प्रख्यात कलाकार श्री जतिन दास द्वारा निर्मित प्रतिमा इस्पात नगरी भिलाई का मुर्गा चौक में एक पुष्प के समान शोभायमान थी और उसके कारण मुर्गा चौक चमन था किन्तु आज वह चौक कलापुष्प विहीन सहरा में तब्दील हो गया है।
ऐसा होता है हमारे कलाकारों की कलाकृति का हश्र!
4:36 PM
जी.के. अवधिया









5 टिप्पणियाँ:
ये क्या हुआ, कैसे हुआ, कब हुआ, क्यूं हुआ.
किसी के भीतर औरंगजेब की आत्मा घुस गयी लगता है। कब क्यों और कैसे हुआ इसका जवाब तो देना पड़ेगा।
bade hi dukh ki baat hai.
very very disgraceful incedent.
काश हमें अपनी धरोहरों की रक्षा करनी आती..
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