हर साल वार्षिक बजट के बारे में जानने का कुतूहल भला किसे नहीं होता? आखिर क्या चीज सस्ती होगी और क्या मँहगी, कौन सा नया टैक्स लगेगा, आयकर में छूट की सीमा बढ़ाई गई या नहीं आदि महत्वपूर्ण बातों की जानकारी बजट से ही तो मिलती है। मुझे आज भी याद है कि मेरे स्कूल के जमाने में, जब टी.व्ही. की सुविधा नही थी और रेडियो भी बहुत कम लोगों के पास पाये जाते थे, बजट प्रस्तुत होने के समय रेडयो में उसे सुनने के लिए रेडियो सेट को चारों ओर लोगों का हुजूम लग जाया करता था।
सामान्यतः किसी वित्तीय वर्ष के दौरान तय संसाधन के खर्च के लिए एक व्यवस्थित योजना को बजट कहा जाता है। बजट को सरकार के वित्त की एक विस्तृत योजना कहा जा सकता है और भारत में इसे सर्वाधिक महत्वपूर्ण आर्थिक एवं वित्तीय घटना माना जाता है।
आइये भारतीय बजट के बारे में कुछ और तथ्यों को जानें -
- भारत में बजट की परम्परा का आरम्भ भारत के प्रथम वायसराय लॉर्ड कैनिंग ने की थी।
- यद्यपि बजट की शुरुआत लॉर्ड कैनिंग ने की, भारत का पहला बजट 18 फरवरी 1860 को जेम्स विल्सन के द्वारा वायसराय परिषद में प्रस्तुत किया गया था। इसी कारण से जेम्स विल्सन को भारतीय बजट का संस्थापक भी कहा जाता है।
- ब्रिटिश शासनकाल में भारत का बजट शाम को पाँच बजे प्रस्तुत किया जाता था क्योंकि भारतीय बजट को सुनने का कौतूहल इंग्लैंड में भी होता था और भारत में शाम के पाँच बजे इंग्लैंड में दोपहर का समय होता था।
- स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात भी सन् 1998-1999 तक बजट शाम को पाँच बजे ही प्रस्तुत किया जाता रहा (जिसे कि मानसिक गुलामी माना जा सकता है अन्यथा आजाद हो जाने के बाद शाम को पाँच बजे बजट प्रस्तुत करने का कोई तुक नहीं था)।
- सन् 1999-2000 में यशवंत सिन्हा ने पहली बार शाम के बजाय सुबह के समय बजट प्रस्तुत किया।
- हमारे देश में बजट संविधान के अनुच्छेद 112 के अन्तर्गत प्रस्तुत किया जाता है।
- स्वतन्त्र भारत का पहला अन्तरिम बजट 26 नवंबर 1947 को आर.के षण्मुखम शेट्टी ने प्रस्तुत किया गया था।
- भारतीय गणतन्त्र का प्रथम बजट 28 फरवरी 1950 को जॉन मथाई के द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
- सी.डी. देशमुख एकमात्र रिजर्व बैंक के गव्हर्नर हैं जिन्होंने सन् 1951-52 में अन्तरिम बजट प्रस्तुत किया था।
- आज बजट केवल एक पार्ट में पेश किया जाता है किन्तु पहले बजट के दो पार्ट्स हुआ करते थे जिसमें दूसरा पार्ट जनता से सम्बन्धित होता था।
- मोराजी देसाई 8 वर्ष के सर्वाधिक लम्बे समय के लिए वित्त मन्त्री रहे और उन्होंने संसद में सर्वाधिक 10 बार बजट प्रस्तुत किया है।
- वर्ष 1964 और 1968 में मोरारजी देसाई ने आम बजट अपने जन्म दिन के अवसर पर प्रस्तुत किया था।
