देश और प्रदेशों की जनता अपना मत दे कर जनप्रतिनिधियों का चुनाव करती हैं ताकि उन्हें ऐसी सरकार मिले जो देश और प्रदेशों में अमन-चैन बनाये रखे, भ्रष्टाचार को खत्म करे, मँहगाई को बढ़ने न दे, उग्रवाद और आतंकवाद का सफाया करे। पर जब से देश को स्वतन्त्रता मिली है, देश और राज्यों में ऐसी एक भी सरकार नजर नहीं आई है जिसने जनता की उपरोक्त अपेक्षाओं को पूरा किया हो, उल्टे भ्रष्टाचार, मँहगाई, उग्रवाद और आतंकवाद आदि में दिन दूनी और रात चौगुनी गति से वृद्धि ही होती चली गई है।
भ्रष्टाचार में तो सरकारों में बैठे हुए जनप्रतिनिधी स्वयं ही लिप्त नजर आते रहे हैं, ऐसे में मँहगाई न बढ़े तो और क्या हो? उग्रवाद और आतंकवाद के समक्ष सरकारें बौनी नजर आती हैं। यदि आतंकवादी पकड़े भी जाते हैं तो उन्हें सजा नहीं मिलती, उल्टे उन्हें हर प्रकार की सुख-सुविधाओं से नवाजा जाता है। अफजल, कसाब आदि इस बात के प्रत्यक्षद उदाहरण हैं।
आतंकवादियों के पास एक ऐसा हथियार है जिसका तोड़ हमारी सरकारों के पास है ही नहीं, यह हथियार है 'अपहरण'। बस किसी का अपहरण कर लो और जितने चाहे उतने कैदी आतंकवादियों को उसके बदले में छुड़वा लो। केन्द्र सरकार ने ही अनेक बार आतंकवादियों के इस हथियार के सामने घुटने टेके हैं और कैदी वहशियों को विवश होकर रिहा किया है। जब केन्द्र सरकार ही विवश है तो भला राज्य सरकारें विवश क्यों न हों? एक इतालवी नागरिक की रिहाई के लिए ओडिसा सरकार ने दुर्दान्त हत्यारों को छोड़ दिया। अब छत्तीसगढ़ सरकार की बारी है।
अंग्रजों के शासनकाल में उन्होंने बेशक हमें लूटा पर यह जरूर ध्यान रखा कि कोई दूसरा हमें लूट न पाये। यही कारण है कि उन्होंने कड़े कदम उठा कर देश भर में लुटेरे ठगों, पिंडारियों और मुल्तानी पठानों, जिन्हें 'रोहिल्ला' के नाम से भी जाना जाता था, का सफाया कर दिया। उन्होंने दुर्दान्त लुटेरों का सफाया तब किया था जबकि उनके पास आज के जैसी तकनीक नहीं थी। आज तकनीक इतनी बढ़ी-चढ़ी हुई है कि आतंकवादियों का पता आसानी के साथ लगाया जा सकता है किन्तु, लगता है कि, हमारी सरकारें नहीं चाहतीं कि आतंकवादियों का पता लगाकर उन्हें सजा दी जाए। तभी तो मुट्ठी-भर आतंकवादियों से पुलिस और सेना बल से युक्त सरकारों के नाक में दम कर रखा है।
ऐसे में यही सोच कर संतोष करना पड़ता है कि शायद लुटते रहना ही इस देश की जनता की नियति है।
11:02 AM
जी.के. अवधिया








1 टिप्पणियाँ:
अपहरण को हथियार बनाते जा रहे हैं
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