दिल ये पुकारेकिशोर कुमार, लता मंगेषकरराहुल देव बर्मनजावेद अख्तरसागर1985
दुश्मन ना करे दोस्त ने वो काम किया हैलता मंगेषकरराजेश रोशनइन्दीवरआखिर क्यूँ1985
तुमसे मिल कर ना जाने क्यूँलता मंगेषकर, शब्बीर कुमारलक्ष्मीकान्त प्यारेलालएस एच बिहारीप्यार झुकता नहीं1985
मैं तेरी दुश्मन दुश्मन तू मेरालता मंगेषकरलक्ष्मीकान्त प्यारेलालआनन्द बख्शीनगीना1986
मन क्यूं बहका रे बहका आधी रात कोआशा भोंसले, लता मंगेषकरलक्ष्मीकान्त प्यारेलालवसन्त देवउत्सव1986
दिल दीवाना बिन सजना के माने नालता मंगेषकरराम लक्ष्मणअसद भोपालीमैने प्यार किया1989
कबूतर जा जा जालता मंगेषकर, एस पी बालसुब्रमणियमराम लक्ष्मणअसद भोपालीमैने प्यार किया1989
मेरे हाथों में नौ नौ चूड़ियाँ हैंलता मंगेषकरशिव हरिआनन्द बख्शीचांदनी1989


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मेरा नया ब्लॉग - संक्षिप्त महाभारत

Tuesday, September 27, 2011

Monday, September 26, 2011

क्वार की कड़कड़ाती धूप

भादों का महीना वर्षा ऋतु का अन्तिम माह होता है। वर्षा के समाप्त होते ही शीत के आरम्भ का ख्याल गुदगुदाने लगता है। किन्तु वास्तव में ऐसा नहीं है कि वर्षा की समाप्ति के साथ ही शीत की शुरुवात हो जाए। वर्षा ऋतु और शीत ऋतु के बीच क्वार का महीना एक संधिकाल होता है। क्वार माह में वर्षा बन्द हो जाती है और धूप फिर से एक बार कड़कड़ाने लगती है। इस संधिकाल में वर्षा ऋतु में हुई भरपूर वर्षा से भीगी धरा को जब भगवान भास्कर की प्रखर किरणे संतप्त करने लगती हैं तो आठों दिशाओं, पूर्व, ईशान, उत्तर, वायव्य, पश्चिम, नैऋत्य, दक्षिण और आग्नेय, में सम्पूर्ण वातावरण आर्द्रता से भर उठता है, ऊमस अपनी चरम सीमा को प्राप्त कर लेती है, ऊमस भरी गर्मी से शरीर चिपचिपाने लगता है। ग्रीष्म की गर्मी को सह लेना आसान है किन्तु क्वार माह की ऊमसयुक्त गर्मी को सहना अत्यन्त दुरूह।

यद्यपि भारत में छः ऋतुओं, वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर का प्रावधान बनाया गया है किन्तु वास्तव में देखा जाए तो हमारे देश में केवल दो ऋतुएँ ही होती हैं - ग्रीष्म और शीत, वर्षा तो हमारे यहाँ ग्रीष्म के दौरान ही हो जाती है। फाल्गुन माह के उत्तरार्ध से लेकर क्वार (आश्विन) माह तक अर्थात् चैत्र (चैत), वैशाख (बैसाख), ज्येष्ठ (जेठ), आषाढ़, श्रावण (सावन), भाद्रपक्ष (भादों) और आश्विन (क्वार) महीनों में गर्मी ही तो पड़ती है। वर्षा ऋतु में वर्षा न होने पर स्पष्ट रूप से लगने लगता है कि यह ग्रीष्म ऋतु ही है।

आश्विन (क्वार) माह में पितृपक्ष तो पूर्णरूप से गर्मी का अहसास कराता है फिर नवरात्रि के दौरान शनैः-शनैः गर्मी कुछ कम होने लगती है तथा विजयादशमी (दशहरा) तक यह बहुत कम हो जाती है। यह गर्मी आश्विन (क्वार) माह की पूर्णिमा अर्थात् शरद् पूर्णिमा के दिन एक प्रकार से पूरी तरह से खत्म हो जाता है। यही कारण है कि शरद् पूर्णिमा को शीत का जन्मदिन कहा जाता है।

शरद् पूर्णिमा की रात्रि के अवसान होते ही कार्तिक माह का आरम्भ हो जाता है और फिर कार्तिक माह से लेकर फाल्गुन के पूर्वार्ध तक अर्थात् कार्तिक, मार्गशी (अगहन),  पौष (पूस) और माघ महीनों में, शीत अपनी सुखद अनुभूति कराने लगती है। पूस माह में ठंड अपनी चरम सीमा में पहुँच जाती है शायद पूस की इस ठंड को ध्यान में रखते हुए प्रेमचंद जी ने "पूस की रात" कहानी लिखी होगी।

किन्तु यह तो मानना ही पड़ेगा कि भारत संसार भर में एक विशिष्ट देश है जहाँ पर एक नहीं, दो नहीं वरन् पूरी छः ऋतुएँ होती हैं।

Sunday, September 25, 2011

सा विद्या या विमुक्तये - जो (अज्ञान से) मुक्ति प्रदान करे वही विद्या है

कठोपनिषद कहता है "जिस प्रकार से एक सतर्क सारथी अपने अश्वों को नियन्त्रण में रखता है, उसी प्रकार से मन को एकाग्र करके परम ज्ञान को प्राप्त करने वाले को अपनी इन्द्रियों को नियन्त्रण में रखना ही चाहिए।" स्पष्ट है कि प्राचीन भारतीय दर्शन में परम ज्ञान अर्थात् विद्या का मुख्य उद्देश्य आत्म नियन्त्रण करना था। इन्द्रियाँ हमारी होती हैं किन्तु हम ही उनके अधीन होते हैं, हम वही करते हैं जो हमारी इन्द्रियाँ हम से करवाती हैं, वे हमें बाँध कर रखना चाहती हैं जबकि हमें उनको बाँध कर रखना चाहिए, हमें उनको अपने अधीन बनाना चाहिए। इन्द्रयों के बन्धन के कारण हम भौतिक सुख के पीछे भागना शुरू कर देते हैं। यह भौतिक सुख एक मरीचिका है, कितना भी भागो, इसे कभी प्राप्त नहीं कर सकोगे। सायकल थी तो मोटर सायकल लेने की इच्छा होती थी, मोटर सायकल आ गई तो कार लेने का विचार मन में आने लगा, जब कार आ जाएगी तो हवाई जहाज प्राप्त करने की इच्छा जागृत होने लगेगी। जकड़े हुए हैं इन इन्द्रियों के बन्धन में हम। इस बन्धन को तोड़ने का एक ही उपाय है, वह है विद्या! कहा भी गया है "सा विद्या या विमुक्तये" - जो (अज्ञान से) मुक्ति प्रदान करे वही विद्या है।

किन्तु आज विद्या कहाँ है? वह विद्या जो मुक्ति प्रदान करे। आज तो शिक्षा है, विद्या का स्थान शिक्षा ने ले लिया है। आज का आदमी बन्धनमुक्त होने के लिए विद्यार्जन नहीं करता, वह अधिक से अधिक धन प्राप्त करने के उद्देश्य से शिक्षा प्राप्त करता है। पहले लाखों रुपये खर्च कर के उच्च शिक्षा प्राप्त करो और बाद में उस प्राप्त शिक्षा के माध्यम से करोड़ों-अरबों रुपये बनाओ। करोड़ों-अरबों रुपये कभी भी ईमानदारी से नहीं बनते, इतना रुपया बनाने के लिए लोगों को लूटना पड़ता है। लुटने वाला अमीर है या गरीब इस बात की कोई परवाह नहीं, बस उसे लुटना चाहिए। अस्पताल खोल लिया है तो किसी को भर्ती करने के पहले ही पाँच-दस हजार रुपये जमा करवा लो, हिसाब बाद में होता रहेगा। इस बात से कोई सरोकार नहीं कि गरीब आदमी इतना रुपया कहाँ से लाएगा, बाप-दादों का मकान तो है उसके पास, यदि लड़का मर रहा है तो वह लड़के की जान को देखेगा कि बाप-दादों के मकान को? मकान बेचकर भी लड़के की जान बचाएगा। स्कूल खोल लिया है तो हर साल एडमिशन के समय पाँच-दस हजार डोनेशन ले लो, जो डोनेशन नहीं दे सकता उसके लड़के-बच्चे के लिए स्कूल में जगह नहीं है, सरकारी स्कूल के दरवाजे खुले हैं उनके लिए। डोनेशन लेने के बाद स्कूल ड्रेस, कापी-किताब बेचो, वह भी सामान्य से चार गुना अधिक दाम में।

हमारी शिक्षा ने हमें धन कमाना सिखाया है। हमने विशेषज्ञ डॉक्टर बनने के लिए लाखों खर्च किए है तो करोड़ों अरबों क्यों नहीं कमाएँ? हमने लाखों रुपया खर्च करके इतना बड़ा स्कूल बनाया है तो क्या उससे कमाएँगे नहीं?

