धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Saturday, January 5, 2008

नया साल है

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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) नया साल है- लेकिन कौन खुशहाल है? जो पहले चलता था वही अब भी बहाल है। नये वर्ष में- क्या स्वभाव बदल जा...
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Friday, January 4, 2008

ये का होथै छत्तीसगढ़ में

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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित छत्तीसगढ़ी कविता) कहाँ बिलागै गोबर खाद अब आगै फास्फेट के जमाना, खेती-बारी चौपट हो गै, फुटहा करम के ताना-बाना...
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Thursday, January 3, 2008

छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया

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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित छत्तीसगढ़ी कविता) छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया अड़बढ़िया खेती करथँयँ, झटपटइया कूकुर मन के सेती चुरमुरा के लांघन मरथँ...
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Wednesday, January 2, 2008

नया साल तुम क्या लाये हो?

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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) नया साल तुम क्या लाये हो? विश्व-शान्ति है क्या तुममें? या उर में विस्फोट छियाये हो? नया साल तुम क्या...
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Thursday, December 6, 2007

या देवी सर्व भूतेषु

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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) या देवी सर्व भूतेषु 'कैब्रे' रूपेण संस्थिता। हे देवी, तुम 'कैब्रे' बन कर, दिल दिल से...
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