Thursday, January 29, 2015

चाणक्य नीति - अध्याय 2 (Chanakya Neeti in Hindi)


  • औरतो के कुछ नैसर्गिक दुर्गुण है -
    झूठ बोलना
    कठोरता
    छल करना
    बेवकूफी करना
    लालच
    अपवित्रता
    निर्दयता 
  • सामान्य तप का फल नहीं है -
    भोजन के योग्य पदार्थ की उपलब्धता और भोजन करने की क्षमता होना
    सुन्दर स्त्री की प्राप्ति और उसे भोगने के लिए काम शक्ति होना
    पर्याप्त धनराशि का होना तथा दान देने की भावना
  • वह व्यक्ति धरती पर स्वर्ग को पा लेता है -
    जिसका पुत्र आज्ञांकारी हो
    जिसकी पत्नी उसकी इच्छा के अनुरूप व्यव्हार करती हो
    जो अपने कमाये धन से संतुष्ट हो
  • पुत्र वही है जो पिता का आज्ञापालन करे, पिता वही है जो पुत्रों का पालन-पोषण करे, मित्र वही है जिस पर पूरा विश्वास किया जा सके और पत्नी वही है जिससे सुख प्राप्त हो।
  • ऐसे लोगों से बचकर रहना चाहिए जो आपके मुँह के सामने मीठी बातें करते हैं, किन्तु आपके पीठ पीछे आपके विनाश की योजना बनाते है। ऐसा करने वाले उस विष के घड़े के समान है जिसकी उपरी सतह दूध से भरी हो।
  • किसी बुरे मित्र पर तो कभी विश्वास करें हीं नहीं, साथ ही किसी अच्छे मित्र पर भी विश्वास न करें, क्योंकि आपसे रुष्ट होने पर ऐसे लोग आप के सारे रहस्यों को अन्य लोगों को बता देंगे।
  • जिस किसी भी कार्य को करने के लिए आपने निश्चय किया है, उसे किसी के समक्ष प्रकट न करें तथा बुद्धिमत्तापूर्ण तरीके से उसे कार्यरूप में परिणित कर दें।
  • मूर्खता निश्चित रूप से कष्ट देती है, वैसे ही युवावस्था भी निःसन्देह कष्टमय है, किन्तु सबसे अधिक दुःखदायी होता है किसी अन्य के घर जाकर उससे उपकृत होना।
  • प्रत्येक पर्वत पर माणिक्य नहीं मिलते, प्रत्येक हाथी के सिर पर मणि नहीं होता, प्रत्येक स्थान में साधु नहीं मिलते और प्रत्येक वन में चन्दन का वृक्ष नहीं होता।
  • बुद्धिमान व्यक्ति को अपने पुत्रों को नैतिकता की शिक्षा देनी चाहिए, क्योंकि नीतिशास्त्र में निपुण एवं अच्छा व्यवहार करने वाले पुत्र परिवार की कीर्ति होते हैं।
  • अपनी सन्तान को शिक्षा से वंचित रखने वाले माता-पिता अपनी ही सन्तान के शत्रु होते हैं, क्योंकि विद्या से रहित बालक विद्वानों की सभा में वैसे ही तिरस्कृत होते हैं जैसे कि हंसों की सभा में बगुले।
  • बच्चों मे गलत आदते पैदा करती है और ताड़ना से अच्छी आदतें, इसलिए बच्चों को, जरुरत पड़ने पर, अपने शिष्यों दण्डित करना चाहिए, लाड कभी भी ना करें।
  • बिना एक श्लोक, आधा श्लोक, चौथाई श्लोक, या श्लोक का केवल एक अक्षर सीखे या दान, अभ्यास या कोई पवित्र कार्य किये बिना किसी भी दिन को नहीं जाने देना चाहिए।
  • बिना अग्नि के शरीर को जलाती हैं -
    पत्नी से वियोग
    अपनों से अनादर
    बचा हुआ ऋण
    दुष्ट राजा की सेवा
    गरीबी
    अव्यवस्थित सभा
  • निःसन्देह शीघ्र नष्ट हो जाते हैं -
    नदी किनारे के वृक्ष
    दूसरे व्यक्ति के घर में रहने वाली स्त्री
    बिना मंत्री का राजा
  • ब्राह्मण का बल है तेज और विद्या, राजा का बल है उसकी सेना, वैश्य का बल है उसका धन और शूद्र का बल है उसकी सेवा-भावना।
  • वेश्या को निर्धन व्यक्ति का त्याग करना पड़ता है, प्रजा को पराजित राजा का त्याग करना पड़ता है, पक्षियों को फलरहित वृक्ष का त्याग का त्याग करना पड़ता है और अतिथियों को भोजन करने के पश्चात् अपना आतिथ्य करने वाले के घर का त्याग करना पड़ता है।
  • दक्षिणा मिल जाने पर ब्राह्मण यजमान के घर से चला जाता है, विद्या प्राप्ति के बाद शिष्य गुरु के घर से चला जाता है और आग से जल जाने पर पशु वन से चले जाते हैं।
  • दुराचारी, कुदृष्टि रखने वाले तथा धूर्त व्यक्ति के साथ मित्रता करने वाले का शीघ्र नाश हो जाता है।
  • प्रेम और मित्रता बराबर वालों में ही फलता है, राजा की सेवा करने वाले को ही सम्मान मिलता है, सार्वजनिक व्यवहार में व्यावसायिक बुद्धि वाला ही अच्छा होता है और सुन्दर महिला अपने घर में ही सुरक्षित होती है।