डॉक्टरी पढ़ने में सारी जमा पूँजी खत्म हो गई है, अब अस्पताल बनवाने के लिए रुपये कहाँ से लाएँ? फिक्र करने की जरूरत नहीं है। बहुत से लोगों के पास दो नंबर का असीम धन है, वे अस्पताल बनवाने, स्कूल बनवाने आदि में आपके पार्टनर बन जाएँगे और बाद में होने वाली लूट का हिस्सा बटोरेंगे, उनका काला धन और भी बढ़ता जाएगा।

विद्या को हम भूल गए हैं, बस हमें शिक्षा याद है क्योंकि ज्ञान नहीं चाहिए हमें, हमें तो सिर्फ धन चाहिए। अपनी ही संस्कृति हमारी दृष्टि में हेय हो चुकी है, हम तन से भारतीय और मस्तिष्क से पूर्ण रूप से विदेशीय बन कर रह गए हैं।

Saturday, September 24, 2011

प्रजा को राजा से मुक्ति मिली और राजा को प्रजा से

भ्रष्टाचार का भयानक भूत दिनों-दिन विकरालतर रूप धारण करता जा रहा है। मँहगाई का ताण्डव जनता के पैरों तले जमीन खिसकाए जा रही है। रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल आदि जैसे ईंधन के दाम बार-बार बढ़ाए जा रहे हैं। खून-पसीना बहाकर जनता द्वारा की गई कमाई दिनों-दिन काले धन के रूप में विदेशी बैंकों में जाती जा रही है। घोटाले पर घोटाले हो रहे हैं। फिर भी महान अर्थशास्त्री प्रधानमन्त्री के अर्थशास्‍त्र के अनुसार देश की गरीबी दिनों दिन कम होते जा रही है, खान-पान के लिए एक दिन में रु.32.00 खर्च करने वाला आदमी गरीब की गिनती में नहीं आता। सरकार की बुद्धि के अनुसार एक दिन में एक आदमी प्रति दिन चावल-रोटी पर 5.50 रुपए, दाल पर 1.02 रुपए, दूध पर 2.33 रुपए, तेल पर 1.55 रुपए, साग-तरकारी पर 1.95 रुपए, फल पर 44 पैसे, चीन पर 70 पैसे, नमक-मसाले पर 78 पैसे, अन्य खाद्य पदार्थों पर 1.51 पैसे और ईंधन पर 3.75 पैसे खर्च कर के स्‍वस्‍थ्‍य जीवन-यापन कर सकता है।

किन्तु बेचारी जनता यदि खाना खाने के लिए साधारण से भी साधारण भोजनालय में जाती है तो उसे कम से कम रु.4.00 की एक रोटी, रु.10.00 में आधी प्लेट चाँवल, रु.10.00 में आधी प्लेट दाल और रु.15.00 में आधी प्लेट सामान्य सब्जी के देने होते हैं। इस प्रकार यदि किसी व्यक्ति ने एक समय में 4 रोटी, आधा प्लेट चाँवल, आधी प्लेट दाल और आधी प्लेट सामान्य सब्जी भी खाई तो दोनों समय के भोजन के लिए उसे रु.102.00 खर्च करने पड़ते हैं। इतने रुपये तो उसे सिर्फ सादे खाने के लिए खर्च करने पड़ते हैं किन्तु यदि कभी उसे राइस फ्राई, दाल मक्खनी, पनीर बटर मसाला जैसे स्पेशल खाना खाने की इच्छा हो गई तो?


जाहिर बात यह है कि सरकार की बुद्धि जनता की बुद्धि से अधिक तेज होती है और इसीलिए उसकी समझ में केवल सरकारी आँकड़ों वाली गणित ही आ पाती है, होटलो के वास्तविक रेट वाली गणित उसके दिमाग के ऊपर ही ऊपर से निकल जाता है। अब बेचारी जनता क्या कर सकती है सिवाय त्रस्त होने के?

मोहम्मद बिन तुगलक की मौत पर किसी इतिहासकार ने लिखा था "प्रजा को राजा से मुक्ति मिली और राजा को प्रजा से"। आज प्रजा के स्थान पर जनता है और राजा के स्थान पर सरकार। इसलिए अब जनता यही सोचती है कि जाने कब वह दिन आयेगा जब कहने को मिलेगा कि "जनता को इस सरकार से मुक्ति मिली और इस सरकार को जनता से"?

Friday, September 23, 2011

देश का गरीब एक जानवर से भी गया-बीता

हमारे देश का अर्थशास्त्र कहता है कि एक शहरी गरीब प्रतिदिन रु.32 मूल्य का भोजन कर के स्वस्थ जीवन-यापन कर सकता है जबकि रायपुर के नंदनवन में तेंदुआ के पिंजरे के पास लगे बोर्ड का यह चित्र बताता है कि एक तेंदुए को प्रतिदिन 4 किलो मांस, जिसका मूल्य गिरी से गिरी हालत में भी लगभग रु.400 से कदापि कम नहीं हो सकता, खिलाया जाता है।
(चित्र ललित शर्मा के सौजन्य से)

पुलिस विभाग के प्रशिक्षित कुत्तों को भी प्रतिदिन रु.32 से कहीं अधिक मूल्य का खाना खिलाया जाता होगा।

तो है ना हमारे देश का गरीब एक जानवर से भी गया-बीता!

किन्तु गरीब आदमी के लिए यह खुशी की बात यह भी है कि उससे भी अधिक गए-बीते लोग भी हैं जिन्हें संसद के केन्टीन में रु.12.50 में शाकाहारी थाली और रु.22.00 में मांसाहारी थाली मयस्सर है क्योंकि गरीब आदमी के खाने का मूल्य उनके खाने के मूल्य से कहीं अधिक है।

Thursday, September 22, 2011

विश्व के विषय में कुछ रोचक आँकड़े

विश्व में प्रथम (First in World)

  • विश्व का प्रथम विश्वविद्यालय - तक्षशिला विश्वविद्यालय (भारत)
  • विश्व का प्रथम धर्म - सनातन (वैदिक) धर्म
  • विश्व की प्रथम महिला प्रधान मन्त्री - एस। भण्डारनायके (लंका)
  • विश्व का प्रथम पुस्तक मुद्रित करने वाला देश - चीन
  • विश्व का प्रथम पुस्तक मुद्रित करने वाला देश - चीन
  • विश्व का प्रथम कागजी मुद्रा जारी करने वाला देश - चीन
  • अन्तरिक्ष में कृत्रिम उपग्रह प्रक्षेपण करने वाला विश्व का प्रथम देश - रूस
  • अन्तरिक्ष में भेजा जाने वाला विश्व का प्रथम अन्तरिक्ष शटल - कोलम्बिया
  • अन्तरिक्ष में पहुँचने वाला विश्व का प्रथम व्यक्ति - मेजर यूरी गागरीन (रूस)
  • चन्द्रमा पर मानव भेजने वाला विश्व का प्रथम देश - संयुक्त राज्य अमेरिका
  • चन्द्रमा में उतरने वाला विश्व का प्रथम व्यक्ति - नील आर्मस्ट्रांग
  • मंगल ग्रह में उतरने वाला विश्व का प्रथम अन्तरिक्ष यान - वाइकिंग-1
  • विश्व के चारों ओर समुद्री यात्रा करने वाला विश्व का प्रथम व्यक्ति - फर्डीनेंड मैगलन
  • वायुयान से उड़ान भरने वाला विश्व का प्रथम व्यक्ति - राइट बन्धु
  • विश्व का प्रथम नगर जिस पर परमाणु बम गिराया गया - हिरोशिमा (जापान)
विश्व में सर्वाधिक लम्बा, ऊँचा और बड़ा (Longest, Highest and Largest in World)

  • सबसे बड़ा महासागर - प्रशान्त महासागर
  • सबसे छोटा महासागर - अंटार्कटिक महासागर
  • सबसे बड़ा महाद्वीप - एशिया
  • सबसे बड़ा महाद्वीप - ऑस्ट्रेलिया
  • सबसे बड़ा पक्षी - शुतुरमुर्ग
  • सबसे छोटा पक्षी - हमिंग बर्ड
  • सबसे बड़ी कार्यलाय भवन - पेन्टागन (सं.रा. अमेरिका)
  • सबसे ऊँची पर्वतमाला - हिमालय
  • सबसे ऊँचा पठार - पामीर का पठार
  • सबसे लम्बा बाँध - हीराकुण्ड

Wednesday, September 21, 2011

एक नदी के दो थे किनारे कैसे भला हम मिलते

अंग्रेजी ब्लोगिंग का संसार भले ही एक आभासी दुनिया हो, किन्तु हिन्दी ब्लोगिंग एक-दूसरे के बीच नजदीकी बनाने का एक माध्यम बन गया है। ब्लोगिंग के माध्यम से हम न केवल अपने विचार दूसरों के समक्ष रखते हैं बल्कि अपनी पसंद-नापसंद के विषय में भी अपने मित्रों को अवगत कराते हैं। आज मैं अपनी पसंद का यह गीत आपको सुनाना चाहता हूँ जो कि न केवल मेलोडियस संगीत से सजा है बल्कि महान गायिका नूरजहां के मधुर कण्ठस्वर का अद्भुत उदाहरण भी है, उम्मीद है कि यह गीत आपको भी पसंद आयेगा

Monday, September 19, 2011

इन्टरनेट आँकड़े - 2010

  • सन् 2010 में भेजी गई ईमेलों की संख्या - 107 ट्रिलियन
  • प्रतिदिन ईमेल की औसत संख्या - 294 बिलियन
  • समस्त विश्व में ईमेल प्रयोगकर्ताओं की संख्या - 1.88 बिलियन
  • सन्  2010 में नये ईमेल प्रयोगकर्ताओं की संख्या - 480 मिलियन
  • दिसम्बर 2010 तक कुल वेबसाइट्स/ब्लोग्स की संख्या - 255 million मिलियन
  • सन् 2010 में बनाए गए वेबसाइट्स/ब्लोग्स की संख्या - 21.4 मिलियन
  • .COM वाले डोमेननेम की संख्या - 88.8 मिलियन
  • .NET वाले डोमेननेम की संख्या - 13.2 मिलियन
  • .ORG वाले डोमेननेम की संख्या - 8.6 मिलियन
  • जून 2010 तक समस्त विश्व में इन्टरनेट प्रयोगकर्ताओं की संख्या - 1.97 बिलियन
  • एशिया में इन्टरनेट प्रयोगकर्ताओं की संख्या - 825.1 मिलियन
  • यूरोप में इन्टरनेट प्रयोगकर्ताओं की संख्या - 475.1 मिलियन
  • अमेरिका में इन्टरनेट प्रयोगकर्ताओं की संख्या - 266.2 मिलियन
  • इन्टरनेट में कुल ब्लोगों की संख्या - 152 मिलियन
  • प्रतिदिन यूट्यूब में व्हीडियो देखने वालों की संख्या - 2 बिलियन
(उपरोक्त आँकड़े इन्टरनेट में उपलब्ध विभिन्न स्रोतो संकलित किए गए हैं।)

Sunday, September 18, 2011

रोचक गणनाएँ

अधिकतर लोगों को गणित कठिन विषय लगता है क्योंकि गणित को शुष्क विषय माना जाता है। किन्तु यह भी सत्य है कि गणित की अनेक गणनाएँ बहुत ही रोचक भी हैं। जरा निम्न गणनाओं को देखिए और स्वयं निश्चय कीजिए कि ये गणनाएँ रोचक हैं या नहीं!

