Friday, March 15, 2013

सोला बरस की उमरिया – सेक्स (Sex) की छूट मिल गई रे सँवरिया

शायद सरकार को लगता है कि कानूनी रूप से सेक्स की छूट न मिलने के कारण ही लड़कियाँ सेक्स (Sex) याने कि यौन संबंध के लिए अपनी सहमति नहीं देतीं, जो कि बलात्कार का बहुत बड़ा कारण है। यदि कानूनन सेक्स (Sex) की छूट हो तो लड़कियाँ हर किसी ऐरे-गैरे को सेक्स के लिए सहमति दे देंगी और बलात्कार होने खत्म हो जाएँगे। शायद यही सोचकर सरकार ने एंटी रेप बिल कैबिनेट से पास करकेसेक्स करने की आयु 18 से घटाकर 16 साल करने का प्रावधान बनाया है। जिन्होंने यह बिल पास किया है उनमें से अधिकांश की बेटियों की उम्र 16 साल या उससे कुछ ज्यादा होगी। क्या बिल पास करने के पहले उन्होंने अपनी बेटियों से इस विषय में विचार-विमर्श किया है? क्या उनकी 16 साल उम्र की बेटियाँ  किसी को भी सेक्स (Sex) के लिए सहमति दे देंगी? और अगर वे सहमति दे भी दें तो क्या बिल पास करने वाले पिताओं को यह स्वीकार्य होगा?

चलते-चलते


सेक्स (Sex) को बिल्कुल फ्री कर देंगे!!!!!!!!!!

डिस्काउंट! डिस्काउंट!! डिस्काउंट!!!

फ्री सेक्स (Sex) पर दो साल का डिस्काउंट!!!!!

हमने बिल पास किया और सेक्स करने की उम्र को 18 साल से घटा कर 16  साल कर दिया।

अगली बार हमें ही वोट दीजिए।

आप हमें वोट देंगे तो हम और भी डिस्काउंट देंगे!!!!!!!

सेक्स (Sex) को बिल्कुल फ्री कर देंगे!!!!!!!!!!

Saturday, February 23, 2013

हमारे पास पहले से सूचना थी और इंतजार कर रहे थे

हमारे पास पहले से सूचना थी....

हम इंतजार कर रहे थे कि कब बम ब्लास्ट हों....

और कब हम निंदा करें....

सरकार में हैं तो आखिर कुछ न कुछ करना तो पड़ता ही है।

फिर हेलीकॉप्टर वाले मामले से लोगों का ध्यान हटाना भी जरूरी था कि नहीं?

Monday, December 31, 2012

नया साल मनाने का एक तरीका यह भी

हमारे मित्र मिश्रा जी, जो कि धार्मिक प्रवृति के व्यक्ति हैं, ने हमसे पूछा, "बताइये तो सही कि आप नया साल कैसे मनायेंगे?"

हमने कहा, "मिश्रा जी, जीवन में ऐसे कितने ही नये साल आए और गए। अब तो जीवन में वह उत्साह ही नहीं रह गया है जो नया साल मनाने की इच्छा पैदा करे। आप बताइये कि आप किस प्रकार से नया साल मनायेंगे?"

उन्होंने कहा, "ड्यूटी से घर वापस आते रात के लगभग दस तो बज ही जाते हैं। (वे एक पेट्रोल पंप में काम करते हैं और उनकी ड्यूटी लगभग बारह घंटे की होती है) घर आकर रोज की तरह स्नान करूँगा करूँगा। प्रातः स्नान के बाद पूजा अवश्य करता हूँ किन्तु रात्रि स्नान के बाद नहीं। पर आज नये साल के उपलक्ष्य में रात्रि स्नान के बाद भी पूजा कर लूँगा। श्रीमती जी से कहकर कुछ विशिष्ट व्यंजन बनवा लूँगा और पूजा के बाद परिवार सहित भोजन कर लेंगे। इस प्रकार से नया साल मनाना हो जाएगा।"

मैंने तो आज तक अंग्रेजी नये साल मनाने के ऐसे तरीके के बार में कभी नहीं सुना। मैंने तो यही देखा है कि अंग्रेजी नया साल मनाने के लिए लोग नाचते-गाते हैं, खुशियाँ मनाते हैं और नशे में गाफ़िल हो जाते हैं। पर हमारे मिश्रा जी के लिए पूजा-पाठ ही नाचना-गाना, खुशियाँ मनाना और नशे में गाफ़िल होना है। वे तो अंग्रेजी नये साल को हिन्दू तरीके से मना कर ही खुश होते हैं।

Thursday, December 27, 2012

अगर ब्लोगवाणी चाहे तो आज भी फिर से हिन्दी ब्लोगिंग में जान फूँक सकती है

और किसी को लगे, न लगे, पर मुझे लगता है कि हिन्दी ब्लोगिंग की प्राणशक्ति बेहद कमजोर हो चुकी है, इसके पीछे कारण यही लगता है कि हिन्दी ब्लोगिंग के लिए अच्छे एग्रीगेटर का न होना। और फिर फेसबुक ने भी तो हिन्दी ब्लोगिंग की प्राणशक्ति को चूस लिया है।

