Tuesday, April 3, 2012

क्या यही हैं वो विधान? जिससे बना मेरा भारत महान!

सरकारी नौकर बनने के लिए कुछ न कुछ न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता होती है। किन्तु शैक्षणिक योग्यताओं वाले सरकारी नौकरों को अपने नियन्त्रण में रखकर सरकार चलाने वाले मन्त्री, सांसद, विधायक आदि बनने के लिए किसी भी प्रकार की न्यूतम शैक्षणिक योग्यता की आवश्यकता नहीं होती।

यदि कोई सरकारी कर्मचारी किसी अपराधिक प्रकरण में फँस जाये तो उसे अदालत से निर्दोष सिद्ध होते तक निल्बित कर दिया जाता है किन्तु अपराधिक पृष्ठभूमि के लोग बाहुबल और धन बल के आधार पर सदन के सदस्य बनकर मन्त्रीपद भी आरूढ़ हो सकते हैं क्योंकि न्यायालय द्वारा उन्हें दण्डित न किये जाने तक उन्हें दूध का धुला माना जाता है।

ऐसा माना जाता है सरकारी नौकर को 58-60 साल की उम्र के बाद सेवा के योग्य नहीं रहता, यही कारण है कि उसे सेवानिवृत कर दिया जाता है किन्तु जन प्रतिनिधि हमेशा योग्य होता है, चाहे उसकी उम्र कितनी भी अधिक क्यों न हो.

सरकारी नौकरी में पेंशन पाने के लिए कम से कम बीस साल तक नौकरी करना अनिवार्य है किन्तु जनप्रतिनिधि को पेंशन पाने के लिए सिर्फ एक बार चुनाव जीत लेना ही पर्याप्त है।

5 टिप्पणियाँ:

MD. SHAMIM said...

sir ji, 100 me 90 beimaan,
fir bhi mera desh mahaan.

Ramakant Singh said...

bas yahi trasadi hai.

प्रवीण पाण्डेय said...

सबके लिये अपने अपने नियम।

Shivam bairwa said...

राम राम श्रीमान जी!
हाँ बड़े दुख की बात है, पर किया क्या जाये?
देश मे और भी बहुत सीँ खामियाँ है लेकिन कौन ध्यान देता है, सब अंधी दोड़ दोड़ने मेँ लगे हैँ, किसी को फुरसत नहीँ। अगर कोई इनके विरोध मे आवाज उठाये भी तो कुचल दिया जाता है बैचारा। अभी कुछ दिनोँ पहले ऐसा हो भी चुका है।

शिवम् मिश्रा said...

सार्थक प्रश्न उठाया है आपने ... इन लोगो तो हद कर रखी है ... हर जगह सिर्फ सिर्फ और सिर्फ बेईमानी !


इस पोस्ट के लिए आपका बहुत बहुत आभार - आपकी पोस्ट को शामिल किया गया है 'ब्लॉग बुलेटिन' पर - पधारें - और डालें एक नज़र - कब तक अस्तिनो में सांप पालते रहेंगे ?? - ब्लॉग बुलेटिन

 
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