धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Wednesday, January 14, 2009

ये कैसी हिन्दी है?

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कैसी हिन्दी है ये, शायद ज्ञानदत्त जी की भाषा में  यन्त्र ट्रांस्लेटीय हिन्दी हो। जी हाँ, जरा नीचे दर्शाये हिन्दी भाषा का अवलोकन करें Adsens...
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Saturday, January 3, 2009

हैंडराइटिंग ऐसा कि जैसे चींटे को स्याही में डुबाकर कागज पर रेंगा दिया हो

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क्या आप कभी टायपिस्ट रहे हैं और अलग अलग लोगों की हैंडराइटिंग में लिखे गये पत्रों से आपका पाला पड़ा है? अरे मैं भी कैसी मूर्खता की बातें कर रह...
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Thursday, January 1, 2009

पैसे पीटो ब्लोग बेचकर

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जी हाँ, ब्लोग बेच कर अच्छी खासी रकम कमाई जा सकती है। आजकल ब्लोग बेचना, जिसे कि blog flipping कहा जाता है, इंटरनेट मारकेटिंग इंडस्ट्री का खास...
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Tuesday, December 30, 2008

बाप दादाओं की तस्वीरों को निकाल कर फेंक दो

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"हिन्दी के प्राचीनतम रूप और उसके प्राचीन साहित्य को अजाबघर में रख दो। उसकी अब कोई आवश्यकता नहीं।" दिल खटास से भर गया है ऐसी बात पढ़...
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Thursday, December 25, 2008

हमें गलतफहमी (misunderstanding) से बचना है

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ज्ञानदत्त जी के पोस्ट "वर्तमान पीढ़ी और ऊब" के प्रतिक्रियास्वरूप लिखे गये कुछ पोस्ट मैने पढ़े ( ज्ञानदत्त जी से प्रेरित...
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