धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Showing posts with label
लोकोक्ति
.
Show all posts
Showing posts with label
लोकोक्ति
.
Show all posts
Sunday, March 21, 2010
हम ... याने कि धोबी का गधा घर का ना घाट का
›
एक बार इस हिन्दी ब्लोगिंग में क्या घुस गये कि लत लग गई इसकी और इसने हमें "धोबी का गधा घर का ना घाट का" बना कर रख दिया। अंग्रेजी ब...
17 comments:
Monday, March 15, 2010
आना लंगूर के हाथ में हूर का ... बाद में पछताना लंगूर का
›
आप जितने भी जोड़े देखते होंगे उनमें से पंचान्बे प्रतिशत बेमेल ही मिलेंगे। पता नहीं क्या जादू है कि हमेशा हूर लंगूर के हाथों ही आ फँसती है। हम...
21 comments:
Thursday, March 11, 2010
व्यथा बड़े गुरूजी की
›
चेलों ने परेशान कर रखा है बड़े गुरूजी को। सारे चेले उनके ऊपर "मान ना मान मैं तेरा मेहमान" बन कर पिल पड़े हैं। रोज ऐसा पोस्ट लिख देत...
17 comments:
Tuesday, March 9, 2010
ये बुड्ढा तो सठियाने की सीमा पार कर गया है
›
सठियाने की भी एक सीमा होती है पर ये बुड्ढा तो सठियाने की सीमा पार कर गया है। कब्र में पाँव लटकाये बैठा है पर ब्लोगिंग का शौक नहीं गया। है त...
24 comments:
Thursday, February 4, 2010
"कुकुर के मुँह में लउड़ी हुड़सना" ... याने कि किसी को जबरन छेड़ना
›
मानव मस्तिष्क भी विचित्र वस्तु है। कभी-कभी यह किसी को जबरन छेड़ कर मौज लेता है। इसे ही छत्तीसगढ़ी हाना (लोकोक्ति) में "कुकुर के मुँह में ...
11 comments:
›
Home
View web version