धान के देश में!

जी.के. अवधिया का ब्लॉग

Saturday, March 13, 2010

पानी पीना छान के चेला बनाना जान के

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पुराने समय में गुरु लोग चेला बनाया करते थे किन्तु आज के युग में चेले लोग ही गुरु बनाते हैं। उन दिनों गुरु लोग चेला बनाते थे ज्ञान देने के लि...
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Friday, March 12, 2010

मैं चला मैं चला ....

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सम्भालो अपने इस ब्लोगिस्तान को। अब मेरी यहाँ कुछ भी जरूरत नहीं है। मेरे कुछ कह देने से बहुत से लोगों का दिल दुख जाता है यहाँ पर। तो फिर मैं ...
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Thursday, March 11, 2010

व्यथा बड़े गुरूजी की

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चेलों ने परेशान कर रखा है बड़े गुरूजी को। सारे चेले उनके ऊपर "मान ना मान मैं तेरा मेहमान" बन कर पिल पड़े हैं। रोज ऐसा पोस्ट लिख देत...
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Wednesday, March 10, 2010

डॉक्टर हैं पर क्यों दे अपने ब्लोग में डॉक्टरी जानकारी? ... बेवकूफ समझ रखा है हमें?

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"यार, ठीक है कि तुम अपने ब्लोग में अपनी कविताएँ लिखते हो। पर तुम चिकित्सक भी हो। क्यों नहीं चिकित्सा सम्बन्धी जानकारी वाला अपना एक और ब...
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Tuesday, March 9, 2010

ये बुड्ढा तो सठियाने की सीमा पार कर गया है

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सठियाने की भी एक सीमा होती है पर ये बुड्ढा तो सठियाने की सीमा पार कर गया है। कब्र में पाँव लटकाये बैठा है पर ब्लोगिंग का शौक नहीं गया। है त...
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