(1)
1 x 8 + 1 = 9
12 x 8 + 2 = 98
123 x 8 + 3 = 987
1234 x 8 + 4 = 9876
12345 x 8 + 5 = 98765
123456 x 8 + 6 = 987654
1234567 x 8 + 7 = 9876543
12345678 x 8 + 8 = 98765432
123456789 x 8 + 9 = 987654321
(2)
1 x 9 + 2 = 11
12 x 9 + 3 = 111
123 x 9 + 4 = 1111
1234 x 9 + 5 = 11111
12345 x 9 + 6 = 111111
123456 x 9 + 7 = 1111111
1234567 x 9 + 8 = 11111111
12345678 x 9 + 9 = 111111111
123456789 x 9 + 10 = 1111111111
(3)
9 x 9 + 7 = 88
98 x 9 + 6 = 888
987 x 9 + 5 = 8888
9876 x 9 + 4 = 88888
98765 x 9 + 3 = 888888
987654 x 9 + 2 = 8888888
9876543 x 9 + 1 = 88888888
98765432 x 9 + 0 = 888888888
(4)
1 x 1 = 1
11 x 11 = 121
111 x 111 = 12321
1111 x 1111 = 1234321
11111 x 11111 = 123454321
111111 x 111111 = 12345654321
1111111 x 1111111 = 1234567654321
11111111 x 11111111 = 123456787654321
111111111 x 111111111 = 12345678987654321
(5)
12345679 x 9 = 111111111
12345679 x 18 = 222222222
12345679 x 27 = 333333333
12345679 x 36 = 444444444
12345679 x 45 = 555555555
12345679 x 54 = 666666666
12345679 x 63 = 777777777
12345679 x 72 = 888888888
12345679 x 81 = 999999999
(6)
9 x 9 = 81
99 x 99 = 9801
999 x 999 = 998001
9999 x 9999 = 99980001
99999 x 99999 = 9999800001
999999 x 999999 = 999998000001
9999999 x 9999999 = 99999980000001
99999999 x 99999999 = 9999999800000001
999999999 x 999999999 = 999999998000000001
......................................
(7)
6 x 7 = 42
66 x 67 = 4422
666 x 667 = 444222
6666 x 6667 = 44442222
66666 x 66667 = 4444422222
666666 x 666667 = 444444222222
6666666 x 6666667 = 44444442222222
66666666 x 66666667 = 4444444422222222
666666666 x 666666667 = 444444444222222222
......................................

Saturday, September 17, 2011

हम राजभाषा मास के स्थान पर राष्ट्रभाषा मास क्यों नहीं मनाते?

हिन्दी वेबसाइट के पोस्ट सामान्य ज्ञान प्रश्नावली – 202 (General Knowledge Quiz in Hindi) में राजभाषा से सम्बधित एक प्रश्न के सन्दर्भ में निम्न दो टिप्पणियाँ मिली हैं -
भारतीय संविधानने हिंदी भाषा को राष्ट्र भाषा की सज्ञा दी गयी है
आपका सुझाव गलत है कृपया सही सुझाव दीजिये
 संविधान के अनु.३४३ के अनुसार  देवनागरी लिपि में लिखी जानेवाली हिंदी भाषा संघ की राजभाषा है. जब सवाल उठता है की क्या हिंदी एक राष्ट्र भाषा भी है  तो हमें संविधान की अष्टम सूची का सन्दर्भ देना पडता है. अष्टम सूची की सभी भाषायों  को राष्ट्र भाषा का दर्जा प्राप्त है. चूँकि अष्टम सूची में हिंदी भी शामिल है इसलिए हिंदी भी एक राष्ट्र भाषा है. इसप्रकार हिंदी को  संघ की  राजभाषा और राष्ट्र भाषा का दर्जा प्राप्त  है.
अब प्रश्न यह उठता है कि जब राष्ट्रध्वज एक है, राष्ट्रगान एक है, राष्ट्रीय पशु एक है .... तो राष्ट्रभाषा का एक से अधिक होना क्या उचित है? क्या अनेक भाषाओं को राष्ट्रभाषा का दर्जा देना  तुष्टिकरण की नीति नहीं है? क्या यह हिन्दी के साथा अन्याय नहीं है। राजभाषा अधिनियम के स्थान पर राष्ट्रभाषा अधिनियम क्यों नहीं बनाया गया? राजभाषा मास क्यों मनाया जाता है, राष्ट्भाषा मास क्यों नहीं?

मूलतः मैं विशुद्ध विज्ञान (गणित, भौतिकशास्त्र, रसायनशास्त्र) का विद्यार्थी रहा हूँ इसलिए संविधान आदि के विषय में मेरा ज्ञान अपेक्षाकृत अल्प है।

अतः इस विषय में आपके विचार जानकर मुझे अत्यन्त प्रसन्नता होगी।

Friday, September 16, 2011

कम्प्यूटर तथा इंटरनेट सम्बन्धित कुछ रोचक जानकारी

  • संसार का पहला कम्प्यूटर, जिसे Z1 कहा जाता था, का आविष्कार सन् 1936 में कोनार्ड ज़ूसे Konrad Zuse ने किया था। उन्होंने ही सन् 1939 में Z2 नामक पूर्णतः इलेक्ट्रो -मैकेनिकल कम्प्यूटर बनाया।
  • सन् 1964 में डौंग इंगेलबर्ट (Doug Engelbart) ने पहला कम्प्यूटर माउस बनाया जो कि लकड़ी का बना था।
  • "Stewardesses" अंग्रेजी का एक ऐसा शब्द है जिसे केवल बाएँ हाथ की उँगलियों का प्रयोग करके टाइप किया जा सकता है।
  • 5,00,00,000 लोगों तक पहुँचने में रेडियों को 38 वर्ष लगे और टेलिव्हिजन को 13 वर्ष, जबकि वर्ल्ड वाइड वेब को इसके लिए मात्र 4 वर्ष ही लगे।
  • Symbolics.com सबसे पहले रजिस्टर किया गया डोमेननेम था़।
  • प्रतिमाह दस लाख से भी अधिक डोमेननेम रजिस्टर होते हैं।
  • समस्त संसार में लगभग 1.06 बिलियन इंस्टैंट मैसेजिंग खाते हैं।
  • पहला बैनर एडव्हर्टाइजिंग सन् 1994 मे हुआ था।
  • कम्प्यूटर प्रयोगकर्ता औसत रूप से प्रति मिनट 7 बार पलकें झपकाते हैं जबकि पलकें झपकाने की सामान्य दर 20 बार प्रति मिनट है।
  • सन् 2012 तक इंटरनेट से जुड़े कम्प्यूटरों की संख्या लगभग 17 बिलियन हो जाएगी।
जहाँ उपरोक्त जानकारी रोचक हैं वहीं निम्न दो जानकारी हमारी मानसिक विकृति को भी दर्शाती हैं -
  • इंटरनेट में चित्रों की संख्या का 80% नग्न औरतों के चित्र के हैं।
  • इंटरनेट में सामान्य साइट और पोर्न साइट का अनुपात 1:5 है।

Thursday, September 15, 2011

लान तो रे लान तो डण्डा ला, मारौं तरी के बण्डा ला

मानव मस्तिष्क स्मृतियों को अपूर्व भण्डार है। जन्म से लेकर मृत्युपर्यन्त की सभी बातों को संजो कर रखे रहता है यह। जन्म से लेकर होश सम्भालने तक की भी बातें इस भण्डार में होती हैं किन्तु कभी उभर कर आ नहीं पातीं, हाँ यदि किसी को हिप्नोटाइज कर ट्रांस में लाकर उन्हें भी अवचेतन के गर्त से चेतन की सतह तक लाया जा सकता है। होश सम्भालने के बाद की स्मृतियाँ अचेतन रूपी यादों के कब्र में पूरी तरह से दफन नहीं हो पातीं और अक्सर बुलबुले के रूप में चेतन तक आती रहती हैं। कल मुझे भी अपने बचपन की अनेक बातें याद आ गईं थी। याद आने का कारण था कल, राहुल सिंह के बुलावे पर, "छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग" के शिविर में पहुँच जाना। राहुल जी का स्नेह मुझे मिलता ही रहता है और विशेष कार्यक्रमों में वे मुझे कभी भी विस्मृत नहीं करते।

