धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

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Tuesday, July 27, 2010

बस मुझमें ईमान नहीं है!

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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) हट्टा-कट्टा मेरा तन है, तन के भीतर चंचल मन है, बहुत बड़ा परिवार है मेरा घर में भी काफी ज्यादा धन...
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