- सन् 1991-92 में अन्तरिम तथा फाइनल बजट को अलग अलग दलों के वित्त मन्त्रियों के द्वारा प्रस्तुत किए गए थे। अन्तरिम बजट यशवन्त सिन्हा ने प्रस्तुत किया था और फाइनल बजट मनमोहन सिंह ने।
- संसद में बजट प्रस्तुत करने वाली एकमात्र महिला इन्दिरा गांधी हैं, जिन्होंने 1970 में आपातकाल के दौरान संसद में बजट पेश किया था।
- यद्यपि बजट एक सार्वजनिक करने वाली चीज है किन्तु सार्वजनिक करने के पहले इसे भारत में बेहद गुप्त रखा जाता है।
- पहले बजट पेपर्स राष्ट्रपति भवन में ही छपा करते थे। सन् 1950 में बजट पेपर लीक हो गए जिसके कारण बाद में बजट पेपर्स को मिंटो रोड स्थित सीक्युरिटी प्रेस में छापा जाने लगा।
- वर्ष 1980 से बजट पेपर्स की छपाई नार्थ ब्लॉक में होने लगी।
- बजट प्रस्तुत होने के एक सप्ताह पहले से बजट प्रस्तुत होने तक प्रेस के कर्मचारियों को मन्त्रालय में ही रहना पड़ता है जिस दौरान में उन्हें किसी से भी किसी प्रकार का सम्पर्क करने का कोई अधिकार नहीं होता।
- लियाकत अली खान 1946-1947 (अन्तरिम सरकार)
- जॉन मथाई 1948-1949
- आर.के. षण्मुखम शेट्टी 1949-1951
- चिन्तमनराव देशमुख 1951-1957
- टी.टी. कृष्णामाचारी 1957-1958
- जवाहर लाल नेहरू 1958-1959
- मोरार जी देसाई 1959-1964
- टी.टी. कृष्णामाचारी 1964-1967
- मोरार जी देसाई 1967-1970
- इन्दिरा गांधी 1970-1971
- यशवन्तराव चौहान 1971-1975
- सी. सुब्रमणियम 1975-1977
- मोरार जी देसाई 1977-1979
- चौधरी चरण सिंह 1979-1980
- रामास्वामी वेंकटरामन 1980-1982
- प्रनब मुखर्जी 1982-1985
- व्ही.पी. सिंह 1985-1987
- एस.बी. चव्हान 1987-1990
- मधु दण्डवते 1990-1991
- मनमोहन सिंह 1991-1996
- पी. चिदम्बरम 1996-1998
- यशवन्त सिन्हा 1998-2002
- जसवन्त सिंह 2002-2004
- पी. चिदम्बरम मई 2004 - नवम्बर 2008
- मनमोहन सिंह दिसम्बर 2008 - जनवरी 2009
- प्रनब मुखर्जी फरवरी 2009 - अब तक
10:06 AM
जी.के. अवधिया








5 टिप्पणियाँ:
बजटीय जानकारी...
Aapne likha hai ki Gantantra Bharat ka pahla budjet 28-02-1950 ko John Mathai ne pesh kiya,
भारतीय गणतन्त्र का प्रथम बजट 28 फरवरी 1950 को जॉन मथाई के द्वारा प्रस्तुत किया गया था।
phir vitt manrti ki suchi me 1949-1951 R K S Shetty ka naam likha hai,
आर.के. षण्मुखम शेट्टी 1949-1951
ye samajh nahi aaya. please explain kariye .
@ rishi
वित्त मन्त्रियों की सूची में जो वर्ष दिये गए हैं वे कैलेण्डर वर्ष हैं, पोस्ट प्रकाशित करने की जल्दी में उन्हें वित्तीय वर्ष में बदला नहीं जा सका। यदि वर्ष 1948-1949 को, जिसमें कि जॉन मथाई वित्त मन्त्री रहे, वित्तीय वर्ष में बदला जाए तो वह होगा अप्रेल 1949 से मार्च 1950। यही कारण है कि जॉन मथाई ने 28-02-1950 को बजट प्रस्तुत किया।
बहुत मेहनत की है अवधिया जी ।
बढ़िया जानकारीपूर्ण पोस्ट ।
बड़े रोचक तथ्य।
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