कल्लू काटा और लल्लू लाटा हमारे मुहल्ले के मुहल्ला विकास समिति के सबसे अधिक सक्रिय सदस्य हैं, बल्कि वास्तव में कहा जाए तो वे दोनों ही मुहल्ला विकास समिति के सर्वेसर्वा हैं। दोनों ही चाहते हैं कि मुहल्ले में कुछ न कुछ आधुनिक कार्यक्रम हों। इसी बात को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मुहल्ले में वैलेन्टाइन सभा का आयोजन किया।
वैलेन्टाइन सभा में मुहल्ले के गणमान्य जन एकत्रित हो गए। कल्लू काटा ने सभा को सम्बोधित करते हुए कहा, "प्रिय मुहल्लावासियों! हमारे मुहल्ले में हर साल जन्माष्टमी, गणेशोत्सव, दुर्गोत्सव जैसे कार्यक्रम होते हैं। किन्तु आपको मालूम होना चाहिए कि सदियों से चले आ रहे ये कार्यक्रम अब किसी काम के नहीं रह गए हैं। ये सारे कार्यक्रम पोंगा-पंथियों के हैं और आज के जमाने में अब इनकी कुछ भी व्हैल्यु नहीं रह गई है। आज जरूरत है नए और आधुनिक कार्यक्रमों की। मुहल्ला विकास समिति ने मुहल्ले में इस वर्ष बड़े धूम-धाम से वैलेन्टाइन डे कार्यक्रम मनाने का निश्चय किया है और इस सन्दर्भ में आप लोगों की राय जानने के लिए इस वैलेन्टाइन सभा का आयोजन किया गया है।"
धरणीधर जी, जो कि मुहल्ले के बुजुर्ग और भारतीय सभ्यता के पक्षपाती थे, ने कहा, "आपने जन्माष्टमी, दुर्गोत्सव आदि को पोंगापंथी कार्यक्रम कैसे कह दिया? हमें लगता है कि आप वैलेन्टाइन डे मना कर मुहल्ले में मलेच्छ संस्कृति का प्रचार करना चाहते हैं।"
कल्लू काटा ने जवाब दिया, "देखिए धरणीधर जी, आप हमारे बुजुर्ग हैं इसलिए मैं आपका पूरा-पूरा सम्मान करता हूँ। पर यह सभा नौजवानों की है, आपको हमने यहाँ बुलाया भी नहीं है। अच्छा यही होगा कि आप चुपचाप यहाँ से निकल लें।"
धरणीधर कुछ और बोल पाते इसके पहले ही लल्लू लाटा ने उन्हें सभा से जबरदस्ती बाहर कर दिया।
कल्लू काटा ने कहना जारी रखा, "मित्रों, मैंने जो कुछ भी कहा, उसका आशय यह नहीं है कि जन्माष्टमी, दुर्गोत्सव आदि मनाने में कुछ बुराई है। मैं तो यह कहना चाहता हूँ कि उनमें अब कुछ चार्म नहीं रह गया है। वैलेन्टाइन हमारे मुहल्ले के लिए भले नया हो पर हमारे देश भारत के लिए यह बहुत पुराना है। देखा जाए तो त्रेता युग में कैकसी के द्वारा विश्रवा ऋषि से प्रणय निवेदन करना वैलेन्टाइन ही था। और कैकसी ने विश्रवा से प्रणय निवेदन अपने पिता सुमाली के कहने से किया था याने कि उस समय के पैरेन्ट्स भी बेहद जागरूक थे। शूर्पणखा ने लक्ष्मण को अपना वैलेन्टाइन बनाया था, यह बात और है कि लक्ष्मण को वह वैलेन्टाइन के रूप में पसन्द नहीं आई। आज हम अपने वैलेन्टाइन को मोबाइल करके बुलाते हैं, कुन्ती के जमाने में मोबाइल नहीं था, मोबाइल की जगह मन्त्र था। कुन्ती ने क्या किया? अपने वैलेन्टाइन सूर्य को मन्त्र के द्वारा बुला लिया। वैलेन्टाइन में हम लोग प्रपोज करते हैं ना? तो दुष्यन्त ने भी तो अपने वैलेन्टाइन शकुन्तला को प्रपोज ही तो किया था। अर्जुन और सुभद्रा एक दूसरे के वैलेन्टाइन ही तो थे। सुभद्रा के पुत्र अभिमन्यु की वैलेन्टाइन थी उत्तरा। अभिमन्यु अपनी वैलेन्टाइन उत्तरा को अवश्य प्राप्त करे यही सोचकर तो उसके चचेरे भाई घटोत्कच ने अभिमन्यु का साथ दिया था! पृथ्वीराज और संयोगिता एक-दूसरे के वैलेन्टाइन ही तो थे। भारत का पूरा इतिहास भरा पड़ा है वैलेन्टाइनों से। इसलिए आप लोग यह जरा भी न सोचें कि वैलेन्टाइन डे या वीक भारत में बाहर से आया है। यह तो प्राचीनकाल से ही भारत का रहा है और विदेशियों ने इसे हमसे ही लिया है। और इसीलिए मुहल्ला विकास समिति ने हर साल बड़े धूम-धाम से वैलेन्टाइन उत्सव मनाने का निश्चय किया है।"