Monday, January 26, 2015

चाणक्य नीति - अध्याय 1 (Chanakya Neeti in Hindi)

  • प्रकाण्ड पण्डित भी घोर कष्ट में आ जाता है जब वह
    किसी मूर्ख को उपदेश देता है
    वह दुष्ट पत्नी का पालन-पोषण करता है
    किसी दुखी व्यक्ति के साथ अतयंत घनिष्ठ सम्बन्ध बना लेता है
    दुष्ट पत्नी, झूठा मित्र, धृष्ट नौकर और साँप के साथ निवास करना अपनी मृत्यु को निमन्त्रित करना है

  • दुर्दिन से निबटने के लिए धन संचय करना चाहिए। पत्नी की रक्षा के लिए, आवश्यक हो तो, धन का भी त्याग कर देना चाहिए। आत्म-रक्षा के लिए, आवश्यक हो तो, धन और पत्नी दोनों का ही बलिदान कर देना चाहए।

  • भविष्य में आने वाली आपदाओं के लिए धन जमा करना चाहिए। ऐसा कदापि न सोचें कि धनवान व्यक्ति पर, धन होने से, कभी आपदा नही आ सकती क्योंकि जब आपदा आती है तो धन भी साथ छोड़ देता है।

  • जहाँ मान-सम्मान न मिले, जहाँ आजीविका न मिले, जहाँ कोई मित्र न हो और जहाँ ज्ञानार्जन न हो सके ऐसे देश में कदापि निवास नहीं करना चाहिए।

  • उस स्थान में एक दिन भी निवास नहीं करना चाहिए जहाँ निम्न पाँच न हो -

    एक धनवान व्यक्ति
    एक ब्राह्मण जो वैदिक शास्त्रों में निपुण हो
    एक राजा
    एक नदी
    एक चिकित्सक
  • बुद्धिमान व्यक्ति को ऐसे देश में कभी नहीं जाना चाहिए जहाँ -

    आजीविका कमाने का कोई माध्यम ना हो
    लोगों को किसी बात का भय न हो
    लोगो को किसी बात की लज्जा न हो
    जहा लोग बुद्धिमान न हो
    लोगो की वृत्ति दान धरम करने की ना हो

