धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Saturday, January 3, 2009
हैंडराइटिंग ऐसा कि जैसे चींटे को स्याही में डुबाकर कागज पर रेंगा दिया हो
›
क्या आप कभी टायपिस्ट रहे हैं और अलग अलग लोगों की हैंडराइटिंग में लिखे गये पत्रों से आपका पाला पड़ा है? अरे मैं भी कैसी मूर्खता की बातें कर रह...
4 comments:
Thursday, January 1, 2009
पैसे पीटो ब्लोग बेचकर
›
जी हाँ, ब्लोग बेच कर अच्छी खासी रकम कमाई जा सकती है। आजकल ब्लोग बेचना, जिसे कि blog flipping कहा जाता है, इंटरनेट मारकेटिंग इंडस्ट्री का खास...
5 comments:
Tuesday, December 30, 2008
बाप दादाओं की तस्वीरों को निकाल कर फेंक दो
›
"हिन्दी के प्राचीनतम रूप और उसके प्राचीन साहित्य को अजाबघर में रख दो। उसकी अब कोई आवश्यकता नहीं।" दिल खटास से भर गया है ऐसी बात पढ़...
4 comments:
Thursday, December 25, 2008
हमें गलतफहमी (misunderstanding) से बचना है
›
ज्ञानदत्त जी के पोस्ट "वर्तमान पीढ़ी और ऊब" के प्रतिक्रियास्वरूप लिखे गये कुछ पोस्ट मैने पढ़े ( ज्ञानदत्त जी से प्रेरित...
4 comments:
Tuesday, December 23, 2008
मेरे ब्लॉग की पाठक संख्या क्यों कम है?
›
और किसी के मन में यह प्रश्न उठे या न उठे पर मेरे मन में तो प्रायः ही यह प्रश्न उठता है कि मेरे ब्लॉग की पाठक संख्या क्यों कम है? मैं यह समझत...
13 comments:
‹
›
Home
View web version