कल्लू काटा के इस भाषण पर तालियों की गड़गड़ाहट से सभा गूँज उठी।
गंगू बाई, जो मुहल्ले के घरों में कामवाली का काम करती थी, ने कहा, "वैलेन्टाइन उत्सव मनाने का बना के आपने बहुत अच्छा किया साहेब! अइसा करने से अब मेरी परेशानी कम हो जाएगी। अब लोग मेरे से साल भर प्रपोज करने के बदले इस त्यौहार में ही करेंगे। अभी 'किस डे' के दिन मैं कितना परेशान थी, जिस घर में काम करने जाती थी वहीं का साहेब मेरे को किस करने को कहता था। मोहिनी बाई ने तो देख भी लिया के उसका घरवाला मेरे को किस किया है। वो मेरे को नौकरी से निकाल रही थी तो मैंने कहा बाई माफ कर दे अपने साहब को। किसन भगवान भी तो गोपियों से रास रचाते थे पर रुकमनी, सतभामा ने उने माफ किया के नइ? तू साहब को माफ कर देगी तो साहब तेरे लिए हीरे का नेकलेस ला देने को भी तैयार हैं। और तू मेरे को नौकरी से निकालेगी तो सोच तेरे घर का काम कौन करेगा? मैं किसी दूसरे कामवाली बाई को तो आनेच् नइ दूँगी ये मोहल्ले में। तो साहेब, ये वैलेन्टाइन उत्सव हो जाने से मेरी किल्लत कम होयेंगी।"
फेकूलाल जी ने कहा, "वैलेन्टाइन उत्सव मनाना शुरू करना वास्तव में ही राष्ट्रहित का काम है, इससे हमारी प्राचीन परम्परा कायम रहेगी। इस उत्सव को तो हर शहर के हर गली-कूचे में मनाया जाना चाहिए। हमें यह भी कोशिश करना चाहिए कि हमारी सरकार इस उत्सव को विशेष महत्व दे और इस अवसर पर अवकाश या कम से कम अविवाहितों के लिए विशेष आकस्मिक अवकाश की घोषणा करे।"
इतने में ही किसी ने आकर बताया कि धरणीधर वैलेन्टाइ विरोधियों के दल को लेकर इसी तरफ आ रहे हैं और सभा से सारे लोग ऐसे गायब हो गए जैसे कि गधे के सिर से सींग।
Tuesday, February 14, 2012
Monday, February 13, 2012
ऐसा रहा हमारा वैलेन्टाइन
देखा कि श्रीमती जी का मूड अच्छा था सो हमने कह दिया, " हैप्पी हग डे डार्लिंग!"
श्रीमती जी ने नाक को आँचल से दबाकर, मुख-मुद्रा को वीभत्स बनाते हुए, कहा, "छिः छिः, क्या गन्दगी वाली बातें कहते हैं आप भी।"
हमने कहा, "अरे मैं हिन्दी के 'हग' के बारे में नहीं, अंग्रेजी के 'हग' के बारे में कह रहा हूँ। ग्रेजुएशन कैसे कर लिया था तुमने जब कि अंग्रेजी का 'हग' भी नहीं जानती?"
"क्या मैं कन्व्हेंट में पढ़ती थी जो ये सब जानूँ? आप अच्छी तरह से जानते हैं कि मेरा मीडियम हिन्दी था।"
"आज वैलेन्टाइन वीक का छठवाँ दिन है 'हग डे', इसीलिए मैंने 'हैप्पी हग डे डार्लिंग' कहकर तुम्हें विश किया था।"
"इतनी उम्र हो गई आपकी और आपको शर्म भी नहीं आती ऐसा कहते हुए? बच्चे सुन लें तो जाने क्या सोचें?"
"बच्चे अब बच्चे नहीं रह गए हैं, गृहस्थी वाले हो गए हैं, वो सब समझते हैं बल्कि खुद भी बहुओं को यही कह रहे होंगे।"
"वो कुछ भी करें, वो नये जमाने के हैं। पर आपको अपने जमाने के साथ चलना चाहिए। 'सींग कटा कर बछड़ों में शामिल होना' भला कोई अच्छी बात है?"
"कुछ भी कहो, पर मुझे तो लगता है कि मेरे और तुम्हारे साथ तो वही मिसल हो गई कि 'बन्दर क्या जाने अरदक का स्वाद' या कहें कि 'अन्धा क्या जाने बसन्त बहार'!"