 "छत्तीसगढ़ी राजभाषा आयोग" के उस शिविर में एक सत्र छत्तीसगढ़ी कहानियों का भी था। कहानी को छत्तीसगढ़ी में "कहिनी" कहा जाता है। इस शब्द ने मुझे इस शब्द ने अपने बचपन में अपनी दादी माँ की सुनाई गई कितनी ही कहानियों को बरबस याद दिला दिया - भगवान राम की कहानी, श्रवण कुमार की कहानी, कृष्ण और सुदामा की कहानी, गज और ग्राह की कहानी आदि के साथ ही साथ "कोलिहा अउ बेन्दरा" के कहिनी "ढूँढ़ी रक्सिन" के कहिनी .............. इन सभी कहानियों को मेरी दादी माँ मुझे छत्तीसगढ़ी में सुनाया करती थीं। किसी भी दिन मैं रात को बगैर कहानी सुने सोता नहीं था। कहानी के सिवा और कुछ चारा भी तो नहीं था मेरे पास, रेडियो और टीव्ही तो दूर की बात है, घर में बिजली का कनेक्शन तक नहीं था। रात में 'कन्दील', 'चिमनी' या 'फुग्गा' की रोशनी और दादी माँ की कहानी मुझे बहुत ही भाती थीं।

"खिरमिच" की कहानी मुझे बहुत पसन्द थी, पर "खिरमिच" की कहानी कभी-कभार ही मुझे सुनने को मिलता था क्योंकि उस कहानी को मुझे मेरी दादी माँ नहीं बल्कि मेरी माँ सुनाती थी, जिन्हें घर के काम-काज से कभी फुरसत ही नहीं मिल पाता था मुझे कहानी सुनाने के लिए। इस कारण से जब भी मुझे मौका मिलता मैं माँ से जिद करके कहा करता था "माँ, आज मोला खिरमिच के कहिनी सुना ना" और वे कभी-कभार मेरे जिद को देखकर सुनाना शुरू कर देती थीं -

"सुन रे गोपाल, दू बहिनी रहिन।"

("सुन रे गोपाल, दो बहनें थीं।")

मैं कहता, "हूँ", क्योंकि मैं जानता था कि बिना हुँकारू के कहानी सुनाने का रिवाज ही नहीं था।

"छोटे बहिनी के चार बेटा रहिस, मूड़ुल, हाथुल, गोड़ुल अउ खिरमिच।"

("छोटी बहन के चार बेटे थे, मूड़ुल, हाथुल, गोड़ुल और खिरमिच।")

"हूँ।"

"बड़े बहिनी रहिस रक्सिन। वोहर अपन घरवाला अउ सब्बो लइका मन ला खा डारे रहिस।"

("बड़ी बहन राक्षसिन थी। उसने अपने घरवाले और बच्चों को खा डाला था।")

"हूँ।"

"एक दिन रक्सिन हा अपन छोटे बहिनी ला कहिस के बहिनी, आज मोला बने नइ लागत हे, रात में मोर संग सुते बर तोर कोनो लइका ला भेज देबे का?"

("एक दिन राक्षसिन ने अपनी छोटी बहन से कहा कि बहन, आज मेरी तबियत ठीक नहीं है, रात में मेरी देखभाल के लिए अपने किसी बच्चे को भेज दोगी क्या?")

"हूँ।"

"ले का होही, भेज देहूँ।"

("कोई बात नहीं, भेज दूँगी।")

"हूँ।"

"रक्सिन के जाय के बाद छोटे बहिनी हा मूड़ुल ला कहिस, 'अरे मूड़ुल, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"

(राक्षसिन के जाने के बाद छोटी बहन ने मूड़ुल से कहा, 'अरे मूड़ुल, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")

"सब्बो लइका मन जानत रहिन हे कि ओखर बड़े दाई हा रक्सिन हे, एखरे सेती मूड़ुल हा कहिस, 'मैं नइ जाँव दाई, मोर मूड़ पिरात हे'।"

("सभी बच्चे जानते थे कि उनकी बड़ी माँ राक्षसिन है, इसीलिए मूड़ुल ने कहा, 'मैं नहीं जाता माँ, मेरा सर दर्द कर रहा है'।")

"तब वो हा हाथुल ला कहिस, 'अरे हाथुल, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"

("तब उसने हाथुल से कहा, 'अरे हाथुल, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")

"हाथुल बोलिस, 'मैं नइ जाँव दाई, मोर हाथ पिरात हे'।"

("हाथुल बोला, 'मैं नहीं जाता माँ, मेरा हाथ दर्द कर रहा है'।")


"फेर वो हा गोड़ुल ला कहिस, 'अरे गोड़ुल, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"

("फिर उसने गोड़ुल से कहा, 'अरे हाथुल, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")

"गोड़ुल बोलिस, 'मैं नइ जाँव दाई, मोर गोड़ पिरात हे'।"

("गोड़ुल बोला, 'मैं नहीं जाता माँ, मेरा हाथ दर्द कर रहा है'।")

"आखिर में वो हा खिरमिच ला कहिस, 'अरे खिरमिच, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"

("अन्त में उसने खिरमिच से कहा, 'अरे खिरमिच, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")

"खिरमिच बोलिस, 'हव दाई, मैं हा चल दुहूँ'।"

("खिरमिच बोला, 'ठीक है माँ, मैं चल दूँगा'।")

"साँझ होइस तो खिरमिच हा जंगल में अपन बड़े दाई घर पहुँ गइस।"

("शाम हुई तो खिरमिच जंगल में अपनी बड़ी माँ के घर पहुँच गया।")

"वोखर बड़े दाई हा बहुत खुश होइस अउ कहिस के बेटा खिरमिच, बने करे रे। अब मैं हा जंगल में जात हौं, अधरतिया आहूँ। तैं हा खा-पी के सुत जाबे।"

("उसकी बड़ी माँ बहुत खुश हुई और बोली कि बेटा खिरमिच, तूने बहुत अच्छा किया। अब मैं जंगल में जा रही हूँ, आधी रात को वापस आउँगी। तू खा पी-कर सो जाना।)

"रक्सिन के जाए के बाद खिरमिच हा भात-साग खा के सुते के तैयारी करिस। एक ठिक मोटहा असन गोल सुक्खा लकड़ी ला खटिया में रख के ओढ़ा दिहिस अउ अपन हा लुका के सुत गे।"

("राक्षसिन के जाने के बाद खिरमिच ने खाना खाकर सोने की तैयारी की। एक मोटी, गोल सूखी लकड़ी को उसने खाट पर रख कर ओढ़ा दिया और स्वयं छुप कर सो गया।")

"अधरतिया होइस तो रक्सिन हा घर आइस। वोखर नाक में मनखे के गंध हा आत रहिस हे।"

("आधी रात हुई तो राक्षसिन घर वापस आई। उसकी नाक में आदमी की गंध आ रही थी।")

"मानो गन, मानो गन, काला खाँव, काला बचाँव, इही खिरमिच ला खाँव रे कहिके वो हा खटिया में रखे लकड़ी ला कटरंग-कटरंग चाब-चाब के खा डारिस।"

("मानव गंध, मानव गंध, किसको खाउँ, किसको बचाऊँ, इसी खिरमिच को खाउँगी कहते हुए उसे खाट पर रखे लकड़ी को चबा-चबा कर खा डाला।")

"फेर हँउला भर पानी ला पी के कहिस के हत्त रे खिरमिच, हाड़ाच् हाड़ा रेहे रे, थोरको मास नइ रहिस तोर में।"

("फिर एक हुंडी पानी पीकर बोली कि हत्तेरे की रे खिरमिच, तू हड्डी ही हड्डी था, माँस जरा भी नहीं था तुझमें।")

"अइसे कहिके रक्सिन हा सुत गे।"

("ऐसा कह कर राक्षसिन सो गई।")

"बिहिनिया होइस तो खिरमिच चिचिया के कहिस जोहार ले बड़े दाई अउ दुआरी ला खोल के जल्दी से भाग गे।"

("सवेरा होने पर खिरमिच ने चिल्ला कर अपनी बड़ी माँ का अभिवादन किया और दरवाजा खोल कर जल्दी से भाग लिया।")

"मैं हा खिरमिच ला नइ खा पाएवँ कहिके रक्सिन ला अखर गे।"

("मैं खिरमिच को नहीं खा पाई सोचकर राक्षसिन को अखरने लगा।")

"कुछु दिन जाय के बाद रक्सिन हा फेर अपन छोटे बहिनी तीर आ के कहिस के बहिनी, आज मोला बने नइ लागत हे, रात में मोर संग सुते बर तोर कोनो लइका ला भेज देबे का?"

("कुछ दिन बीतने के बाद राक्षसिन ने अपनी छोटी बहन के पास आकर फिर से कहा कि बहन, आज मेरी तबियत ठीक नहीं है, रात में मेरी देखभाल के लिए अपने किसी बच्चे को भेज दोगी क्या?")

