धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
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Saturday, October 24, 2009
लगती थीं जो उर्वशी-मेनका ... बन गईं वो ही रणचण्डिका ...
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शादी की थी हमने क्योंकि लगती थी वो उर्वशी-मेनका, पर पाया कुछ काल बाद ही बन गईं वो ही रणचण्डिका। फूलों से कोमल लगती थी वो सुशील, सलज्ज, किशोर...
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