श्रीमती जी ने तत्काल तुनक कर जवाब दिया, "देखिये जी, न तो आप बन्दर हैं और न मैं बन्दरिया। हम दोनों अन्धे भी नहीं हैं। अगर आप समझते हैं कि लच्छेदार भाषा में मुझसे बात करके आप मुझ पर रौब गाँठ लेंगे, तो जान लीजिए कि आप गलत समझ रहे हैं।"
'खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे' के अन्दाज में हमने कहा, "अरे भई, मैं तो यह कह रहा था हमारे जमाने में वैलेन्टाइन वीक होती ही नहीं थी और हम उसका मजा उठा ही नहीं पाए।"
"अच्छा, अगर उस जमाने में वैलेन्टाइन वीक होता तो क्या करते आप?" श्रीमती जी ने हम पर तरस खाने के अन्दाज में कहा।
"तो मैं 7 फरवरी याने कि 'रोज डे' के दिन तुम्हें गुलाब के बहुत सारे खूबसूरत फूल उपहार में देता।"
"येल्लो, थर्ड क्लास में फिल्म देखने के लिए तो आपके पास चालीस पैसे तो होते नहीं थे उन दिनों। अपनी छोटी बहन तक से पैसे माँग लेते थे टिकट के लिए। मैं ही चुपके से आपकी बहन को पैसे दे दिया करती थी जिसे वो आपको देती थी। फिर मेरे लिए ढेर सारे गुलाब लाने के लिए कहाँ से पैसे आते आपके पास? और क्या आप समझते हैं कि आप मुझे गुलाब का फूल देते तो मैं खुश हो जाती? जबकि आप जानते हैं कि मेरे घर के बगीचे में गुलाब के फूलों की कोई कमी नहीं थी, हर प्रकार के गुलाब खिलते थे वहाँ पर।"
"अरे भई, 'रोज डे' के दिन प्रेमिका को गुलाब के फूल देना रिवाज है।"
"मतलब ये कि जिसके पास ढेर सारे गुलाब हों उसे भी उपहार में गुलाब ही दो। ये तो वैसा ही हुआ कि भरपेट खाना खाये आदमी को और खाने को दो।"
"तुम नहीं समझोगी इस रिवाज को।"
"हाँ मैं कैसे समझूँगी? मैं तो बेवकूफ हूँ। आप सीधे-सीधे मुझे बेवकूफ कह रहे हैं। जबकि अकल खुद आपमें नहीं है, अगर होती तो आप मुझे गुलाब देने के बदले गोलगप्पे खिलाते।"
मन ही मन हमने सोचा कि कह तो ये ठीक ही रही है, अगर हम में अकल होता तो इससे शादी ही क्यों करते? फिर प्रत्यक्ष कहा, "तुम तो जुबान पकड़ लेती हो, मैंनें तुम्हें बेवकूफ नहीं कहा, मेरी क्या शामत आई है जो तुम्हें बेवकूफ कहूँ? क्या इतना भी मैं नहीं जानता कि जिस तरह से काने को काना नहीं कहना चाहिए उसी तरह से बेवकूफ को भी बेवकूफ नहीं कहना चाहिए। फिर भी अगर तुम्हें ऐसा लगता है कि मैंने कहा है तो माफ कर दो। हाँ फिर 8 फरवरी याने कि प्रपोज डे के दिन मैं तुम्हें प्रपोज करता।"
"हुँह, खाक प्रपोज करते। किसी लड़की से बात तक करने में तो नानी मरती थी आपकी।"
"अरे भई कर ही लेता कैसे भी करके प्रपोज। फिर चॉकलेट डे के दिन मैं तुम्हें चॉकलेट लाकर देता।"
"आप जानते हैं ना कि चॉकलेट मुझे जरा भी पसन्द नहीं है। हाँ चॉकलेट की जगह अगर रसमलाई होता तो शायद मैं खुश हो जाती।"
"पर चॉकलेट डे के दिन चॉकलेट ही दिया जाता है।"
"अगर आप मुझे चॉकलेट देते मैं आपके सामने ही उसे फेंक देती।"
"और फिर किस डे के दिन मैं तुम्हें किस करता।"
"इतनी हिम्मत थी आपमें? और कैसे भी हिम्मत करके शादी से पहले आप मुझे किस करने की कोशिश करते तो किस-विस तो मिलता नहीं उल्टे मेरे हाथ के दो-चार झापड़ जरूर मिल गए होते।"
"तुम वैलेन्टाइन के लायक हो ही नहीं।"
"तो मैंने कब कहा कि मैं हूँ। बड़े आए हैं वैलेन्टाइन वाले। अपनी संस्कृति-सभ्यता भूल कर ऊल-जलूल रिवाज अपनाने वाले। भलाई इसी में है कि आप अपनी खाल में ही रहिये। और अब मेरा टाइम खोटा करने के बजाय जाइये, सब्जी लेकर आइये। और खबरदार जो फिर कभी वैलेन्टाइन-फैलेन्टाइन का नाम लिया मेरे सामने।"
इसके बाद भला हम क्या कर सकते थे? चुपचाप उठकर चले गए सब्जी लेने।
श्रीमती जी ने नाक को आँचल से दबाकर, मुख-मुद्रा को वीभत्स बनाते हुए, कहा, "छिः छिः, क्या गन्दगी वाली बातें कहते हैं आप भी।"
हमने कहा, "अरे मैं हिन्दी के 'हग' के बारे में नहीं, अंग्रेजी के 'हग' के बारे में कह रहा हूँ। ग्रेजुएशन कैसे कर लिया था तुमने जब कि अंग्रेजी का 'हग' भी नहीं जानती?"
"क्या मैं कन्व्हेंट में पढ़ती थी जो ये सब जानूँ? आप अच्छी तरह से जानते हैं कि मेरा मीडियम हिन्दी था।"
"आज वैलेन्टाइन वीक का छठवाँ दिन है 'हग डे', इसीलिए मैंने 'हैप्पी हग डे डार्लिंग' कहकर तुम्हें विश किया था।"
"इतनी उम्र हो गई आपकी और आपको शर्म भी नहीं आती ऐसा कहते हुए? बच्चे सुन लें तो जाने क्या सोचें?"
"बच्चे अब बच्चे नहीं रह गए हैं, गृहस्थी वाले हो गए हैं, वो सब समझते हैं बल्कि खुद भी बहुओं को यही कह रहे होंगे।"
"वो कुछ भी करें, वो नये जमाने के हैं। पर आपको अपने जमाने के साथ चलना चाहिए। 'सींग कटा कर बछड़ों में शामिल होना' भला कोई अच्छी बात है?"
