Sunday, April 1, 2012

कल चमन था आज इक सहरा हुआ

प्रख्यात कलाकार श्री जतिन दास द्वारा निर्मित प्रतिमा इस्पात नगरी भिलाई का मुर्गा चौक में एक पुष्प के समान शोभायमान थी और उसके कारण मुर्गा चौक चमन था किन्तु आज वह चौक कलापुष्प विहीन सहरा में तब्दील हो गया है।


ऐसा होता है हमारे कलाकारों की कलाकृति का हश्र!

5 टिप्पणियाँ:

Rahul Singh said...

ये क्‍या हुआ, कैसे हुआ, कब हुआ, क्‍यूं हुआ.

ब्लॉ.ललित शर्मा said...

किसी के भीतर औरंगजेब की आत्मा घुस गयी लगता है। कब क्यों और कैसे हुआ इसका जवाब तो देना पड़ेगा।

MD. SHAMIM said...

bade hi dukh ki baat hai.

Ramakant Singh said...

very very disgraceful incedent.

प्रवीण पाण्डेय said...

काश हमें अपनी धरोहरों की रक्षा करनी आती..

 
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