धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Saturday, March 6, 2010
कौवा स्नान ... सर्वोत्तम स्नान ...
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चाहे ठंड का मौसम हो या बरसात के दिन हों या फिर ग्रीष्म ऋतु ही क्यों न हो, कुछ लोग ऐसे होते हैं जिन्हें अपने शरीर से पानी के छू जाने से भी बह...
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Friday, March 5, 2010
ललित जी ने उचकाया ... हमने फाग गाया
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फाग तो बहुत सारे पढ़े आपने, लीजिये आज रंगपंचमी के दिन सुन भी लीजिये। बहुत बेसुरा गला है हमारा पर क्या करें दो पैग लगाने के बाद ललित जी ने उ...
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Thursday, March 4, 2010
एक छोटी सी खुशी में आपको शामिल करना चाहता हूँ
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कहते है कि "दुःख बाँटने से आधा हो जाता है और खुशी बाँटने से चौगुनी हो जाती है" । इसलिये मैं भी आप लोगों के साथ अपनी एक खुशी बाँटना...
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क्या हिन्दी से कमाई की उम्मीद है?
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मेरे पास प्रायः मेल आते रहते हैं हिन्दी से कमाई के विषय में जानकारी पूछने के लिये। मेल भेजने वालों में से कुछ ब्लोगर भी होते हैं और कुछ नही...
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Wednesday, March 3, 2010
ठेलना तो कचरे को पड़ता है ... जल को ठेलने की आवश्यकता ही नहीं होती
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आपने गंदी नाली के कचरे को बहाने के लिये उसे ठेलते हुए अवश्य ही देखा होगा किन्तु क्या कभी आपने नदी निर्झर-आदि के जल को प्रवाहित होने के लिये ...
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