धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

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Thursday, June 30, 2011

रोपै बिरवा आक को आम कहाँ ते होइ

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वृन्द के दोहे करै बुराई सुख चहै कैसे पावै कोइ। रोपै बिरवा आक को आम कहाँ ते होइ॥ भली करत लागति बिलम बिलम न बुरे विचार। भवन बनावत दिन लग...
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