"कुछ भी कहो, पर मुझे तो लगता है कि मेरे और तुम्हारे साथ तो वही मिसल हो गई कि 'बन्दर क्या जाने अरदक का स्वाद' या कहें कि 'अन्धा क्या जाने बसन्त बहार'!"
श्रीमती जी ने तत्काल तुनक कर जवाब दिया, "देखिये जी, न तो आप बन्दर हैं और न मैं बन्दरिया। हम दोनों अन्धे भी नहीं हैं। अगर आप समझते हैं कि लच्छेदार भाषा में मुझसे बात करके आप मुझ पर रौब गाँठ लेंगे, तो जान लीजिए कि आप गलत समझ रहे हैं।"
'खिसियानी बिल्ली खम्भा नोचे' के अन्दाज में हमने कहा, "अरे भई, मैं तो यह कह रहा था हमारे जमाने में वैलेन्टाइन वीक होती ही नहीं थी और हम उसका मजा उठा ही नहीं पाए।"
"अच्छा, अगर उस जमाने में वैलेन्टाइन वीक होता तो क्या करते आप?" श्रीमती जी ने हम पर तरस खाने के अन्दाज में कहा।
"तो मैं 7 फरवरी याने कि 'रोज डे' के दिन तुम्हें गुलाब के बहुत सारे खूबसूरत फूल उपहार में देता।"
"येल्लो, थर्ड क्लास में फिल्म देखने के लिए तो आपके पास चालीस पैसे तो होते नहीं थे उन दिनों। अपनी छोटी बहन तक से पैसे माँग लेते थे टिकट के लिए। मैं ही चुपके से आपकी बहन को पैसे दे दिया करती थी जिसे वो आपको देती थी। फिर मेरे लिए ढेर सारे गुलाब लाने के लिए कहाँ से पैसे आते आपके पास? और क्या आप समझते हैं कि आप मुझे गुलाब का फूल देते तो मैं खुश हो जाती? जबकि आप जानते हैं कि मेरे घर के बगीचे में गुलाब के फूलों की कोई कमी नहीं थी, हर प्रकार के गुलाब खिलते थे वहाँ पर।"
"अरे भई, 'रोज डे' के दिन प्रेमिका को गुलाब के फूल देना रिवाज है।"
"मतलब ये कि जिसके पास ढेर सारे गुलाब हों उसे भी उपहार में गुलाब ही दो। ये तो वैसा ही हुआ कि भरपेट खाना खाये आदमी को और खाने को दो।"
"तुम नहीं समझोगी इस रिवाज को।"
"हाँ मैं कैसे समझूँगी? मैं तो बेवकूफ हूँ। आप सीधे-सीधे मुझे बेवकूफ कह रहे हैं। जबकि अकल खुद आपमें नहीं है, अगर होती तो आप मुझे गुलाब देने के बदले गोलगप्पे खिलाते।"
मन ही मन हमने सोचा कि कह तो ये ठीक ही रही है, अगर हम में अकल होता तो इससे शादी ही क्यों करते? फिर प्रत्यक्ष कहा, "तुम तो जुबान पकड़ लेती हो, मैंनें तुम्हें बेवकूफ नहीं कहा, मेरी क्या शामत आई है जो तुम्हें बेवकूफ कहूँ? क्या इतना भी मैं नहीं जानता कि जिस तरह से काने को काना नहीं कहना चाहिए उसी तरह से बेवकूफ को भी बेवकूफ नहीं कहना चाहिए। फिर भी अगर तुम्हें ऐसा लगता है कि मैंने कहा है तो माफ कर दो। हाँ फिर 8 फरवरी याने कि प्रपोज डे के दिन मैं तुम्हें प्रपोज करता।"
"हुँह, खाक प्रपोज करते। किसी लड़की से बात तक करने में तो नानी मरती थी आपकी।"
"अरे भई कर ही लेता कैसे भी करके प्रपोज। फिर चॉकलेट डे के दिन मैं तुम्हें चॉकलेट लाकर देता।"
"आप जानते हैं ना कि चॉकलेट मुझे जरा भी पसन्द नहीं है। हाँ चॉकलेट की जगह अगर रसमलाई होता तो शायद मैं खुश हो जाती।"
"पर चॉकलेट डे के दिन चॉकलेट ही दिया जाता है।"
"अगर आप मुझे चॉकलेट देते मैं आपके सामने ही उसे फेंक देती।"
"और फिर किस डे के दिन मैं तुम्हें किस करता।"
"इतनी हिम्मत थी आपमें? और कैसे भी हिम्मत करके शादी से पहले आप मुझे किस करने की कोशिश करते तो किस-विस तो मिलता नहीं उल्टे मेरे हाथ के दो-चार झापड़ जरूर मिल गए होते।"
"तुम वैलेन्टाइन के लायक हो ही नहीं।"
"तो मैंने कब कहा कि मैं हूँ। बड़े आए हैं वैलेन्टाइन वाले। अपनी संस्कृति-सभ्यता भूल कर ऊल-जलूल रिवाज अपनाने वाले। भलाई इसी में है कि आप अपनी खाल में ही रहिये। और अब मेरा टाइम खोटा करने के बजाय जाइये, सब्जी लेकर आइये। और खबरदार जो फिर कभी वैलेन्टाइन-फैलेन्टाइन का नाम लिया मेरे सामने।"
इसके बाद भला हम क्या कर सकते थे? चुपचाप उठकर चले गए सब्जी लेने।
Friday, February 10, 2012
गूगल सर्च बनाये आपके लिए दिल का चित्र
जरा गूगल के सर्च बॉक्स में टाइप करें -
sqrt(cos(x))*cos(300x)+sqrt(abs(x))-0.7)*(4-x*x)^0.01, sqrt(6-x^2), -sqrt(6-x^2)
(आप उपरोक्त सूत्र को यहाँ से कॉपी करके गूगल सर्च बॉक्स में पेस्ट भी कर सकते हैं)
देखा आपने परिणाम में क्या आया?