  • नौकर की परीक्षा कर्त्तव्य-पालन से होती है, रिश्तेदारों की परीक्षा मुसीबत पड़ने पर होती है, मित्र की परीक्षा विपरीत परिस्थितियों में होती है और पत्नी की परीक्षा बुरे दिनों में होती है।

  • अच्छा मित्र वही है जो हमे निम्न परिस्थितियों में साथ न त्यागे -

    आवश्यकता पड़ने पर
    किसी प्रकार की दुर्घटना हो जाने पर
    जब अकाल पड़ा हो
    जब युद्ध चल रहा हो
    जब हमे राजा के दरबार मे जाना पड़े
    जब हमे श्मशान घाट जाना पड़े

  • जो व्यक्ति किसी नाशवान वस्तु के लिए ऐसी वस्तु को छोड़ देता है जिसका कभी नाश नहीं होता, तो नाशवान वस्तु को तो वह खोता ही है और निःसन्देह उसके हाथ से अविनाशी वस्तु भी निकल ही जाती है। 

  • बुद्धिमान व्यक्ति को सम्माननीय परिवार कन्या से ही विवाह करना चाहिए, भले की कन्या रूपवान न हो। हीन परिवार की कन्या चाहे कितनी भी सुन्दर क्यों न हो, उससे विवाह नहीं करना चाहिए। शादी-ब्याह हमेशा बराबरी के परिवारों मे ही उचित होता है।

  • निम्न पाँच पर कभी विश्वास नहीं करना चाहिए  -

    नदियाँ
    जिन व्यक्तियों के पास अस्त्र-शस्त्र हों
    नाख़ून और सींग वाले पशु
    औरतें (भोली सूरत)
    राज घराने के लोग

  • सम्भव हो तो विष मे से भी अमृत निकाल लेना चाहिए, यदि सोना गन्दगी में भी पड़ा हो तो उसे उठा तथा धोकर अपना लेना चाहिए, नीच कुल मे जन्म लेने वाले से भी ज्ञान ग्रहण करना लेना चाहिए और अच्छे गुणों से सम्पन्न बदनाम कन्या से भी सीख ग्रहण करना चाहिए।
  • महिलाओं में पुरुषों कि अपेक्षा भूख दोगुनी, लज्जा चारगुनी, साहस छःगुना और काम आठगुनी होती है।

Saturday, January 24, 2015

वसन्त पंचमी - वसन्त ऋतु का प्रारम्भ (Vasant Panchami)


वसन्त ऋतु को ऋतुराज की संज्ञा दी गई है। ऋतुराज अर्थात् ऋतुओं का राजा!

जलते हुए अंगारों के जैसे पलाश के फूल! सारे पत्ते झड़े हुए सेमल के वृक्षों पर लगे हुए रक्त के जैसे लाल सुमन! वातावरण में मनमोहक सुगन्ध बिखेरती शीतल-मन्द बयार! मन में मादकता पैदा करने वाली आम के बौर! रंग-बिरंगे फूलों से सजे बाग-बगीचे! हवा के झौंकों से गिरे फूलों से शोभित भूमि! कलकल ध्वनि के साथ तेजी के साथ बहती नदियाँ! स्वच्छ जल से लबालब तालाब व झीलें। पक्षियों का मधुर कलरव!

यही सब तो वसन्त को ऋतुओं का राजा बना देते हैं।

माना जाता है कि वसन्त का आरम्भ वसन्त पंचमी (Vasant Panchami) के दिन से होता है। और आज वसन्त पंचमी है (Vasant Panchami) याने कि वसन्त ऋतु की शुरुवात।

अब शिशिर की ठिठुरन खत्म और वसन्त की शीतोष्ण समीर द्वारा तन और मन का सहलाना शुरू!

