कुछ दिन पहले टाटा डोकोमो ने मेरे मो.न. 8109661148 में बिना मेरी सहमति के काल मी ट्यून सेवा शुरू कर दी और पचास रुपये काट लिये। कस्टमर केयर नं. लगाने पर उनके ग्राहक सेवा अधिकारी से बात करने का विकल्प बहुत मुश्किल से मिला क्योंकि वह नं. छुपा हुआ है। शिकायत (कम्प्लेंट नं. PSGO92356739) करने पर सेवा बंद कर दी गई किन्तु कटे हुए रुपये वापस मिलने का सिर्फ आश्वासन दिया गया। उसके बाद हर शिकायत में रुपये वापस मिल जाने का आश्वासन मिलता रहा पर रुपये नहीं मिले। बार-बार शिकायत करने पर ऐसा इन्तजाम कर दिया गया कि मेरा कस्टमर केयर से सम्पर्क ही ना हो सके। अब इसे व्यापार कहें या लूट?
मोबाइल सेवा प्रदाय करने वाली कम्पनियों के करोड़ों ग्राहक हैं। अब यदि टाटा डोकोमो ने मेरे जैसे ही अन्य एक लाख लोगों से इसी प्रकार से पचास-पचास रुपये ले लिये हों तो पचास लाख रुपये तो आ ही गए कम्पनी के पास!
9:34 AM
जी.के. अवधिया








7 टिप्पणियाँ:
एक चिट्ठी सीधे रतन टाटा को..
कमाने का यही तरीका बना रखा है।
जी.के. अवधिया जी यह बीमारी सिर्फ एक कंपनी की नहीं है, यह सभी मोबाइल सेवा कम्पनीयों में पाई जाती है.
पहले तो वह आपकी मर्ज़ी के बिना कोई सेवा लगा देते है और आपके मोबाइल से पैसे काट लेते है.
और जब आप कस्टमर केयर में बात करते है तो गलती आपकी बताते हुए कहते है"आपने कोई उल्टा-सीधा बटन दबाया होगा, हम यह सेवा 24 घंटे में बंद कर देते है." लेकिन जब आप उनसे अपने कटे हुए रूपये मांगते है तो वह सीधा सा जवाब देते है की जो पैसे कट गए है, वह वापिस नहीं मिलेंगे.
आम उपयोगकर्ता क्या करे? कोई हल नहीं है.
जी.के अवधिया जी यह बीमारी सिर्फ एक मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी की नही है, बल्कि यह सभी कंपनियों में पाई जाती है.
पहले तो वह आपकी मर्ज़ी के बिना कोई सेवा लगा देते है और आपसे पैसे काट लेते है.
जब आप कस्टमर केयर में फोन करते है तो उल्टा आपकी गलती बताते हुए जवाब देते है की आपकी गलती है आपने कोई उल्टा-सीधा बटन दबाया होगा.
जब आप उनसे अपने कटे हुए पैसे मांगते है, तो वह सीधा सा जवाब दे देते है की कटे हुए पैसे वापिस नहीं होंगे.
आम उपयोगकर्ता क्या करे? कोई हल नहीं है.
ललित जी, हम भारतीय तो मरे ही कष्ट से मरने (कस्टमर) के लिए हैं, फिर काहे गिला (गीला) करते हो, सूखा ही बने रहने दो।
जम्मो कोती इही हाल हवे गुरूजी...
भईगे चुप्पे चाप लुटाये जाओ....
ये साधारण सी बात है, लगता है देश का एक बड़ा तबका इस में शामिल है पैसा मिल बाँट के खाया जा रहा है, एक बार एयरटेल मेरे साथ भी ऐसा किया था, कंप्लेंन का कोई असर ही नहीं हुआ, मेरे साथ भी ऐसा हुआ है।
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