धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Friday, February 26, 2010
बुद्धू बढ़ गया ब्लोगिंग कर के हाँ जी हाँ जी कहना
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कुतिया ले गई बाघ को धर के, हाँ जी हाँ जी कहना। बुद्धू बढ़ गया ब्लोगिंग कर के, हाँ जी हाँ जी कहना॥ कोई कविता करे पोस्ट में, कोई लिखे कहानी। को...
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Thursday, February 25, 2010
आप तो बस लिख दीजिये ... आपने क्या लिखा है यह आपके टिप्पणीकर्ता खुद बता देंगे
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ये मैं नहीं कह रहा हूँ बल्कि लिख्खाड़ानन्द जी के द्वारा हमें दिया गया गुरु मन्त्र है। उनका कहना है कि पोस्ट लिखने के लिये यह समझने की जरूरत न...
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Tuesday, February 23, 2010
खुद ऊपर नहीं जा सकते तो क्या हुआ टाँग खींच कर ऊपर वाले को नीचे तो ला सकते है
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टॉप याने कि सर्वोच्च! टॉप में रहने की चाहत भला किसे नहीं होती। पर ऊपर चढ़ना हरेक के बस की बात नहीं है। फिर क्या करें? सामने वाला तो ऊपर ही ऊप...
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Monday, February 22, 2010
बेवकूफ ब्लोगर अब टिप्पणी पर भी पोस्ट निकालने लग गये हैं
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"नमस्कार लिख्खाड़ानन्द जी!" "नमस्काऽर! आइये आइये टिप्पण्यानन्द जी!" "क्या बात है लिख्खाड़ानन्द जी, कुछ परेशान से लग र...
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40000 हजार से 1411 ... कैसे बजा बाघों का 12
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बाघ ! वही बाघ जिसका मुँह खोलकर बालक भरत, जी हाँ दुष्यन्त और शकुन्तला का महान पुत्र भरत जिसके कारण हमारे देश का नाम भारतवर्ष हुआ, ने उसके दाँ...
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