धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
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श्री हरिप्रसाद अवधिया
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Sunday, September 12, 2010
सुनहरा धोखा
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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) रक्तिम उषा, स्वर्णिम अरुणोदय, रवि की चमक-दमक, चन्द्र-रजत की ललक, उष्ण-शीत दिवस, झर झर झरता पा...
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