Friday, May 18, 2012

मेरा भारत मेरी शान - भारत में प्रथम

संकलनः मुकेश कैन
भारतीय गणतंत्र के पहले राष्ट्रपतिडॉ. राजेन्द्र प्रसाद
भारत के प्रथम प्रधानमंत्रीपंडित जवाहर लाल नेहरू
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले मुस्लिम अध्यक्षबदरुद्दीन तयाबी (Tayyabji)
भारत के पहले मुस्लिम राष्ट्रपतिडॉ. जाकिर हुसैन
नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीयरवीन्द्रनाथ टैगोर
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के पहले अध्यक्षW C बनर्जी
भारत के पहले ब्रिटिश गवर्नर जनरललॉर्ड विलियम बेंतिंक
बंगाल के पहले ब्रिटिश गवर्नर जनरललॉर्ड वॉरेन हास्टिंग
भारत के पहले ब्रिटिश वायसरायलॉर्ड कैनिंग
स्वतंत्र भारत के पहले गवर्नर जनरललॉर्ड माउंटबेटन
स्वतंत्र भारत के पहले और आखिरी भारतीय गवर्नर जनरलसी. राजगोपालाचारी
भारत का अंतरिक्ष में जाने वाल पहला आदमीराकेश शर्मा
भारत के पहले प्रधानमंत्री जिन्होंने अपने कार्यकाल की अवधि को पूरा करे बिना इस्तीफा दे दियामोरारजी देसाई
भारत के पहले भारतीय कमांडर - इन - चीफजनरल करियप्पा
थल सेनाध्यक्ष के पहले मुख्यमंत्रीजनरल महाराज राजेंद्र सिंहजी
भारत के पहले राष्ट्रपति कार्यालय में मर गएडॉ. जाकिर हुसैन
भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जो संसद में एक बार भी नहीं गएचरण सिंह
भौतिकी में नोबेल पुरस्कार पाने वाले पहले भारतीयसी वी रमण
भारत रत्न पुरस्कार पाने वाले पहले व्यक्तिडॉ. राधाकृष्णन
पहले भारतीय अंग्रेजी चैनल के पार करने वालेमिहिर सेन
ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले भारतीय व्यक्तिश्री शंकर कुरुप
पहले लोकसभा अध्यक्षगणेश वासुदेव मावलंकर
भारत के पहले उपराष्ट्रपतिडॉ. राधाकृष्णन
भारत के पहले शिक्षा मंत्रीअब्दुल कलाम आजाद
भारत के पहले गृह मंत्रीसरदार वल्लभ भाई पटेल
पहले भारतीय एयर चीफ मार्शलएस मुखर्जी
पहले भारतीय नौसेना प्रमुखवाइस एडमिरल आरडी कटारी
अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के प्रथम न्यायाधीशन्यायमूर्ति डा. नागेन्द्र सिंह
बिना ऑक्सीजन के माउंट एवरेस्ट तक जाने वाला पहला व्यक्तिशेरपा अंगा दोरजी
परम वीर चक्र पाने वाले पहले व्यक्तिमेजर सोमनाथ शर्मा
पहले मुख्य चुनाव आयुक्तसुकुमार सेन
मैगसेसे पुरस्कार पाने वाले पहले व्यक्ति भारतीयआचार्य विनोबा भावे
भारतीय मूल के चिकित्सा में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वालेहरगोविंद खुराना
पहले चीनी यात्री जो भारत आयाफा हेन
केन्द्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने वाले सबसे पहले व्यक्तिश्यामा प्रसाद मुखर्जी
अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाले पहले व्यक्तिअमर्त्य सेन
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति के प्रथम मुख्य न्यायाधीशहिरला जे कानिया
पहले भारतीय पायलटजे आर डी टाटा (J.R.D. Tata)
पहली मिस वर्ल्डरीता फारिया
सुप्रीम कोर्ट में पहली महिला न्यायाधीशमीरा साहिब फातिमा बीबी
पहली महिला राजदूतमिस सी.बी. मुथम्मा
स्वतंत्र भारत में एक राज्य की पहली महिला राज्यपालश्रीमती सरोजिनी नायडू
राज्य विधानसभा की पहली महिला स्पीकरशान्नो देवी
पहली महिला प्रधानमंत्रीश्रीमती इंदिरा गांधी
सरकार में पहली महिला मंत्रीराजकुमारी अमृत कौर
माउंट एवरेस्ट पर चढ़ने वाली पहली महिलाबछेंद्री पाल
माउंट एवरेस्ट पर दो बार चढ़ने वाली पहली महिलासंतोष यादव
भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की पहली महिला अध्यक्षश्रीमती एनी बेसेंट
भारतीय वायु सेना में पहली महिला पायलटहरिता कौर दयाल
पहली महिला स्नातककादम्बिनी गांगुली और चंद्रमुखी बसु
पहली महिला एयरलाइन पायलटदुर्गा बनर्जी
पहली महिला ऑनर्स ग्रेजुएटकामिनी राय
पहली महिला ओलिंपिक पदक विजेताकर्णम मल्लेश्वरी
पहली महिला एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेताकमलिजित संधू
पहली महिला वकीलकोर्नेलिया सोराबजी
संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्षश्रीमती विजया लक्ष्मी पंडित
एक भारतीय राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्रीश्रीमती सुचेता कृपलानी
संघ लोक सेवा आयोग की पहली महिला अध्यक्षमिल्लिआं बेथिऊ रोज
पुलिस की पहली महिला महानिदेशककंचन चौधरी भट्टाचार्य
पहली महिला न्यायाधीशअन्ना चांडी(जिला अदालत)
हाईकोर्ट की पहली महिला मुख्य न्यायाधीशलीला सेठ (हिमाचल प्रदेश)
भारत की सुप्रीम कोर्ट में पहली महिला न्यायाधीशकुमारी एम. फातिमा बीवी
पहली महिला लेफ्टिनेंट जनरलपुनीत अरोड़ा
पहली महिला एयर वाइस मार्शलपी. बन्दोपाध्याये
इंडियन एयरलाइंस की पहली महिला अध्यक्षसुषमा चावला
पहली महिला आईपीएस अधिकारीश्रीमती किरण बेदी
भारत की पहली और आखिरी मुस्लिम महिला शासकरजिया सुल्तान
अशोक चक्र प्राप्त करने वाली पहली महिलानीरजा भनोट
ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिलाआशापूर्णा देवी
पहली औरत अंग्रेजी चैनल पार करने वालीआरती साहा
नोबेल पुरस्कार प्राप्त करने वाली पहली महिलामदर टेरेसा
भारत रत्न प्राप्त करने वाली पहली महिलाइंदिरा गांधी
पहली बार किसी भारतीय की वैक्स प्रतिमामहात्मा गांधी (1939)
मिस यूनिवर्स में भाग लेने वाली पहली भारतीय महिलामिस इंडिया इंद्राणी रहमान
चिकित्सा में पहले ग्रेजुएटसूरजु कुमार गूद्वे चक्रबर्ती
भारत का पहला विश्वविद्यालयनालंदा विश्वविद्यालय
भारत की पहली ओपन युनिवर्सिटीआंध्र प्रदेश ओपन युनिवर्सिटी
भारत लोकसभा के लिए अधिकतम संख्या वोट की पहली रिकार्ड जीत निर्वाचित सदस्यपी वी नरसिम्हा राव
अंटार्कटिका पहुचने वाले पहले भारतीयलेफ्टिनेंट राम चरण
पहले ब्रिटिश जो भारत आयेहॉकिन्स
भारत की पहली टेस्ट ट्यूब बेबीइंदिरा (बेबी हर्ष)
भारत में पहला डाक घर खोला गयाकोलकाता (1727)
उपरोक्त सभी जानकारी भारत से या भारतीयों के बारे में है जयहिंद, जय माँ भारती!

