सरकार ने आरक्षण का प्रावधान इसलिए किया है कि अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग के जो लोग लोग सामान्य वर्ग से पीछे रह गए हैं, बराबरी पर आ जाएँ। अब मान लीजिए कि किसी व्यक्ति को आरक्षण का फायदा मिला जिसके परिणामस्वरूप उसे अच्छी नौकरी भी मिली और पदोन्नतियाँ भी। नौकरी और पदोन्नति पा जाने के बाद तो वह अब सामान्य लोगों की बराबरी में आ गया याने कि उस व्यक्ति के सन्तान भी सामान्य वर्ग की बराबरी पर आ गए, और इस कारण से उस व्यक्ति के परिवार के सदस्यों को अब फिर से आरक्षण की सुविधा नहीं मिलनी चाहिए!। पर होता यही आया है कि उस व्यक्ति की अगली पीढ़ियों को आरक्षण की सुविधा मिलते ही रहती है। क्या यह गलत नहीं है? एक सामान्य वर्ग के बराबरी वाले अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़े वर्ग के व्यक्ति की सन्तान को भी, सामान्य वर्ग वाले व्यक्ति की सन्तान के जैसे ही, आरक्षण की सुविधा नहीं मिलनी चाहिए। यदि उसे आरक्षण की सुविधा मिलती है तो इसका साफ मतलब यह हुआ कि आरक्षण की पात्रता रखने वाले किसी अन्य अन्य व्यक्ति का हक मारा गया।
इस बारे में क्या विचार है आपका?
जिन्दगी से हारा आदमी कभी सफल नहीं बन सकता
11 hours ago
4:31 PM
जी.के. अवधिया








4 टिप्पणियाँ:
नहीं जी!
मिलता है.
बहुत उलझा सवाल है.
इस बारे में वंचित है उत्तर दे पायेंगे..
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