दिल जैसा ही चित्र है ना!
अब उपरोक्त सूत्र में cos(300x) के 300 को दूसरी संख्याओं जैसे कि 500, 600, 700 आदि में बदल कर देखिए चित्र में कैसे कैसे परिवर्तन होते हैं।
अब मुझसे यह मत पूछिएगा कि ऐसा क्यों हुआ, क्योंकि यह तो मैं भी नहीं जानता। इन्टरनेट में सर्फिंग करते हुए इस बात का मुझे पता चला तो मैंने आपकी जानकारी के लिए इसे पोस्ट कर दिया।
sqrt(cos(x))*cos(300x)+sqrt(abs(x))-0.7)*(4-x*x)^0.01, sqrt(6-x^2), -sqrt(6-x^2)
(आप उपरोक्त सूत्र को यहाँ से कॉपी करके गूगल सर्च बॉक्स में पेस्ट भी कर सकते हैं)
देखा आपने परिणाम में क्या आया?
दिल जैसा ही चित्र है ना!
अब उपरोक्त सूत्र में cos(300x) के 300 को दूसरी संख्याओं जैसे कि 500, 600, 700 आदि में बदल कर देखिए चित्र में कैसे कैसे परिवर्तन होते हैं।
अब मुझसे यह मत पूछिएगा कि ऐसा क्यों हुआ, क्योंकि यह तो मैं भी नहीं जानता। इन्टरनेट में सर्फिंग करते हुए इस बात का मुझे पता चला तो मैंने आपकी जानकारी के लिए इसे पोस्ट कर दिया।
Monday, January 30, 2012
पोस्ट लिखना सिखा दीजिए
"नमस्कार लिख्खाड़ानन्द जी!"
"नमस्काऽऽर! आइये, आइये टिप्पण्यानन्द जी!"
"लिख्खाड़ानन्द जी, टिप्पणी तो हम करते ही रहते हैं, पर कभी-कभी एकाध पोस्ट लिखने की भी इच्छा हो जाती है। सो, आप हमें पोस्ट लिखना सिखा दीजिए।"
"अरे इसमें सिखाने की क्या बात है? आप तो वैसे ही पोस्ट लिख सकते हैं।"
"हम कैसे पोस्ट लिख सकते हैं? हमें तो कोई विषय भी नहीं सूझता जिस पर पोस्ट लिखें।"
"टिप्पण्यानन्द जी, आप और मैं दोनों ही छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर में रहते हैं ना! तो जो कुछ भी छत्तीसगढ़ और रायपुर के बारे में आपके पास जानकारी है उसे लिख डालिए। बन गई पोस्ट!"
"हम तो सिर्फ इतना जानते हैं कि रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी है। बस इतनी सी जानकारी से भला पोस्ट कैसे बनेगा?"
"अच्छा ये बताइये कि छत्तीसगढ़ क्या है?"
"छत्तीसगढ़ तो एक राज्य है।"
"छत्तीसगढ़ राज्य कब बना?"
"01 नवम्बर 2000 को।"
"यह भारत का कौन सा नम्बर का राज्य है?"
"26वाँ।"
"इतना सब जानते हैं आप और कहते हैं कि 'हम तो सिर्फ इतना जानते हैं कि रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी है'। अभी आप याद करेंगे तो आपको छत्तीसगढ़ और रायपुर के बारे में और भी बहुत सारी बातें याद आ जाएँगी।"
"हाँ, याद आया कि कहीं पढ़ा था कि रायपुर शहर का अस्तित्व नवीं शताब्दी से चला आ रहा है और 14 वीं सदी में रतनपुर राजवंश के राय ब्रह्मदेव ने इसे फिर से बसाया था तथा यहाँ अपनी राजधानी बनाई थी।"
" ये हुई ना बात! याने कि आपने जो पढ़ा है उसके हिसाब से रायपुर एक हजार दो सौ साल पुराना शहर है। पर हम आपको बताएँ कि छत्तीसगढ़ एक अत्यन्त प्राचीन क्षेत्र है, यहाँ पर मौर्य वंश का भी शासन रह चुका है। छत्तीसगढ़ के पाटन ब्लॉक के तर्रीघाट में मौर्ययुगी मृदभांड मिल चुके हैं इसके अलावा कुषाण सहित अन्य समकालीन वंश के अनेक सिक्के भी प्राप्त हुए हैं। दूसरी से तीसरी शताब्दी तक यहाँ पर सातवाहन राजाओं का राज्य रहा है। चौथी सदी में राजा समुद्रगुप्त ने इस पर विजय प्राप्त कर लिया और पाँचवी-छठवीं सदी तक उनके वंशज यहाँ राज्य करते रहे। पाँचवी-छठवीं सदी में यह क्षेत्र कुछ काल तक शरभपुरी राजाओं में के अधिकार में रहा फिर नल वंश के शासक यहाँ शासन करने लगे। बाद में इस क्षेत्र का नियन्त्रण सोमवंशी राजाओं के हाथ में आ गया जिन्होंने सिरपुर को अपनी राजधानी बनाया था। सोमवंशी राजाओं में महाशिवगुप्त बालार्जुन सर्वाधिक पराक्रमी राजा रहे, उन्हीं की माता रानी वत्सला ने सिरपुर में लक्ष्मण मन्दिर का निर्माण करवाया था। आपको तो मालूम ही होगा कि सिरपुर का प्राचीन नाम 'श्रीपुर' था और 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग श्रीपुर आया था जिसने श्रीपुर के 70 मंदिरों व 100 विहारों का उल्लेख किया है।"
"वाह लिख्खाड़ानन्द जी! आपके पास तो नायाब जानकारी है! कहाँ से इकट्ठा कर लेते हैं इसे आप?"