Sunday, May 13, 2012

बेटी बचाओ, सृष्टि बचाओ

लेखः के.आर. मीना
भरतपुर


कांई थारो करयो रे कसूर

 सही है सरकारें आर्थिक मदद के अलावा कर क्या सकती हैं। वे जो परम्पराएँ हैं, जो बेटी वालों से दुश्मन-सा व्यवहार करती हैं। वो जो झूठी शान है जो बेटियों के पिता को झुकने पर मजबूर करती है, उन्हें कौन बंद करेगा? अगर आर्थिक प्रोत्साहन से बेटियां बराबरी का दर्जा पा सकतीं तो भला पैसे वाले, पढ़े-लिखे लोगों में बेटों की बेजा चाह क्यों होती? आखिर पूरा समाज और वो माँएँ, जो इस समूची सृष्टि की निर्माता हैं, बेटी को बचाने, उसे मान दिलाने कब आगे आयेंगी?

सात वार, नौ त्यौहार

 राजस्थान पूरे देश में एक अलग ही उदहारण है। बेटी के घर वालों को बेटे वाले दुश्मन की तरह देखते हैं। बड़े और गढ़े हुए छोटे-मोटे त्योहारों पर भी बेटे वालों को झोली भरकर मिठाई चाहिए। सास का बेस, ससुर के कपड़े। जेठ का सूट, जेठानी की साड़ी। बगल वाली उस चाची का भी बेस, जिससे 10 साल से बोलचाल बंद है। अनगिनत लिफाफे- देवर का पाँच सौ का, दोस्तों के दो-दो सौ के। ये क्या है? क्यों है? कौन रोकेगा? कहा जाता है, बेटे को पढाया-लिखाया है। हमारे भी अरमान हैं। तो क्या बेटी और बेटी वालों के अरमान मर गये? उन्होंने भी सोचा होगा - भले, अपने जैसे समधी मिलें। जब इतना सब कुछ हर त्यौहार पर सालों साल मांगते रहेंगे, तो आप भले कैसे हुए?

झुके कौन?