ऐसा शायद ही कोई रसिक होगा जिसका मन वसन्त पंचमी (Vasant Panchami) से लेकर रंग पंचमी तक मादकता और मस्ती से न मचले।

तो मित्रों! आप सभी को वसन्त पंचमी  (Vasant Panchami) की हार्दिक शुभकामनाए!

Friday, January 23, 2015

"आजाद हिन्द फौज (The Indian National Army) का Provisional Government" : नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की अमर गाथा

21 अक्टूबर 1943 का दिन इतिहास का एक सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं गौरवशाली दिन है!

इसी दिन नेताजी सुभाष चन्द्र बोस (Subhash Chandra Bose) ने "आजाद हिन्द तत्कालिक (provisional) सरकार" बनाने का ऐलान किया था। नेताजी सुभाषचन्द्र बोस (Subhash Chandra Bose) के द्वारा की गई "आजाद हिन्द फौज (The Indian National Army) का Provisional Government" के निर्माण की इस घोषणा ने स्वातंत्र्य वीरों को जोश और उत्साह से भर दिया था। इस घोषणा में प्रत्येक भारतीय, चाहे वह किसी भी जाति का हो या किसी भी संप्रदाय को मानने वाला हो, को समान मान्यता और समान मान्यता देने का दावा नेताजी ने किया था। अपने भाषण के अन्त में उन्होंने भावोत्तेज अपील किया था कि -

"In the name of God, in the name of bygone generations who have welded the Indian people into one nation and in the name of the dead heroes who have bequeathed to us a tradition of heroism and self-sacrifice - we call upon the Indian people to rally round our banner and strike for India's Freedom. We call upon them to launch the final struggle against the British and all their allies in Indian and to prosecute that struggle with valour and perseverance and with full faith in Final Victory - until the enemy is expelled from
Indian soil and the Indian people are once again a Free Nation."

भावार्थ - भगवान के नाम पर, बीते पीढ़ियों के नाम पर, जिन्होंने हमें एक राष्ट्र के रूप जोड़ रखा है और उन अमर वीरों के नाम पर जिन्होंनें हमें वीरता एवं आत्म बलिदान की एक परंपरा विरासत दिया है - भारत की स्वतंत्रता प्राप्ति के उद्देश्य से रैलियाँ निकालने, बैनर लगाने तथा हड़तालें करने के लिए निमन्त्रित करते हैं। हम उन्हें ब्रिटिश एवं उनके समस्त सहयोगियों के विरुद्ध वीरतापूर्वक और दृढ़तापूर्वक एवं अन्तिम विजय हेतु दृढ़ विश्वास रखते हुए निर्णायक संघर्ष आरम्भ करने के लिए आह्वान करते हैं - तब तक संघर्ष जारी रहना चाहिए जब तक कि दुश्मन भारत भूमि से खदेड़ ना दिये जाएँ और समस्त भारतीय पुनः एक स्वतन्त्र राष्ट्र के अंग न बन जाएँ।

"आजाद हिन्द फौज (The Indian National Army) का Provisional Government"  में नेताजी सुभाष चन्द्र बोस (Subhash Chandra Bose) स्वयं देश के मुखिया, प्रधान मन्त्री तथा युद्ध मन्त्री थे तथा आजाद हिन्द फौज के अन्य अधिकारी केबिनेट मेम्बर थे।

"आजाद हिन्द तत्कालिक (provisional) सरकार" के केबिनेट मेम्बर्स का विवरण इस प्रकार है -

