धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

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Thursday, February 18, 2010

मोहे रहि रहि मदन सतावै, पिया बिना नींद नहि आवै

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नींद नहि आवै पिया बिना नींद नहि आवै। मोहे रहि रहि मदन सतावै पिया बिना नींद नहि आवै॥ सखि लागत मास असाढ़ा, मोरे प्रान परे अति गाढ़ा, अरे वो तो ब...
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