"रक्सिन के जाय के बाद छोटे बहिनी हा मूड़ुल ला कहिस, 'अरे मूड़ुल, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"

(राक्षसिन के जाने के बाद छोटी बहन ने मूड़ुल से कहा, 'अरे मूड़ुल, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")


"मूड़ुल हा कहिस, 'मैं नइ जाँव दाई, मोर मूड़ पिरात हे'।"

("मूड़ुल ने कहा, 'मैं नहीं जाता माँ, मेरा सर दर्द कर रहा है'।")

"तब वो हा हाथुल ला कहिस, 'अरे हाथुल, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"

("तब उसने हाथुल से कहा, 'अरे हाथुल, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")

हाथुल बोलिस, 'मैं नइ जाँव दाई, मोर हाथ पिरात हे'।"

("हाथुल बोला, 'मैं नहीं जाता माँ, मेरा हाथ दर्द कर रहा है'।")

"फेर वो हा गोड़ुल ला कहिस, 'अरे गोड़ुल, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"

("फिर उसने गोड़ुल से कहा, 'अरे हाथुल, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")

गोड़ुल बोलिस, 'मैं नइ जाँव दाई, मोर गोड़ पिरात हे'।"

("गोड़ुल बोला, 'मैं नहीं जाता माँ, मेरा हाथ दर्द कर रहा है'।")

"आखिर में वो हा खिरमिच ला कहिस, 'अरे खिरमिच, आज रात के तैं हा अपन बड़े दाई घर चल देबे सुते बर'।"

("अन्त में उसने खिरमिच से कहा, 'अरे खिरमिच, आज रात को तू अपनी बड़ी माँ के घर चल देना'।")

"खिरमिच बोलिस, 'हव दाई, मैं हा चल दुहूँ'।"

("खिरमिच बोला, 'ठीक है माँ, मैं चल दूँगा'।")

"साँझ होइस तो खिरमिच हा जंगल में अपन बड़े दाई घर पहुँ गइस।"

("शाम हुई तो खिरमिच जंगल में अपनी बड़ी माँ के घर पहुँच गया।")

"वोखर बड़े दाई हा बहुत खुश होइस अउ कहिस के बेटा खिरमिच, बने करे रे। अब मैं हा जंगल में जात हौं, अधरतिया आहूँ। तैं हा खा-पी के सुत जाबे।"

("उसकी बड़ी माँ बहुत खुश हुई और बोली कि बेटा खिरमिच, तूने बहुत अच्छा किया। अब मैं जंगल में जा रही हूँ, आधी रात को वापस आउँगी। तू खा पी-कर सो जाना।)

"रक्सिन के जाए के बाद खिरमिच हा भात-साग खा के सुते के तैयारी करिस। ए बार वोहर अतेक-अतेक पिसान ला सान के वोखर एक ठिक पुतरा बनाइस अउ वोला खटिया में रख के सुता दिहिस अउ अपन हा लुका के सुत गे।"

("राक्षसिन के जाने के बाद खिरमिच ने खाना खाकर सोने की तैयारी की। इस बार उसने बहुत सारा आटा गूँथकर एक पुतला बनाया तथा उसे खाट पर सुला दिया और खुद छुप कर सो गया।")

"अधरतिया होइस तो रक्सिन हा घर आइस। वोखर नाक में मनखे के गंध हा आत रहिस हे।"

("आधी रात हुई तो राक्षसिन घर वापस आई। उसकी नाक में आदमी की गंध आ रही थी।")

"मानो गन, मानो गन, काला खाँव, काला बचाँव, इही खिरमिच ला खाँव रे कहिके वो हा खटिया में रखे पुतरा ला गुपुल-गुपुल के खा डारिस।"

("मानव गंध, मानव गंध, किसको खाउँ, किसको बचाऊँ, इसी खिरमिच को खाउँगी कहते हुए उसे खाट पर रखे पुतले को खा डाला।")

"फेर हँउला भर पानी ला पी के कहिस के हत्त रे खिरमिच, मासेच् मास रेहे रे, हाड़ा एक्को नइ रहिस तोर में।"

("फिर एक हुंडी पानी पीकर बोली कि हत्तेरे की रे खिरमिच, तू मांस ही मांस था, हड्डी एक भी नहीं थी तुझमें।")

"अइसे कहिके रक्सिन हा सुत गे।"

("ऐसा कह कर राक्षसिन सो गई।")

"बिहिनिया होइस तो खिरमिच चिचिया के कहिस जोहार ले बड़े दाई अउ दुआरी ला खोल के जल्दी से भाग गे।"

("सवेरा होने पर खिरमिच ने चिल्ला कर अपनी बड़ी माँ का अभिवादन किया और दरवाजा खोल कर जल्दी से भाग लिया।")

"अब ए खिरमिच ला नइ छोड़वँ कहिके रक्सिन खिरमिच ला खाए बर वोखर पिछू भागिस।"

("इस बार मैं खिरमिच को नहीं छोड़ूँगी कहकर राक्षसिन खिरमिच को खाने के लिए उसके पीछे भागी।")

"खिरमिच हा डेरा के एक ठिक उच्च असन रूख में चढ़ गे।"

("डर कर खिरमिच एक ऊँचे वृक्ष पर चढ़ गया।")

"रक्सिन ला रूख चढ़े बर नइ आत रहिस हे।"

("राक्षसिन को झाड़ पर चढ़ना नहीं आता था।")

"वो हा जंगल के जम्मो बघवा मन ला बुला लिहिस जउन मन बारा झिन रहिस हे।"

(उसने जंगल सभी बाघों को बुला लिया जो कि संख्या में बारह थे।")

"एक बघवा उप्पर दुसर बघवा चढ़त गइन अउ सब ले उप्पर बघवा के पीठ में रक्सिन हा चढ़ गे।"

("एक बाघ के ऊपर दूसरा बाघ चढ़ गया और सबसे ऊपर वाले बाघ की पीठ पर राक्षसिन चढ़ गई।")

"रक्सिन ला अपन तीर पहुँचत देख के खिरमिच हा चिचिया के कहिस के लान तो रे लान तो डण्डा ला, मारौं तरी के बण्डा ला।"

(राक्षसिन को अपने पास पहुँचते देख कर खिरमिच ने चिल्ला कर कहा कि डण्डा लाओ, मैं नीचे की छोटी पूछं वाले को मारूँगा।")

"एला सुन के सबले निच्चे के बघवा, जउन हा बण्डा रहिस, डेरा भागिस।"

("यह सुनकर सबसे नीचे का बाघ, जिसकी पूँछ छोटी थी, डर कर भागा।")

"वोखर भागे ले जम्मो बघवा मन दन्न दन्न गिर गे अउ उप्पर ले गिर के रक्सिन हा मर गे।"

("उसके भागने से सारे बाघ नीचे गिर गए और इतनी ऊँचाई से गिरने के कारण राक्षसिन मर गई।")

"खिरमिच हा खुशी खुशी घर आ गे।"

("खिरमिच खुशी के साथ अपने घर वापस आ गया।")

अब आपको क्या बताऊँ कि आज भी इस कहानी की याद आने पर मैं बासठ साल का बुड़्ढा खुद को बच्चा ही महसूस करने लगता हूँ।

Wednesday, September 14, 2011

विभिन्न प्रकार के विज्ञान एवं उनके अन्तर्गत किए जाने वाले अध्ययन (various types ofSciences and Studies)

  • एन्थ्रोपोलॉजी - नृतत्व शास्त्र का अध्ययन
  • एनाटॉमी - मानव-शरीर की संरचना का अध्ययन
  • आस्टियोलॉजी - अस्थियों (हड्डियों) का अध्ययन
  • गायनोकोलॉजी - मादाओं के प्रजनन अंगों का अध्ययन
  • एम्ब्रायोलॉजी - भ्रूण एवं सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • पैथोलॉजी -रोगों के कारण एवं सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • न्यूरोलॉजी- नाड़ी स्पंदन एवं सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • डर्मेटोलॉजी - त्वचा एवं सम्बन्धित रोगों का अध्ययन
  • टेराटोलॉजी - ट्‌यूमर का अध्ययन
  • टैक्टोलॉजी - पशु - शरीर का रचनात्मक संघटन का अध्ययन
  • आर्निथोलॉजी - पक्षियों से सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • बायोलॉजी -जीवधारियों का शारीरिक अध्ययन
  • बॉटनी - पौधों का अध्ययन
  • एंटोमोलॉजी - कीट एवं सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • एरेक्नोलॉजी - मकड़े एवं सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • आक्थायोलॉजी -मछलियां एवं सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • पैलिओंटोलॉजी -जीवाश्म एवं सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • पैरासाइटोलॉजी - परजीवी वनस्पतियां एवं जीवाणु का अध्ययन
  • फायनोलॉजी - जीव -जन्तुओं का जातीय विकास का अध्ययन
  • एग्रोलॉजी -भूमि (मिट्‌टी) का अध्ययन
  • डेन्ड्रोलॉजी -वृक्षों का अध्ययन
  • जियोलॉजी - पृथ्वी की आंतरिक्ष संरचना का अध्ययन
  • ओसनोग्राफी -समुद्र से सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • कॉस्मोलॉजी - ब्रम्हांड का अध्ययन का अध्ययन
  • एस्ट्रोनॉमी -तारों एवं ग्रहों से सम्बन्धित विषय तथा आकाशीय पिंडों का अध्ययन
  • आंतरिक्ष विज्ञान -आंतरिक्ष यात्रा एवं सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • एयरोनॉटिक्स - विमानों की उड़ान का अध्ययन
  • ऑप्टिक्स -प्रकाश का गुण एवं उसकी संरचना का अध्ययन
  • इकोलॉजी -परिस्थितिकी का अध्ययन
  • इक्क्राइनोलॉजी -गुप्त सूचनाएं एवं सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • क्रिप्टोग्रॉफी - गुप्त लेखन अथवा गूढ लिपि का अध्ययन
  • जेम्मोलॉजी - रत्नों का अध्ययन
  • डेक्टाइलॉजी - अंकों तथा संख्याओ का अध्ययन
  • न्यूमिसमेटिक्स - मुद्रा – निर्माण एवं अंकन का अध्ययन
  • ब्रायोलॉजी – दलदल एवं कीचड का अध्ययन
  • बैलनियोलॉजी - खनिज निष्कासन एवं सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • बैक्टीरियोलॉजी -जीवाणुओं से सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • मिनेरालॉजी - खनिजों का अध्ययन
  • मेटेरोलॉजी - वातावरण एवं सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • माइका्रेलॉजी -फफूंद एव सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • मायोलॉजी -मांस -पेशियों का अध्ययन
  • रेडियोबायोलॉजी -जीव-जंतुओं पर सौर विकिरण का प्रभाव का अध्ययन
  • लिथोलॉजी -चट्‌टों एवं पत्थरो से सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • लिम्नोलॉजी - झीलों एवं स्थलीय जल भागों का अध्ययन
  • सीरोलॉजी -रक्त सीरम एवं रक्त आधान से सम्बन्धित का अध्ययन
  • स्पलैक्नोलॉजी - शरीर के आंतरिक अंग एवं सम्बन्धित का अध्ययन
  • स्पेस बायलोजी -पृथ्वी से परे आंतरिक में जीवन की सम्भावना का अध्ययन
  • हीमेटोलॉजी - रक्त एवं सम्बन्धित विषयों का अध्ययन
  • हेलियोलॉजी - सूर्य का अध्ययन
  • हरपेटोलॉजी - सरीसूपों का अध्ययन
  • हिस्टोलॉजी - शरीर के ऊतक एवं सम्बन्धित विषय का अध्ययन
  • हिप्नोलॉजी - निद्रा एवं सम्बन्धित विषयों का अध्ययन का अध्ययन