"बस टिप्पण्यानन्द जी, कुछ पुस्तकें पढ़नी पड़ती हैं और कुछ नेट से सर्च कर करना पड़ता है।"
"अच्छा तो अब इसके आगे भी बताइये।"
" देखिये टिप्पण्यानन्द जी, वर्ष 1909 में प्रकाशित इम्पीरियल गजेटियर में लिखा है कि 'ऐसा प्रतीत होता है कि छत्तीसगढ़ एक अत्यन्त प्राचीन क्षेत्र है जहाँ भुइया एवं मुंडा वंश के शासकों का राज्य था जिन पर गोंड वंश ने विजय प्राप्त कर उन्हें सुदूर पहाड़ियों में भाग जाने के लिए विवश कर दिया था। गोंडों ने प्रथम बार इस क्षेत्र को नियमित व्यवस्था वाला शासन प्रदान किया।' साथ ही उसमें यह भी उल्लेख है कि 'विश्वास किया जाता है कि रायपुर नगर का अस्तित्व नौवीं शताब्दी से है तथा प्राचीन रायपुर वर्तमान रायपुर के दक्षिण पश्चिम में बसा था जिसका विस्तार खारून नदी तक था।' आपकी जानकारी के लिये हम आपको यह भी बता दें कि हमें यह पूरा इम्पीरियल गजेटियर नेट में ही मिल गया था जिसका लिंक है - http://dsal.uchicago.edu/reference/gazetteer/ ।"
"हमने रायपुर में किसी किले के बारे में भी कहीं पढ़ा था।"
"हाँ, रायपुर का वह प्राचीन किला अब पूर्णतः नष्ट हो चुका है। उस किले का निर्माण सन् 1460 में किया गया था। किले के दो तरफ दो तालाब थे जो कि आज भी विद्यमान हैं तथा विवेकानन्द सरोवर (बूढ़ा तालाब) एवं महराजबन तालाब के नाम से जाने जाते हैं।"
"अच्छा यह तो बताइये कि रायपुर में हैहयवंशी राजाओं का राज कब हुआ?"
"बहुत खोजने पर भी हमें यह जानकारी नहीं मिल पाई कि रायपुर कब हैहयवंशी शासकों के अधीन आया किन्तु ऐसा लगता होता है कि रायपुर लगभग ग्यारहवीं शताब्दी में रतनपुर से विभाजित होकर अलग राज्य बना और रतनपुर के राजा के कनिष्ठ पुत्र यहाँ के राजा बने।"
"बताते जाइये, मैं ध्यान से सुन रहा हूँ।"
"आगे की जानकारी इस प्रकार से है टिप्पण्यानन्द जी -
"बस लिख्खाड़ानन्द जी, अभी इतना काफी है। बाद में यदि कुछ शंका हुई तो पूछ लूँगा।"
"अब तो आपके पास काफी मसाला इकट्ठा हो गया है़, अब जल्दी से लिख डालिये अपना पोस्ट।"
"धन्यवाद लिख्खाड़ानन्द जी! अब मैं चलता हूँ, नमस्कार!"
"नमस्काऽर!"
"नमस्काऽऽर! आइये, आइये टिप्पण्यानन्द जी!"
"लिख्खाड़ानन्द जी, टिप्पणी तो हम करते ही रहते हैं, पर कभी-कभी एकाध पोस्ट लिखने की भी इच्छा हो जाती है। सो, आप हमें पोस्ट लिखना सिखा दीजिए।"
"अरे इसमें सिखाने की क्या बात है? आप तो वैसे ही पोस्ट लिख सकते हैं।"
"हम कैसे पोस्ट लिख सकते हैं? हमें तो कोई विषय भी नहीं सूझता जिस पर पोस्ट लिखें।"
"टिप्पण्यानन्द जी, आप और मैं दोनों ही छत्तीसगढ़ के रायपुर शहर में रहते हैं ना! तो जो कुछ भी छत्तीसगढ़ और रायपुर के बारे में आपके पास जानकारी है उसे लिख डालिए। बन गई पोस्ट!"
"हम तो सिर्फ इतना जानते हैं कि रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी है। बस इतनी सी जानकारी से भला पोस्ट कैसे बनेगा?"
"अच्छा ये बताइये कि छत्तीसगढ़ क्या है?"
"छत्तीसगढ़ तो एक राज्य है।"
"छत्तीसगढ़ राज्य कब बना?"
"01 नवम्बर 2000 को।"
"यह भारत का कौन सा नम्बर का राज्य है?"
