धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Saturday, September 15, 2007

धान के देश में - 7

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लेखक स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया (छत्तीसगढ़ के जन-जीवन पर आधारित प्रथम आंचलिक उपन्यास) - 7 - दीन दयाल बूढ़े हो चुके थे। वे अपने आँगन में आराम क...
Friday, September 14, 2007

धान के देश में - 6

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लेखक स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया (छत्तीसगढ़ के जन-जीवन पर आधारित प्रथम आंचलिक उपन्यास) - 6 - सिकोला पहुँच कर राजवती ने नये जीवन में पैर रखे। उ...
Thursday, September 13, 2007

धान के देश में - 5

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लेखक स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया (छत्तीसगढ़ के जन-जीवन पर आधारित प्रथम आंचलिक उपन्यास) - 5 - राजवती के ब्याह के समय दीनदयाल का बेटा श्यामलाल भ...
Wednesday, September 12, 2007

धान के देश में - 4

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लेखक स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया (छत्तीसगढ़ के जन-जीवन पर आधारित प्रथम आंचलिक उपन्यास) - 4 - देखते-देखते सात-आठ साल बीत गये। राजवती गाँव में स...
Tuesday, September 11, 2007

धान के देश में - 3

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लेखक स्व. श्री हरिप्रसाद अवाधिया (छत्तीसगढ़ के जन-जीवन पर आधारित प्रथम आंचलिक उपन्यास) -3 - बिरझू था तो दीनदयाल का नौकर। पर उसके कुटुम्ब के प...
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