धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Saturday, November 29, 2008

युवकों को वहशी दरिंदे बनाने वाले होते हैं महाकायर

›
क्यों बार बार सामने आता है आतंकवाद का घिनौना चेहरा? क्यों होते हैं बमों के धमाके? क्योंकि आज युवावर्ग दिशाहीन हो गया है और उसकी दिशाहीनत...
3 comments:
Saturday, November 22, 2008

यदि कम्प्यूटर के हार्डड्राइव्ह्स न खुलें तो...

›
"मेरे कम्प्यूटर के हार्डड्राइव्ह्स नहीं खुल रहे हैं।" कल मेरे एक परिचित ने आकर मुझसे कहा, "क्या आप इसे ठीक कर सकते हैं?"...
Monday, November 17, 2008

हमने भी खोल लिया अपना आनलाइन ई-बुक स्टोर

›
बहुत दिनों से जानने की इच्छा थी कि क्या वाकइ आनलाइन स्टोर से कुछ कमाया जा सकता है? इसीलिये आज से हमने भी अपना एक आनलाइन ई-बुक स्टोर खोल लिय...
1 comment:
Saturday, November 15, 2008

ये चंदा रूस का ना ये जापान का

›
ये चंदा रूस का ना ये जापान का ना ये अमरीकन प्यारे ये तो है हिन्दुस्तान का ! जी हाँ, भारत का पहला मानव रहित अंतरिक्ष यान, चंद्र...
2 comments:
Monday, November 10, 2008

आखिर हिन्दी ब्लोग्स सामान्य पाठकों को कब आकर्षित करेंगे?

›
हिन्दी ब्लोग्स की टिप्पणियों को पढ़ कर यही प्रतीत होता है कि को आज भी केवल हिन्दी ब्लोगर्स ही एक दूसरे के ब्लोग्स को पढ़ते हैं। सामान्य पाठकों...
9 comments:
‹
›
Home
View web version

मेरे बारे में -

  • Admin
  • Unknown
Powered by Blogger.