लेफ्टिनेंट ए.सी. चटर्जी - वित्त मन्त्री (Minister of Finance)
डॉ.(कैप्टन) लक्ष्मी सहगल - Minister of Women’s Organisation
श्री ए.एम सहाय - Secretary with Ministerial Rank
श्री एस.एं अय्यर - Minister of Publicity and Propaganda
ले. कर्नल जे.के. भोंसले - Representative of INA
ले. कर्नल लोगानाथन - Representative of INA
ले. कर्नल एहसान कादिर - Representative of INA
ले. कर्नल एन.एस. भगत - Representative of INA
ले. कर्नल एम.जेड. कियानी - Representative of INA
ले. कर्नल अज़ीज़ अहमद -Representative of INA
ले. कर्नल शाह नवाज़ खान - Representative of INA
ले. कर्नल गुलजारा सिंह - Representative of INA
रास बिहारी बोस - Supreme Advisor
करीम गियानी - Advisor from Burma
देबनाथ दास - Advisor from Thailand
सरदार ईशर सिंह - Advisor from Thailand
डी.एम. खान - Advisor from Hong Kong
ए. येल्लप्पा - Advisor from Singapore
ए.एन सरकार - Advisor from Singapore
 (सन्दर्भः http://www.s1942.org.sg/s1942/indian_national_army/provi.htm)

"आजाद हिन्द तत्कालिक (provisional) सरकार" ने न केवल नेताजी को जापानियों के साथ बराबरी के साथ समझौता करने में सक्षम बनाया बल्कि पूर्व एशिया में रहने वाले भारतीयों को एक सूत्र में बाँधकर आजाद हिन्द फौज में भर्ती होने के लिए प्रोत्साहित किया। सुभाष चन्द्र बोस जी के इस तत्कालिक सरकार को अनेक देशों ने मान्यता भी प्रदान की।

"आजाद हिन्द तत्कालिक (provisional) सरकार" के निर्माण के साथ ही नेताजी ने भारतीयों को एकसूत्र में बँध कर आजाद हिन्द फौज के तत्वावधान में ब्रिटिश सरकार के विरुद्ध सशस्त्र युद्ध का शंखनाद भी कर दिया। मलाया, थाइलैंड तथा बर्मा में बसे भारतीयों ने नेताजी के युद्ध के प्रस्ताव का उत्साहपूर्वक स्वागत किया और बड़ी संख्या में भारतीय आजाद हिन्द फौज में भर्ती होने लगे। अनेक भारतीयों ने आजाद हिन्द फौज को सोना, चाँदी, गहने, कपड़े आदि की सहायता प्रदान की, महिलाओं ने अपने जेवरात तक उतार कर आजाद हिन्द फौज को समर्पित कर दिए।

भारतीयों से प्राप्त उसी धन से अप्रैल 1944 तक रंगून में आजाद हिन्द बैंक की स्थापना भी हो गई।



Thursday, January 22, 2015

चंद शेर


तुम्हें गैरों से कब फुरसत हम अपने ग़म से कब खाली
चलो बस हो गया मिलना ना तुम खाली ना हम खाली

अंदाज अपना देखते हैं आईने में वो
और ये भी देखते हैं कोई देखता ना हो

उधर ज़ुल्फों में कंघी हो रही है, खम निकलता है
इधर रुक रुक के खिच खिच के हमारा दम निकलता है
इलाही खैर हो, उलझन पे उलझन बढ़ती जाती है
ना उनका खम निकलता है, ना हमारा दम निकलता है

कितने नादाँ हैं तेरे भूलने वाले कि तुझे
याद करने के लिए उम्र पड़ी हो जैसे

दर्द-ओ-ग़म का ना रहा नाम तेरे आने से
दिल को क्या आ गया आराम तेरे आने से

हमको किसके ग़म ने मारा, ये कहानी फिर सही
किसने तोड़ा दिल हमारा, ये कहानी फिर सही
दिल के लुटने का सबब पूछो न सबके सामने
नाम आएगा तुम्हारा, ये कहानी फिर सही

कि तू भी याद  नहीं आता ये तो होना था
गए दिनों को सभी को भुलाना होता है

आदमी आदमी को क्या देगा, जो भी देगा वही खुदा देगा
जिंदगी को क़रीब से देखो, इसका चेहरा तुम्हें रुला देगा

अपने मंसूबों को नाकाम नहीं करना है
मुझको इस उम्र में आराम नहीं करना है