दया धरम हिरदे बसै, बोलै अमरित बैन।
तेई ऊँचे जानिये, जिनके नीचे नैन॥
आदर मान, महत्व, सत, बालापन को नेहु।
यह चारों तबहीं गए जबहिं कहा कछु देहु॥
मान सहित विष खाय के संभु भए जगदीस ।
बिना मान अमृत पिए राहु कटायो सीस॥
अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम।
दास 'मलूका कह गए, सबके दाता राम॥
Online English Test 1
20 hours ago
10:29 AM
जी.के. अवधिया








2 टिप्पणियाँ:
सबके दाता राम..
दास मलूका की अंतिम बात बड़े पते की है.
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