Tuesday, September 13, 2011

अन्तरिक्ष से सम्बन्धित कुछ रोचक जानकारी

  • सूर्य से पृथ्वी पर आने वाला प्रकाश 30 हजार वर्ष पुराना होता है।
अब आप कहेंगे कि सूर्य से पृथ्वी की दूरी तो मात्र 8.3 प्रकाश मिनट है तो ऐसा कैसे हो सकता है। यह सच है कि प्रकाश को सूर्य से पृथ्वी तक आने में 8.3 मिनट ही लगते हैं किन्तु जो प्रकाश हम तक पहुँच रहा है उसे सूर्य के क्रोड (core) से उसके सतह तक आने में 30 हजार वर्ष लगते हैं और वह सूर्य की सतह पर आने के बाद ही 8.3 मिनट पश्चात् पृथ्वी तक पहुँचता है, याने कि वह प्रकाश 30 हजार वर्ष पुराना होता है।
  • अन्तरिक्ष में यदि धातु के दो टुकड़े एक दूसरे को स्पर्श कर लें तो वे स्थायी रूप से जुड़ जाते हैं।
यह भी अविश्वसनीय लगता है किन्तु यह सच है। अन्तरिक्ष के निर्वात के कारण दो धातु आपस में स्पर्श करने पर स्थायी रूप से जुड़ जाते हैं, बशर्तें कि उन पर किसी प्रकार का लेप (coating) न किया गया हो। पृथ्वी पर ऐसा नहीं हो सकता क्योंकि वायुमण्डल दोनों धातुओं के आपस में स्पर्श करते समय उनके बीच ऑक्सीडाइज्ड पदार्थ की एक परत बना देती है।
  • अन्तरिक्ष में ध्वनि एक स्थान से दूसरे स्थान तक नहीं जा सकती।
  • जी हाँ, ध्वनि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए किसी न किसी माध्यम की आवश्यकता होती है और अन्तरिक्ष में निर्वात् होने के कारण ध्वनि को गति के लिए कोई माध्यम उपलब्ध नहीं हो पाता।
  • शनि ग्रह का घनत्व इतना कम है कि यदि काँच के किसी विशालाकार बर्तन में पानी भर कर शनि को उसमें डाला जाए तो वह उसमें तैरने लगेगा।
  • वृहस्पति इतना बड़ा है कि शेष सभी ग्रहों को आपस में जोड़ दिया जाए तो भी वह संयुक्त ग्रह वृहस्पति से छोटा ही रहेगा।
  • स्पेस शटल का मुख्य इंजिन का वजन एक ट्रेन के इंजिन के वजन का मात्र 1/7 के बराबर होता है किन्तु वह 39 लोकोमोटिव्ह के बराबर अश्वशक्ति उत्पन्न करता है।
  • शुक्र ही एक ऐसा ग्रह है जो घड़ी की सुई की दिशा में घूमता है।
  • चन्द्रमा का आयतन प्रशान्त महासागर के आयतन के बराबर है।
  • सूर्य पृथ्वी से 330,330 गुना बड़ा है।
  • अन्तरिक्ष में पृथ्वी की गति 660,000 मील प्रति घंटा है।
  • शनि के वलय की परिधि 500,000 मील है जबकि उसकी मोटाई मात्र एक फुट है।
  • वृहस्पति के चन्द्रमा, जिसका नाम गेनीमेड (Ganymede) है, बुध ग्रह से भी बड़ा है।
  • किसी अन्तरिक्ष वाहन को वायुमण्डल से बाहर निकलने के लिए कम से कम 7 मील प्रति सेकण्ड की गति की आवश्यकता होती है।
  • पृथ्वी के सारे महाद्वीप की चौड़ाई दक्षिण दिशा की अपेक्षा उत्तर दिशा में अधिक है, यह अभी तक ज्ञात नहीं है कि ऐसा क्यों है।

Monday, September 12, 2011

आज जनता को जरूरत है जागरूकता की मशाल को जलाए रखने की

अन्ना के अनशन तथा आन्दोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि यह हुई  कि देश की जनता में जागरूकता आई और उसे अपनी ताकत का अहसास हो गया। जब तक किसी को अपनी ताकत का अहसास नहीं रहता, वह स्वयं को कुछ भी कर पाने में असमर्थ समझता है किन्तु अपनी ताकत के अहसास हो जाने पर वह कठिन से कठिन और असम्भव से असम्भव कार्य भी कर डालता है। स्वयं पवनपुत्र हनुमान इस बात के बहुत बड़े उदाहरण हैं। शापवश अपनी ताकत को भूले रहने के कारण वे समुद्र को पार कर लेने के विषय में कल्पना भी नहीं कर सकते थे किन्तु जाम्बवन्त के द्वारा उन्हें अपनी ताकत का स्मरण करा देने के बाद वे न केवल समुद्र पार कर लंका चले गए बल्कि वहाँ जाकर रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध तथा लंका को जला कर भस्म तक कर डाला और माता सीता का सन्देश लेकर सकुशल वापस भी आ गए। आज जनता रूपी हनुमान को भी अन्ना रूपी जाम्बवन्त नें अपनी ताकत का स्मरण करा दिया है। अब जरूरत है जनता को जरूरत है जागरूकता की मशाल को जलाए रखने की! जनता की जागरूकता क्या नहीं कर सकती? पिछले चौंसठ सालों से हो रहे अपने धन के शोषण को समाप्त कर सकती है, दुष्ट, बेईमान, कुचक्री लोगों के द्वारा विदेशों में भेज दिए गए देश के धन को वापस ला सकती है, भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म कर सकती है।

भारत आज भी एक अमीर देश है किन्तु यहाँ की जनता बेचारी बेहद गरीब है। खून-पसीना बहा कर कमाए गए अपने धन का वह स्वयं उपभोग नहीं कर पाती, उसके धन से ऐश करते हैं चन्द बेईमान लोग। यह इस देश की लचर व्यवस्था की वजह से है। इस व्यवस्था में हमें आमूल-चूल परिवर्तन करना होगा।

हम सभी जानते हैं कि हर किसी की एक जवाबदेही होती है, ड्यूटी-लिस्ट होती है और कर्तव्य के पालन न करने पर दण्ड का भी प्रावधान होता है। यह एक सामान्य सा नियम है। किन्तु इस देश में यह नियम सत्ता के सिंहासन पर बैठे लोगों पर लागू नहीं होता, न तो उनकी कोई जवाबदेही है, न ही ड्यूटी-लिस्ट है और न ही उनके द्वारा कर्तव्य पालन न करने पर किसी प्रकार के दण्ड का विधान है। यही कारण है कि एक के बाद एक घोटाले होते हैं और किसी को भी सजा नहीं मिलती। आज जरूरत है सांसदों, विधायकों आदि की ड्यूटी-लिस्ट बना कर नियम का पालन करवाने की।

जनता जिन्हें एक बार चुन कर भेज देती है फिर उन्हें, उनके द्वारा जनता के विश्वास में खरे न उतर पाने पर भी, पाँच साल के पहले वापस बुलाने का अधिकार नहीं है। आखिर क्यों जनता के पास यह अधिकार नहीं है? आज जरूरत है जनता को यह अधिकार दिलवाने की, राइट को रिकॉल की।

चुनाव होते हैं तो प्रत्याशियों की भीड़ खड़ी हो जाती है किन्तु जनता की सेवा करने की वास्तविक भावना उनमें से कितनों में होती है? उनमें से कितने लोग योग्य होते हैं? उनमें से क्या किसी पर विश्वास किया जा सकता है? किन्तु जनता उनमें से ही किसी एक को अपना वोट दे देती है क्योंकि उसे वोट देना है। कुछ लोग सिर्फ इसलिए अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं करते क्योंकि उन्हें कोई भी प्रत्याशी पसन्द नहीं होता किन्तु ऐसा करना क्या जायज है? जनता को अधिकार मिलना चाहिए अयोग्य, अविश्वसनीय और अक्षम प्रत्याशियों को नकारने की, राइट टू रिजेक्ट की।

प्रत्याशियों की उस भीड़ में से चालीस प्रतिशत से भी कम वोट पाने वाला कोई एक चुन कर आ जाता है, ऐसा व्यक्ति चुन कर आ जाता है जिसे सौ में से साठ से भी अधिक लोगों ने नकार दिया है। चालीस प्रतिशत से कम वोट पाना बहुमत हो जाता है। कैसा गणित है यह? आज जरूरत है एक ऐसी व्यवस्था बनाने की जो वास्तविक बहुमत पाने वाले को सत्ता में भेज सके।