मानसिकता यह भी है कि बेटी पैदा हुई तो शादी होगी। बेटे वालों के आगे झुकना होगा। इसलिए या तो बेटी को पैदा ही नहीं होने देते। या पैदा होने के बाद मार देते हैं। या नहीं मारते तो अच्छी शिक्षा नहीं देते। बेटा अच्छे, मँहगे स्कूल में। ....और बेटी सरकारी स्कूल में। क्यों? हैरत देखिए- अपनी बेटी के लिए सबकुछ अच्छा चाहने वाली माँ ही सास बनकर बहू के घरवालों को उम्र भर इसलिए कोसती रहती है कि देवर के दोस्तों का एक लिफाफा (लिफाफे में बंद कुछ रूपये-पैसों के रूप में दी जाने वाली भेंट या विदाई) कम पड़ गया था। हो सकता कि यह कु-व्यवस्था पुरुषों ने ही शुरू की हो। लेकिन महिलाएँ इन्हें धर्म मानकर इनका पालन करती रहीं हैं जिससे महिला ही महिला कि दुश्मन बनती गई और आज भी बनी हुई है। यही हाल रहा तो सृष्टि को, वंश को आगे बढ़ाने वाली माँ ही एक दिन चीख कर कहेगी कि मुयी कोख न होती तो मैं दुनिया के सारे झंझटों से आजाद हो जाती। तब क्या होगा? सृष्टि का। वंश का। सास के बेस का। जेठ-जेठानी के कपड़ों का। देवर के लिफाफे और दूल्हे की कार का? जरा सोचिए। ठहर कर एक मिनिट तो सोचिए। बेटियाँ भी बेटों से बढ़ कर होती हैं। उन्हें मत मारिए। उनका मान कीजिए। आप बहुत बड़े हो जाएँगे। अपनी बेटियों की नजर में। दुनियां की नजर में। खुद की नजर में।

Saturday, May 5, 2012

चैटिंग - एक सजा या मजा

लेखः मुकेश कैन

चैटिंग का नशा एक भयंकर रोग के जैसा होता है। ये जिसे एक बार लग गया, तो समझो वो सारे काम-धंधे से गया। भारत में दिनों-दिन इंटरनेट यूजर्स बढ़ते जा रहे हैं, और लोग इस नशे का शिकार होते जा रहे हैं। इसकी चपेट में सबसे ज्यादा भारतीय छात्र-छात्राए एवं शादी सुदा जोड़े है।  फेसबुक, याहू, स्काइप, जीमेल आदि साइट्स पर हर कोई दूसरे से अनजान बनकर चैट करते रहते हैं। वो इतना रोमांचित होता है के इंसान स्वयं के बस में नहीं रहता, और कुछ नया, और कुछ नया की चाह में घंटो-घंटो इन्टरनेट पर लगे रहते है। इसका अंजाम बहुत बुरा होता है। इसका नशा ऐसा होता है कि न दिन में चैन रहता है और न रात को नींद आती है। ना खाने की सुध ना नहाने का समय। कई बार तो पति पत्नी स्वयं एक दूसरे से ही चैटिंग कर रहे होते और उन्हें लगता है के उन्हें उनका पसंदीदा साथी मिल गया जबकि वे वास्तविक जीवन में एक दूसरे से दूरिया बनाये रखते है  । कई बार तो चैटिंग करने वाले लोग गलत लोगो के जाल में भी फँस जाते है। कुछ साइट्स पर लड़किया इसे वैश्यावृति के लिए भी इस्तेमाल कर रही है। भोले-भाले लोग उन्हें आम लड़की समझ कर बातचीत करते है और उनसे दोस्ती कर बैठते है, और बाद में हकीकत सामने आने पर भी कुछ नहीं कर पाते है। कुछ लोग इसे अन्य लोगों को ठगने के लिए भी इस्तेमाल करते है, अपने आप को किसी स्वयंसेवी संस्था से जुड़ा हुआ बताते है और अनाथो या विधवाओ की सेवा के बहाने पैसा ऐंठते है। और कई बार तो लक्की ड्रा जेसे लुभावने जाल में फंसाते है।

हमें जरूरत है ऐसे धोखेबाजों से बचने की। सावधानी से इस उपयोगी सॉफ्टवेयर के इस्तेमाल करने की। यदि हम चैटिंग का सावधानीपूर्वक उपयोग करें तो ये बहुत काम की चीज है। मान लीजिये आप का कोई रिश्तेदार सात समुंदर पार आपसे बहुत दूर बैठा है और आपको उसे देखना या उससे बात करना चाहते हैं तो चैटिंग बहुत ही काम की चीज हो सकती है। आज के भाग-दौड वाले जीवन में लोग पैसा कमाने के लिए विदेश चले जाते है। ऐसे में बूढ़े माँ-बाप अपने बच्चो को देखना चाहते है। उनसे बातें करना मोबाइल या टेलीफोन के जरिये काफी माँगा पड़ता है। टेलीफोन के मुकाबले इन्टरनेट पर बात करना और अपनों को लाइव देखना बहुत ही सस्ता होता है लगभग ना के बराबर खर्च पर।

अब ये आप के ऊपर है कि आप चैटिंग को कैसे इस्तेमाल करते है। इस लेख का मकसद अनजान लोगो को सचेत करना मात्र है ना की किसी व्यक्ति विशेष अथवा किसी संस्था को बदनाम करना।

 
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