"26वाँ।"
"इतना सब जानते हैं आप और कहते हैं कि 'हम तो सिर्फ इतना जानते हैं कि रायपुर छत्तीसगढ़ की राजधानी है'। अभी आप याद करेंगे तो आपको छत्तीसगढ़ और रायपुर के बारे में और भी बहुत सारी बातें याद आ जाएँगी।"
"हाँ, याद आया कि कहीं पढ़ा था कि रायपुर शहर का अस्तित्व नवीं शताब्दी से चला आ रहा है और 14 वीं सदी में रतनपुर राजवंश के राय ब्रह्मदेव ने इसे फिर से बसाया था तथा यहाँ अपनी राजधानी बनाई थी।"
" ये हुई ना बात! याने कि आपने जो पढ़ा है उसके हिसाब से रायपुर एक हजार दो सौ साल पुराना शहर है। पर हम आपको बताएँ कि छत्तीसगढ़ एक अत्यन्त प्राचीन क्षेत्र है, यहाँ पर मौर्य वंश का भी शासन रह चुका है। छत्तीसगढ़ के पाटन ब्लॉक के तर्रीघाट में मौर्ययुगी मृदभांड मिल चुके हैं इसके अलावा कुषाण सहित अन्य समकालीन वंश के अनेक सिक्के भी प्राप्त हुए हैं। दूसरी से तीसरी शताब्दी तक यहाँ पर सातवाहन राजाओं का राज्य रहा है। चौथी सदी में राजा समुद्रगुप्त ने इस पर विजय प्राप्त कर लिया और पाँचवी-छठवीं सदी तक उनके वंशज यहाँ राज्य करते रहे। पाँचवी-छठवीं सदी में यह क्षेत्र कुछ काल तक शरभपुरी राजाओं में के अधिकार में रहा फिर नल वंश के शासक यहाँ शासन करने लगे। बाद में इस क्षेत्र का नियन्त्रण सोमवंशी राजाओं के हाथ में आ गया जिन्होंने सिरपुर को अपनी राजधानी बनाया था। सोमवंशी राजाओं में महाशिवगुप्त बालार्जुन सर्वाधिक पराक्रमी राजा रहे, उन्हीं की माता रानी वत्सला ने सिरपुर में लक्ष्मण मन्दिर का निर्माण करवाया था। आपको तो मालूम ही होगा कि सिरपुर का प्राचीन नाम 'श्रीपुर' था और 7वीं शताब्दी में चीनी यात्री ह्वेनसांग श्रीपुर आया था जिसने श्रीपुर के 70 मंदिरों व 100 विहारों का उल्लेख किया है।"
"वाह लिख्खाड़ानन्द जी! आपके पास तो नायाब जानकारी है! कहाँ से इकट्ठा कर लेते हैं इसे आप?"
"बस टिप्पण्यानन्द जी, कुछ पुस्तकें पढ़नी पड़ती हैं और कुछ नेट से सर्च कर करना पड़ता है।"
"अच्छा तो अब इसके आगे भी बताइये।"
" देखिये टिप्पण्यानन्द जी, वर्ष 1909 में प्रकाशित इम्पीरियल गजेटियर में लिखा है कि 'ऐसा प्रतीत होता है कि छत्तीसगढ़ एक अत्यन्त प्राचीन क्षेत्र है जहाँ भुइया एवं मुंडा वंश के शासकों का राज्य था जिन पर गोंड वंश ने विजय प्राप्त कर उन्हें सुदूर पहाड़ियों में भाग जाने के लिए विवश कर दिया था। गोंडों ने प्रथम बार इस क्षेत्र को नियमित व्यवस्था वाला शासन प्रदान किया।' साथ ही उसमें यह भी उल्लेख है कि 'विश्वास किया जाता है कि रायपुर नगर का अस्तित्व नौवीं शताब्दी से है तथा प्राचीन रायपुर वर्तमान रायपुर के दक्षिण पश्चिम में बसा था जिसका विस्तार खारून नदी तक था।' आपकी जानकारी के लिये हम आपको यह भी बता दें कि हमें यह पूरा इम्पीरियल गजेटियर नेट में ही मिल गया था जिसका लिंक है - http://dsal.uchicago.edu/reference/gazetteer/ ।"
"हमने रायपुर में किसी किले के बारे में भी कहीं पढ़ा था।"
"हाँ, रायपुर का वह प्राचीन किला अब पूर्णतः नष्ट हो चुका है। उस किले का निर्माण सन् 1460 में किया गया था। किले के दो तरफ दो तालाब थे जो कि आज भी विद्यमान हैं तथा विवेकानन्द सरोवर (बूढ़ा तालाब) एवं महराजबन तालाब के नाम से जाने जाते हैं।"
"अच्छा यह तो बताइये कि रायपुर में हैहयवंशी राजाओं का राज कब हुआ?"