कितनी बड़ी विडम्बना है कि हमारे देश में राष्ट्रभाषा ही नहीं है, तुष्टिकरण की नीति के तहत हिन्दी को 'राजभाषा' का दर्जा दिया गया है और परोक्ष रूप से आज अंग्रेजी ने राष्ट्रभाषा का रूप धारण कर लिया है। हिन्दी और देवभाषा संस्कृत को दिन-ब-दिन हम भुलाते जा रहे हैं और विदेशों से ली गई इस देश की शिक्षा नीति हमारे नस-नस में अंग्रेजी को घुसाये चली जा रही है। आज जरूरत है इस देश की संस्कृति और सभ्यता पर आधारित एक ऐसी शिक्षा नीति कि जो हिन्दी और संस्कृत को जन-जन की भाषा बना दे।

हमारे देश में हमें मुगलों, अंग्रेजो आदि विदेशियों के द्वारा लिखे गए पक्षपात पूर्ण इतिहास पढ़ाया जाता है। स्वतन्त्रता के पश्चात् भी शासन के इशारे पर इतिहास को तोड़-मरोड़ कर लिखा गया और हमें पढ़ाया गया। कोटि-कोटि देशभक्तों के त्याग और बलिदान को भुला दिया गया और स्वतन्त्रता प्राप्ति का श्रेय चन्द गिने-चुने लोगों को दे दिया गया। आज जरूरत है शोध कर के इस देश का सच्चे इतिहास को सामने लाने की।

गरीब आदमी अपनी सन्तान को आज उचित शिक्षा नहीं दिलवा पाता, शिक्षा मँहगी कर दी गई है। निजी स्कूल खोलने की अनुमति देकर स्कूल चलाने वालों को आम जनता को लूट लेने की खुली छूट दे दी गई है। आज जरूरत है गरीब से गरीब इन्सान के बच्चों को भी मुफ्त में शिक्षा दिलवाने की।

सभी जानते हैं कि चिकित्सा को भी सेवा के स्थान पर व्यापार बना दिया गया है, गरीबों के लिए इलाज मयस्सर नहीं है और वे बिना इलाज के मर जाते हैं। आज जरूरत है सभी को चिकित्सा सेवा उपलब्ध कराने की।

जरूरतों की सूची बहुत लम्बी है किन्तु सारी जरूरतें पूरी हो सकती है, और इन जरूरतों को पूरी होने के लिए जरूरत है जागरूकता की मशाल को जलाए रखने की।

Sunday, September 11, 2011

विज्ञान सम्बन्धित कुछ रोचक तथ्य

  • सहारा में प्राप्त होने वाले सौर ऊर्जा का मात्र 0.3% पूरे यूरोप की ऊर्जा समस्या को समाप्त कर सकता है।
  • मनुष्य के शरीर का 90% ऑक्सीजन, हाइड्रोजन और नाइट्रोजन का बना होता है।
  • ओक का एक वृक्ष प्रतिवर्ष 2,200 बीज उत्पन्न करता है किन्तु किसी एक बीज के वृक्ष बनने की सम्भावना 10,000 में मात्र 1 ही होती है।
  • मनुष्य के मस्तिष्क का 80% भाग पानी होता है।
  • मनुष्य मस्तिष्क की भण्डारण क्षमता (storage capacity)  4 टेराबाइट (Terrabytes) से भी अधिक होती है।
  • जब आप किसी सीधी चढ़ाई वाले पहाड़ पर चढ़ते हैं तो आपके घुटनों पर आपके शरीर का तीन गुना भार होता है।
  • वैज्ञानिक आज तक निश्चित नहीं कर पाए हैं कि डायनासोर का रंग क्या था।
  • पृथ्वी का वजन लगभग 6,588,000,000,000,000,000 टन है।
  • सूर्य पृथ्वी की अपेक्षा 330,330 गुना बड़ा है।
  • समुद्र सतह से 40,000 फुट की ऊँचाई पर औसत तापमान -60 अंश फैरनहीट होता है।
  • आवर्त सारणी (Periodic Table) में अंग्रेजी के सारे वर्ण प्रयुक्त होते हैं सिवाय "J" के।
  • विश्व के विद्युत उत्पादन का एक तिहाई सिर्फ बल्बों के द्वारा प्रकाश पाने में खर्च होता है।
  • एक घनफुट सोने का वजन 1,200 पौंड से भी अधिक होता है।
  • तापमान चाहे कितना भी कम क्यों न हो जाए, गैसोलीन (gasoline) कभी भी नहीं जमता।
  • जंग लग जाने पर लोहे का वजन बढ़ जाता है।

Saturday, September 10, 2011

स्वर्ग में जाकर गुलामी बनने की अपेक्षा नर्क में जाकर राजा बनना बेहतर है

  • स्वर्ग में जाकर गुलामी बनने की अपेक्षा नर्क में जाकर राजा बनना बेहतर है।
  • भले ही आपका जन्म सामान्य हो, आपकी मृत्यु इतिहास बन सकती है।
  • अन्धेरी रात के बाद चमकीला सुबह अवश्य ही आता है।
  • 'उत्तम होना' एक कार्य नहीं बल्कि स्वभाव होता है।
  • असफलता मुझे स्वीकार्य है किन्तु प्रयास न करना स्वीकार्य नहीं है।
  • 'आँखों से देखा' एक बार अविश्वसनीय हो सकता है किन्तु 'अनुभव से सीखा' कभी भी अविश्वसनीय नहीं हो सकता।
  • कल की असफलता वह बीज है जिसे आज बोने पर आने वाले कल में सफलता का फल मिलता है।
  • भूत इतिहास होता है, भविष्य रहस्य होता है और वर्तमान ईश्वर का वरदान होता है।
  • कोई भी कार्य सही या गलत नहीं होता, हमारी सोच उसे सही या गलत बनाती है।
  • कठिन परिश्रम का कोई भी विकल्प नहीं होता।
  • यदि आपको कोई कार्य कठिन लगता है तो इसका अर्थ है कि आप उस कार्य को गलत तरीके से कर रहे हैं।

Friday, September 9, 2011

कुछ रोचक तथ्य

  • कोई भी व्यक्ति स्वयं की कुहनी को चाट नहीं सकता।
  • छींकते वक्त आँखे खुली रखना असम्भव है।
  • छींकते समय हृदय की गति एक मिली सेकंड के लिए रुक जाती है।
  • संसार में 50% से भी अधिक लोग ऐसे हैं जिन्हें कभी टेलीफोन प्रयोग करने का अवसर ही नहीं मिला है।
  • मात्र एक घण्टा तक हेडफोन पहने रहने से कान में बैक्टीरिया की संख्या 700 गुना बढ़ जाती है।
  • लाइटर का आविष्कार माचिस से पहले हुआ।
  • उँगलियों के निशान जैसे ही सभी के जीभ के निशान भी अलग-अलग होते हैं।
  • बिना खाना खाए एक माह तक जिंदा रहा जा सकता है जबकि बिना पानी पिए केवल एक सप्ताह। शरीर में सिर्फ 1% पानी की कमी होने पर प्यास महसूस होने लगती है और 10% कमी होने पर प्राण निकल जाते हैं।
  • ध्वनि की गति हवा की अपेक्षा स्टील में  15 गुनी अधिक होती है।
  • लिओनार्डो डा विंसी एक ही समय में एक हाथ से लिख सकते थे साथ ही दूसरे हाथ से चित्रकारी भी कर सकते थे।
  • च्युइंगगम चबाते-चबाते प्याज काटने से आँख से आँसू नहीं आते। (यद्यपि प्याज काटने से आँखों में आँसू बनने की प्रक्रिया अवश्य होती है किन्तु जबड़ों के लगातार चलते रहने के कारण वे आँख के बाहर तक नहीं आ पाते।)
  • "Rhythm" अंग्रेजी का वह सबसे बड़ा शब्द है जिसमें अंग्रेजी का कोई भी स्वर (vowel) का प्रयोग नहीं हुआ है।
  • शहद एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो हजारों साल तक खराब नहीं होता। (मिश्र के फैरो के कब्रों में पाए गए शहद को पुरातत्वविदों द्वारा चख कर देखने पर पाया गया है कि वह आज भी खाने योग्य है।)
  • पृथ्वी सौरमण्डल का एकमात्र ग्रह है जिसका नाम किसी देवता के नाम पर नहीं रखा गया है।
  • नींद में होने पर भी डॉल्फिन की एक आँख खुली रहती है।

Thursday, September 8, 2011

हमारी शिक्षा हमें स्वावलम्बी बनना न सिखाकर नौकर बनना सिखाती है

आज किसान का बेटा किसानी नहीं करना चाहता, लोहार के बेटा लोहारी नहीं करना चाहता, सुनार का बेटा सुनारी नहीं करना चाहता ......। ये सब नौकरी करना चाहते हैं, सिर्फ नौकरी।

क्यों है ऐसा?

क्योंकि हमारी शिक्षा हमें स्वावलम्बी बनना न सिखाकर नौकर बनना सिखाती है। हमारे बच्चे ज्ञान प्राप्त करने के लिए नहीं बल्कि नौकरी प्राप्त करने के लिए शिक्षा ग्रहण करते हैं।

नौकरी करना अर्थात् धन कमाने के लिए नौकर बन कर दूसरे का काम करना, दूसरे के नीचे रहकर उसकी आज्ञानुसार काम करना। धन मालिक बन कर भी कमाया जा सकता है। किसानी करने में, लोहारी करने में, सुनारी करने में हम स्वयं अपने मालिक होते हैं किसी दूसरे के नौकर नहीं। मालिक बनने से हमारा स्वाभिमान बरकरार रहता है और नौकर बनने में उसका नाश होता है। यदि हमारी आज की शिक्षा इस बात को विद्यार्थियों यह बात सिखाती तो लोग मालिक बनने की सोचते नौकर बनने की नहीं।

Wednesday, September 7, 2011

कहीं आप भी तो उकताए हुए नहीं हैं जबरन के विज्ञापनों से?

