Saturday, February 25, 2012

अनुभव की बात

देश के प्रसिद्ध उद्योगपति एवं देशभक्त स्व. घनश्यामदास जी बिला ने अत्यन्त मार्मिक पत्र अपने पुत्र बसंत कुमार बिड़ला को लिखा था।

                                                                                                                 दीपावली संवत 1991
चिं. बसंत.....

यह जो लिखता हूँ उसे बड़े होकर और बूढ़े होकर भी पढ़ना, अपने अनुभव की बात कहता हूँ। संसार में मनुष्य जन्म दुर्लभ है और मनुष्य जन्म पाकर जिसने शरीर का दुरुपयोग किया, वह पशु है। तुम्हारे पास धन है, तन्दुरुस्ती है, अच्छे साधन हैं, उनको सेवा के लिए उपयोग किया, तब तो साधन सफल है अन्यथा वे शैतान के औजार हैं। तुम इन बातों को ध्यान में रखना।

धन का मौज-शौक में कभी उपयोग न करना, धन सदा रहेगा भी नहीं, इसलिए जितने दिन पास में है उसका उपयोग सेवा के लिए करो, अपने ऊपर कम से कम खर्च करो, बाकी दुखियों का दुख दूर करने में व्यय करो। धन शक्ति है, इस शक्ति के नशे में किसी के साथ अन्याय हो जाना संभव है, इसका ध्यान रखो। अपनी संतान के लिए भी यही उपदेश छोड़कर जाओ। यदि बच्चे ऐश-आराम वाले होंगे तो पाप करेंगे और हमारे व्यापार को चौपट करेंगे। ऐसे नालायकों को धन कभी न देना, उनके हाथ में जाये उससे पहले ही गरीबों में बाँट देना। तुम उसे अपने स्वार्थ के लिए ईपयोग नहीं कर सकते। भगवान को कभी न भूलना, वह अच्छी बुद्धि देता है, इन्द्रियों पर काबू रखना, वरना यह तुम्हें डुबो देगी। नित्य नियम से व्यायाम करना। भोजन को दवा समझकर खाना। स्वाद के वश होकर खाते मत रहना।

                                                                                                            घनश्यामदास बिड़ला

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