धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Friday, October 26, 2007
मेघदूत
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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) हे मेघ खण्ड, बनो तुम दूत प्रचण्ड, सन्देशा ले जावो- जिसे देना है- उसके ही हाथों में दे आवो- क्योंकि- ...
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Monday, October 22, 2007
मैं विद्वान हूँ
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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) मैं विद्वान हूँ, ज्ञानवान हूँ, तोता मुझसे डरता है; डरना ही होगा उसको क्योंकि, जितना मैं रटता हूँ, क्...
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Sunday, October 21, 2007
सद्भाव
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(विजयादशमी के अवसर पर स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित एक और कविता) 'सद्भाव' एक सुन्दर शब्द है, पर आजकल यह शब्द- शब्दकोश की शोभा मा...
Saturday, October 20, 2007
राष्ट्रभाषा के उद्गार
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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) मैं राष्ट्रभाषा हूँ - इसी देश की राष्ट्रभाषा, भारत की राष्ट्रभाषा संविधान-जनित, सीमित संविधान में, अ...
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Friday, October 19, 2007
जय दुर्गे मैया
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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) जय अम्बे मैया, जय दुर्गे मैया, जय काली, जय खप्पर वाली। वरदान यही दे दो माता, शक्ति-भक्ति से भर जावें...
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