कहिनी के भाई सहिनी
तउन बसाइन तीन गाँव
दू उजाड़ एक बसबेच् नइ करिस
तिहाँ बसिन तीन कुम्हार
दू अंधरा एक के आँखीच् नइ रहिस
तउन बनाइन तीन हँड़िया
दू फुटहा एक के पेंदीच् नइ रहिस
तेला बेचिन तीन पइसा
दू खोटहा एक चलतेच् नइ रहिस
तेखर कोड़ाइन तीन तरिया
दू सुक्खा एक में पानीच् नइ रहिस
तिहाँ ले पकड़िन तीन मछरी
दू सरहा एक के पोटाच् नइ रहिस
वो मछरी मन के कोनो गिराहिक मिलही तो बताहू जी संगी मन!
Online English Test 1
14 hours ago
9:12 AM
जी.के. अवधिया








2 टिप्पणियाँ:
हम अन जी तुंहर ए गोठ के गंण-ग्राहक, बहुत दिन म सुने बर मिलिसे.
अरे!!! बिल्कुल यही कहानी हमने भोजपुरी में सुनी है अपने बचपन में:
कहिनी कहीं कि महनी महीं?
कहिनी बसैलस तीन गन्वौआ के
दू गो उजडल -उजडल एगो में घरवे नाही....
आदित्यादि. अच्छा लगा पढ़ के....
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