Tuesday, April 24, 2012

कहिनी के भाई सहिनी

कहिनी के भाई सहिनी

तउन बसाइन तीन गाँव
दू उजाड़ एक बसबेच् नइ करिस

तिहाँ बसिन तीन कुम्हार
दू अंधरा एक के आँखीच् नइ रहिस

तउन बनाइन तीन हँड़िया
दू फुटहा एक के पेंदीच् नइ रहिस

तेला बेचिन तीन पइसा
दू खोटहा एक चलतेच् नइ रहिस

तेखर कोड़ाइन तीन तरिया
दू सुक्खा एक में पानीच् नइ रहिस

तिहाँ ले पकड़िन तीन मछरी
दू सरहा एक के पोटाच् नइ रहिस

वो मछरी मन के कोनो गिराहिक मिलही तो बताहू जी संगी मन!

2 टिप्पणियाँ:

Rahul Singh said...

हम अन जी तुंहर ए गोठ के गंण-ग्राहक, बहुत दिन म सुने बर मिलिसे.

Lalit said...

अरे!!! बिल्कुल यही कहानी हमने भोजपुरी में सुनी है अपने बचपन में:
कहिनी कहीं कि महनी महीं?
कहिनी बसैलस तीन गन्वौआ के
दू गो उजडल -उजडल एगो में घरवे नाही....


आदित्यादि. अच्छा लगा पढ़ के....

 
Design by Free WordPress Themes | Bloggerized by Lasantha - Premium Blogger Themes | fantastic sams coupons