Tuesday, January 24, 2012

नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की "आजाद हिन्द तत्कालिक (provisional) सरकार"

21 अक्टूबर 1943 को नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ने "आजाद हिन्द तत्कालिक (provisional) सरकार" के निर्माण की घोषणा की जिसमें वे स्वयं देश के मुखिया, प्रधान मन्त्री तथा युद्ध मन्त्री थे तथा आजाद हिन्द फौज के अन्य अधिकारी केबिनेट मेम्बर थे। "आजाद हिन्द तत्कालिक (provisional) सरकार" के केबिनेट मेम्बर्स का विवरण इस प्रकार है -

लेफ्टिनेंट ए.सी. चटर्जी - वित्त मन्त्री (Minister of Finance)
डॉ.(कैप्टन) लक्ष्मी सहगल - Minister of Women’s Organisation
श्री ए.एम सहाय - Secretary with Ministerial Rank
श्री एस.एं अय्यर - Minister of Publicity and Propaganda
ले. कर्नल जे.के. भोंसले - Representative of INA
ले. कर्नल लोगानाथन - Representative of INA
ले. कर्नल एहसान कादिर - Representative of INA
ले. कर्नल एन.एस. भगत - Representative of INA
ले. कर्नल एम.जेड. कियानी - Representative of INA
ले. कर्नल अज़ीज़ अहमद -Representative of INA
ले. कर्नल शाह नवाज़ खान - Representative of INA
ले. कर्नल गुलजारा सिंह - Representative of INA
रास बिहारी बोस - Supreme Advisor
करीम गियानी - Advisor from Burma
देबनाथ दास - Advisor from Thailand
सरदार ईशर सिंह - Advisor from Thailand
डी.एम. खान - Advisor from Hong Kong
ए. येल्लप्पा - Advisor from Singapore
ए.एन सरकार - Advisor from Singapore
 (सन्दर्भः http://www.s1942.org.sg/s1942/indian_national_army/provi.htm)

"आजाद हिन्द तत्कालिक (provisional) सरकार" ने न केवल नेताजी को जापानियों के साथ बराबरी के साथ समझौता करने में सक्षम बनाया बल्कि पूर्व एशिया में रहने वाले भारतीयों को एक सूत्र में बाँधकर आजाद हिन्द फौज में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित किया। सुभाष चन्द्र बोस जी के इस तत्कालिक सरकार को अनेक देशों ने मान्यता भी प्रदान की।

"आजाद हिन्द तत्कालिक (provisional) सरकार" के निर्माण के साथ ही नेताजी ने भारतीयों को एकसूत्र में बँध कर आजाद हिन्द फौज के तत्वावधान में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध का शंखनाद भी कर दिया। मलाया, थाइलैंड तथा बर्मा में बसे भारतीयों ने नेताजी के युद्ध के प्रस्ताव का उत्साहपूर्वक स्वागत किया और बड़ी संख्या में भारतीय आजाद हिन्द फौज में भर्ती होने लगे। अनेक भारतीयों ने आजाद हिन्द फौज को सोना, चाँदी, गहने, कपड़े आदि की सहायता प्रदान की, महिलाओं ने अपने जेवरात तक उतार कर आजाद हिन्द फौज को समर्पित कर दिए।

भारतीयों से प्राप्त उसी धन से अप्रैल 1944 तक रंगून में आजाद हिन्द बैंक की स्थापना भी हो गई।


6 टिप्पणियाँ:

Vijay Kumar Sappatti said...

आपकी इस पोस्ट ने मुझे काफी ज्ञान दिया . इतनी पुरानी जानकारी के लिये आपका धन्यवाद.

कभी समय मिले तो फोन भी कर ले , आपसे हुई मुलाकात अब भी ताज़ा है सर.

आपका
विजय

प्रवीण पाण्डेय said...

यह नई जानकारी है मेरे लिये, रोचक..

भारतीय नागरिक - Indian Citizen said...

कई देशों ने तो मान्यता भी दे दी थी नेताजी की सरकार को.

AlbelaKhatri.com said...

jai ho aapki avdhiya ji......

gazab ki jankaari di

man baag baag hogaya

jai hind !

शिवम् मिश्रा said...

ब्लॉग बुलेटिन टीम की ओर से आप सब को गणतन्त्र दिवस की बहुत बहुत हार्दिक बधाइयाँ और शुभकामनाएं !

इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - गणतंत्र दिवस विशेष - जय हिंद ... जय हिंद की सेना - ब्लॉग बुलेटिन

Atul Shrivastava said...

बढिया जानकारी भरा पोस्‍ट।

गणतंत्र दिवस की शुभकामनाएं....

जय हिंद... वंदे मातरम्।

 
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