सड़क में जाओ तो विज्ञापन दीवालों पर विज्ञापन नजर आता है, अखबार पढ़ो तो विज्ञापन उसमें समाचार के साथ विज्ञापन दिखाई देता है, रेडियो सुनो तो संगीत आदि के साथ विज्ञापन भी सुनाई देता है, टीवी. देखो तो कार्शियल ब्रेक अर्थात् विज्ञापन दिखाई पड़ेगा ही। मोबाइल कॉल और एसएमएस द्वारा विज्ञापन। यहाँ तक कि मूत्रालय और शौचालय तक में भी विज्ञापन। (मेरे इस ब्लोग में भी विज्ञापन)-:) आज हम चारों तरफ से विज्ञापनों से घिरे हुए हैं। विज्ञापन ही विज्ञापन! अपनी कहूँ तो, मैं तो उकता जाता हूँ इन जबरन के विज्ञापनों से। दीवारों, अखबारों, रेडियो और टीवी में विज्ञापनों को तो, खैर, ठीक माना जा सकता है किन्तु किसी के मोबाइल में विज्ञापने वाले जबरन कॉल और एसएमएस तथा ईमेल में जबरन विज्ञापन आना कहाँ तक जायज है?

आखिर क्या है ये विज्ञापन?

विज्ञापन एक प्रक्रिया है जिसके द्वारा कोई निर्माता अपने उत्पादों, सामान बेचने वाले बेचे जाने वाली वस्तुओं, पेशावर लोग अपने पेशों तथा सेवाओं आदि के विषय में विभिन्न माध्यमों द्वारा उपभोक्ताओं को जानकारी देते हैं। विज्ञापन को संचार (communication) का एक प्रकार कहा जा सकता है।

जिस समय से मनुष्य ने कीमत लेकर वस्तुएँ बेचने या सेवाएँ प्रदान करने का कार्य आरम्भ किया उसी समय से विज्ञापन की शुरुवात भी हो गई, भले ही उस समय विज्ञापन का माध्यम "मुँह से बोलकर बताना" (word of mouth) ही रहा हो। mouth publicity को आज भी विज्ञापन का सबसे सशक्त माध्यम  माना जाता है। "मुँह से बोलने" के बाद प्राकृतिक चट्टानें, जिन पर पेंटिंग करके विज्ञापन किया जाने लगा था, विज्ञापन के माध्यम बने।  भोजपत्र, श्रीपत्र आदि (papyrus) को भी विज्ञापन का माध्यम बनाया गया, इन पत्रों का पोस्टर बनाकर दीवालों में चिपकाया जाने लगा। मनुष्य के द्वारा कागज बनाने की कला जान लेने के बाद इन पत्रों का स्थान कागज ने ले लिया। माना जाता है कि अखबारों के हाशिए में विज्ञापनों की शुरुवात सत्रहवीं शताब्दी में हुई। बाद में ज्यों-ज्यों विज्ञान और तकनीकी का विकास होते गया, संचार के साधन भी बढ़ते गए और साथ ही विज्ञापन के माध्यमों में भी वृद्धि होती चली गई।

विज्ञापनों से उपभोक्ताओं को यह फायदा अवश्य ही होता है कि पुराने उत्पादों की गुणवत्ता तथा विशेषताएँ बढ़ने एवं नए उत्पादों के विषय में आपको जानकारी मिल जाती है। किन्तु विज्ञापनों का उपभोक्ताओं के मस्तिष्क पर कई प्रकार के गलत प्रभाव भी पड़ते हैं जैसे कि वे विज्ञापन के प्रभाव में आकर अनेक बार अनावश्यक वस्तुओं की खरीदी करके अपनी गाढ़ी कमाई गवाँ देते हैं, आकर्षक विज्ञापन से प्रभावित होकर घटिया वस्तुएँ खरीद लेते हैं, उत्तेजना में आकर खरीदी करते हैं आदि। विज्ञापनों का सबसे अधिक (कु)प्रभाव तो बच्चों के मस्तिष्क पर पड़ता है, आपने महसूस किया होगा कि बच्चे टीवी के कार्यक्रमों की अपेक्षा विज्ञापनों में अधिक रुचि दिखाते हैं।

विज्ञापनों का प्रयोग केवल उत्पाद बेचने के लिए ही नहीं, बल्कि और भी अनेक कार्यों में होता है, उदाहरण के तौर पर वैवाहिक विज्ञापन, नौकरी के विज्ञापन आदि। प्रथम विश्वयुद्ध के समय तो सेना में भर्ती के लिए जगह-जगह विज्ञापन के पोस्टर लगाए गए थे।

(प्रथम विश्वयुद्ध के समय के विज्ञापन)

Monday, September 5, 2011

शिक्षक और गुरु

मोटे तौर पर तो यही लगता है कि शिक्षक और गुरु पर्यायवाची शब्द हैं किन्तु यदि गहराई में जाया जाए तो यह सही नहीं लगता। शिक्षक का काम है विद्यार्थी को शिक्षा देना, ऐसी शिक्षा जो उन्हें डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट दिलवा सके जिसकी बदौलत शिक्षा पाने वाला अपनी आजीविका चला सके जबकि गुरु अपने शिष्य को ज्ञान देता है, ऐसा ज्ञान जो उसे स्वावलम्बी तो बनाता ही है, साथ ही शिष्य के भीतर नैतिकता, न्यायप्रियता, मानवता, राष्ट्रप्रेम, स्वाभिमान जैसी भावनाओं को भी कूट-कूट कर भरता है। शिक्षक विद्यार्थियों को सिर्फ किताबों में लिखी बातों को ही सिखाता है जबकि गुरु अपने शिष्य को सत्य से परिचित करवाता है, उस सत्य से जो पुस्तकों में कहीं भी नहीं मिलता। सत्य को पुस्तकें पढ़ कर नहीं जाना जा सकता, उसे सिर्फ ज्ञान और अनुभव से ही जाना जा सकता है। सत्य को न जानने वाला सदैव अपने इन्द्रियों के वश में रहता है किन्तु सत्य को जान लेने वाले में अपने इन्द्रियों को नियन्त्रित करने की क्षमता आ जाती है और वह इन्द्रियों के वश में न रह कर इन्द्रियों को अपने वश में कर लेता है।

शिक्षक शिक्षा देने के लिए नियत वेतन लेता है, नियत फीस लेता है, नियत पारश्रमिक लेता है अर्थात शिक्षा का मोल लेता है किन्तु गुरु ज्ञान देने के लिए बदले में कुछ भी नहीं माँगता क्योंकि वह जानता है कि ज्ञान का कोई मोल नहीं होता। विद्या अमोल होती है, ज्ञान का मोल चुकाने का सामर्थ्य संसार में किसी के भी पास नहीं है, तो भला गुरु विद्या की कीमत कैसे लगा सकता है? हाँ, शिष्य की श्रद्धानुसार दी गई दक्षिणा को वह अवश्य स्वीकार करता है। यह दक्षिणा न तो वेतन है, न फीस है और न ही पारश्रमिक है़, यह तो शिष्य का गुरु के प्रति मात्र आभार प्रदर्शन है, गुरु के प्रति शिष्य की श्रद्धा और समर्पण है। दक्षिणा की राशि नियत नहीं होती, दक्षिणा शिष्य की श्रद्धानुसार स्वेच्छा से दी जाती है। वसिष्ठ को दक्षिणा के रूप में राम जितनी राशि दे सकते हैं उतनी राशि गुह, जो कि भील होने के नाते राम के कहीं बहुत अधिक निर्धन है, दे ही नहीं सकता, सन्दीपनि जानते हैं कि दक्षिणा में कृष्ण जितनी राशि सुदामा दे ही नहीं सकता। फिर भी गुरुओं की दृष्टि में उनके सभी शिष्य एक समान होते हैं और वे उन्हें एक जैसा ही ज्ञान देते हैं।

अंग्रेजों के आने के बाद भी कुछ समय तक गुरु-दक्षिणा की यह परम्परा जारी रही। हजारों ब्राह्मण अध्यापक अपने घरों में ही अपने शिष्यों को ज्ञान प्रदान करते थे।  दक्षिणा के रूप में जहाँ उन्हें राजा-महाराजाओं, जमींदारों आदि धनाढ्य लोगों से जमीन, जायजाद, सोना, चाँदी और बहुत अधिक मात्रा में नगदी मिल जाती थी वहीं वे निर्धन शिष्यों को निःशुल्क ही ज्ञान बाँटा करते थे। दक्षिणा में मिली सम्पत्ति का भी वे उतना ही उपयोग करते थे जितने की उन्हें आवश्यकता होती थी और शेष सम्पत्ति को वे उन्हीं राजा-महाराजाओं तथा जमींदारों की अमानत समझते थे और जरूरत पड़ने पर वे उस राशि को राज्य और समाज के हित में भी व्यय कर दिया करते थे।

शिष्य का गुरु के प्रति सम्मान की भावना जीवन-पर्यन्त बनी रहती थी और गुरु-पूर्णिमा के दिन इस भावना का विशेष प्रदर्शन होता था। आज विद्यार्थी का शिक्षक के प्रति सम्मान की कितनी भावना है यह बताने की आवश्यकता नहीं है, यह तो आप सभी जानते हैं। हाँ, यह बात अवश्य है कि शिक्षक दिवस मना कर भले शिक्षक स्वयं को गर्वान्वित महसूस कर ले।

वसिष्ठ और विश्वामित्र जैसे गुरुओं के दिए ज्ञान ने राम जैसा शासक का निर्माण किया जिनके लिए प्रजा ही सर्वोपरि थी, यहाँ तक कि उन्होंने प्रजा की भावनाओं का सम्मान करके अपनी धर्मपत्नी तक का भी त्याग कर दिया। और आज शिक्षकों की दी गई शिक्षा नें हमें किस प्रकार के शासक दिए हैं यह तो आप देख ही रहे हैं।

 
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