धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Saturday, November 3, 2007

मैं भी तुमसे दूर रहूँगी

›
(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) दूर रहा करते हो मुझसे, मैं भी तुमसे दूर रहूँगी; होगा इससे कष्ट मुझे जो, तो उसको चुपचाप सहूँगी। स्पर्...
Tuesday, October 30, 2007

गीत

›
(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) तुम दूर भी हो, तुम पास भी हो; मुझे निराश सदा तुम करती, फिर भी तुम मेरी आश ही हो, तुम दूर भी हो, तुम ...
3 comments:
Friday, October 26, 2007

मेघदूत

›
(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) हे मेघ खण्ड, बनो तुम दूत प्रचण्ड, सन्देशा ले जावो- जिसे देना है- उसके ही हाथों में दे आवो- क्योंकि- ...
1 comment:
Monday, October 22, 2007

मैं विद्वान हूँ

›
(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) मैं विद्वान हूँ, ज्ञानवान हूँ, तोता मुझसे डरता है; डरना ही होगा उसको क्योंकि, जितना मैं रटता हूँ, क्...
1 comment:
Sunday, October 21, 2007

सद्‍भाव

›
(विजयादशमी के अवसर पर स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित एक और कविता) 'सद्‍भाव' एक सुन्दर शब्द है, पर आजकल यह शब्द- शब्दकोश की शोभा मा...
‹
›
Home
View web version

मेरे बारे में -

  • Admin
  • Unknown
Powered by Blogger.