वैसे तो हिन्दी ब्लोगिंग के लिए अनेक एग्रीगेटर्स बने किन्तु हिन्दी ब्लोगिंग को सबसे अधिक किसी एग्रीगेटर ने बढ़ाया तो वह है ब्लोगवाणी। एक समय ऐसा था कि हिन्दी ब्लोगर्स अपना ब्लॉग बाद में खोलते थे, ब्लोगवाणी पहले खोल लिया करते थे। फिर हिन्दी ब्लोगिंग के दुर्भाग्य का उदय हुआ और ब्लोगवाणी ने हिन्दी ब्लोग्स के अपडेट देना बंद कर दिया। शायद कुछ विघ्नसंतोषी लोगों के द्वारा ब्लोगवाणी की भावनाओं को लगातार ठेस पहुँचाते रहना ही इसका कारण रहा हो सकता है। उसके कुछ दिनों बाद चिट्ठाजगत का बंद हो जाना हिन्दी ब्लोगिंग के लिए "दुबले के लिए दूसरा आषाढ़" साबित हुआ।

ब्लोगवाणी कभी भी बंद नहीं हुई, वह आज भी चल रही है, बस उसमें हिन्दी ब्लोग्स के अपडेट को बंद कर दिया गया है। अगर ब्लोगवाणी चाहे तो आज भी फिर से हिन्दी ब्लोगिंग में जान फूँक सकती है, बस इसके लिए उसे फिर से हिन्दी ब्लोग्स के अपडेट को चालू करना होगा। ब्लोगवाणी के हिन्दी ब्लोगिंग पर बहुत से उपकार हैं जिसे हिन्दी ब्लोगिंग कभी भुला नहीं पायेगी। पर आज एक बार फिर से हिन्दी ब्लोगिंग को ब्लोगवाणी के उपकार की आवश्यकता है। ब्लोगवाणी टीम यदि हिन्दी ब्लोग्स के अपडेट को फिर से चालू कर देगी तो निश्चय ही यह हिन्दी ब्लोगिंग पर उसका सबसे बड़ा उपकार होगा। हिन्दी ब्लोगिंग घिसट-घिसट कर चलने के बजाय एक बार फिर से दौड़ना शुरू कर देगी।

Monday, December 24, 2012

जब मुझे बूढ़े से बच्चा बनना पड़ा

इस पोस्ट का शीर्षक पढ़ कर शायद आप सोच रहे होंगे कि ये जी.के. अवधिया क्या बेपर की हाँक रहा है? भला आदमी बूढ़े से बच्चा कैसे बन सकता है?

 यह तो हम सभी जानते हैं कि जो समय बीत गया उसे फिर से वापस लाया नहीं जा सकता। समय बीतने के साथ ही उम्र भी बढ़ते जाती है, और बीते हुए उम्र को भी फिर से वापस नहीं लाया जा सकता। पर बीते चुके उम्र में कल्पना के सहारे जाया तो जा सकता है।

बात यह हुई कि मेरे मित्र गुप्ता जी ने मुझसे कहा कि उनके पुत्र, जो कि कक्षा पीपी२ में पढ़ता है, के स्कूल की पत्रिका छप रही है और वे अपने पुत्र के नाम से कु सामग्री उसमें छपने के लिए देना चाहते हैं, अतः मैं उन्हें या तो नेट से कुछ खोज कर दूँ या स्वयं कुछ लिख कर दूँ। मैंने सोचा कि चलो इसी बहाने कुछ लिख लिया जाए। पर मेरी सोच तो बूढ़ी हो चुकी है क्योंकि मैं बूढ़ा आदमी हूँ। इसलिए मैंने अपनी कल्पना के सहारे, अपने बचपन में वापस जाकर, स्वयं को बच्चा बनाया और उन्हें यह लिखकर दियाः

क्रिसमस की छुट्टी

क्रिसमस की छुट्टी हैं आईं।
खुशियों की ये लहरें लाईं॥
चुन्नू मुन्नू मेरे घर आए।
सब मिलकर हम नाचे गाये॥

मम्मी पापा प्यार जताते।
अपने संग पिकनिक ले जाते॥
खुशियों के हम गीत हैं गाते।
मामा मेरे ढोल बजाते॥

चह चह चहके चिड़िया रानी।
दाना चुगाती इसे है नानी॥
बहना मेरी बड़ी सयानी।
होकर बड़ी ये बनेगी रानी॥

कल कल करती नदिया बहती।
झर झर बहता झरना॥
नदिया झरना कहते हमसे।
सीखो हमसे आगे बढ़ना॥

तो ऐसे बनना पड़ा मुझे बूढ़े से बच्चा।