"बहुत खोजने पर भी हमें यह जानकारी नहीं मिल पाई कि रायपुर कब हैहयवंशी शासकों के अधीन आया किन्तु ऐसा लगता होता है कि रायपुर लगभग ग्यारहवीं शताब्दी में रतनपुर से विभाजित होकर अलग राज्य बना और रतनपुर के राजा के कनिष्ठ पुत्र यहाँ के राजा बने।"
"बताते जाइये, मैं ध्यान से सुन रहा हूँ।"
"आगे की जानकारी इस प्रकार से है टिप्पण्यानन्द जी -
- सन् 1741 में मराठा सेनापति, भास्कर पन्त, ने रतनपुर राज्य पर विजय प्राप्त की और उसे मराठा राज्य में जोड़ दिया।
- सन् 1750 में रायपुर के राजा अमरसिंह मराठों के द्वारा पराजित हुए।
- सन् 1750 से 1818 तक रायपुर पर मराठों का शासन रहा।
- सन् 1818 में रायपुर को अंग्रेजों ने मराठों से हथिया लिया और वहाँ सन् 1818 से 1830 तक अंग्रेजों का शासन रहा। सन् 1818 में ही अंग्रेजों ने रायपुर को छत्तीसगढ़ का मुख्यालय बनाया।
- सन् 1830 में रायपुर पर फिर से मराठों का अधिकार हो गया जो कि सन् 1853 तक चला।
- सन् 1853 में पुनः रायपुर अंग्रेजों के अधीन आ गया और स्वतन्त्रता प्राप्ति तक उन्हीं का शासन रहा।
- इम्पीरियल गजेटियर के अनुसार रायपुर पर अंग्रेजों के अधिकार प्राप्ति के समय रायपुर के प्राचीन मन्दिर दूधाधारी मन्दिर का जीर्णोद्धार हो रहा था।
- अंग्रेजों के काल में रायपुर कमिश्नर डिवीजन, डिवीजनल जज, इंस्पेक्टर ऑफ स्कूल्स, सुपरिन्टेन्डेन्ट ऑफ पोस्ट ऑफिस तथा इरीगेशन इंजीनियर के प्रतिनिधि आदि का मुख्यालय था। सेन्ट्रल प्राव्हिंसेस के तीन सेन्ट्रल जेलों में से एक जेल रायपुर में ही था।
- सन् 1861 में बिलासपुर को रायपुर जिला से निकाल कर अलग जिला बनाया गया।
- सन् 1867 में रायपुर में म्युनिसपालिटी बनाया गया।
- सन् 1892 रायपुर में जल वितरण के लिए बलरामदास वाटर वर्क्स, जिसके मालिक राजनांदगाँव के राजा बलरामदास थे, की स्थापना हुई जो खारून नदी से पानी के वितरण का कार्य करता था।
- उस समय पीतल के सामान बनाने का कार्य, लकड़ी पर रोगन लगाने का कार्य, कपड़ा बुनना, सोनारी कार्य आदि रायपुर के प्रमुख व्यवसाय थे।
- उन दिनों रायपुर में दो प्रिंटिंग प्रेस थे जिनमें अंग्रेजी, हिन्दी, उर्दू और ओड़िया भाषा में छपाई का कार्य होता था।
- रायपुर में एक संग्रहालय भी था जिसका निर्माण सन् 1875 में हुआ था।
- शिक्षा के लिए राजकुमार कॉलेज, जहाँ पर राजा, जमींदारों, जागीरदारों एवं रईसों के सन्तानों को ही दाखिला दिया जाता था, के साथ ही गव्हर्नमेंट हाई स्कूल भी था, इसके अलावा अनेक अन्य स्कूल भी थे। चिकित्सा के लिए बहुत सार डिस्पेंसरीज भी थे।
"बस लिख्खाड़ानन्द जी, अभी इतना काफी है। बाद में यदि कुछ शंका हुई तो पूछ लूँगा।"
"अब तो आपके पास काफी मसाला इकट्ठा हो गया है़, अब जल्दी से लिख डालिये अपना पोस्ट।"
"धन्यवाद लिख्खाड़ानन्द जी! अब मैं चलता हूँ, नमस्कार!"
"नमस्काऽर!"
Sunday, January 29, 2012
क्या आप जानते हैं?
- भारत संसार का सबसे बड़ा अंग्रेजी बोलने वाला (English speaking) देश है।
- भारत के बेंगलोर नगर में 1,500 से भी अधिक सॉफ्टवेयर कंपनियाँ हैं जिनमें 26,000 से भी अधिक आईटी प्रोफेसनल्स काम करते हैं। इन कम्पनियों के निर्यात से रु.22,000 करोड़ की आय होती है।
- भारत में संसार का सबसे बड़ा पोस्टल नेटवर्क है जिनके अन्तर्गत 1,50,000 से भी अधिक पोस्ट आफिस हैं।
- अप्रवासी भारतीयों (NRIs) की वार्षिक आय लगभग $100 बिलियन है जिसमें से वे लगभग $30 बिलियन भारत भेजते हैं।
- भारत संसार का सबसे बड़ा आम उत्पादक देश है तथा संसार में पैदा होने वाले आम का 50 प्रतिशत से भी अधिक भारत में ही होता है।
- भारतीय रेल्वे संसार का सबसे बड़ा नियोक्ता (employer) है।
- भारत में प्रतिवर्ष लगभग 800 चलचित्र बनते हैं, चलचित्रों की यह संख्या हॉलीवुड को भी निष्प्रभ करती है।
- संसार भर में निकाले जाने वाले सोने का लगभग पाँचवा हिस्सा भारत में खपता है।
- यूनाइटेड किंगडम में लगभग 8,500 भारतीय रेस्टॉरेंट्स हैं जो कि वहाँ के समस्त रेस्टॉरेंट्स का 15% है।
- भारत संसार का तृतीय सड़क नेटवर्क है तथा भारत के सड़कों की लम्बाई 19,00,000 मील से भी अधिक है।
- समस्त संसार की आबादी के 25% लोग भारत में आरम्भ हुए चार धर्मों (हिन्दू, बौद्ध, सिक्ख और जैन) के अनुयायी हैं।
- भारत में अंग्रेजों के आगमन से पूर्व भारत संसार का सबसे धनवान देश था।
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