धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Saturday, March 20, 2010
विज्ञापन देखकर कमाई ... पहला चेक मिला
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शुक्र है कि विज्ञापन देखकर कुछ तो कमाई होने लग गई है और मेरा पहला चेक मुझे मिल चुका है। विज्ञापन देखकर कमाई से मुझे रु.471/-. नगद राशि का...
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Friday, March 19, 2010
बेचारी हिन्दी ... ये वो थाली है जिसमें लोग खाते हैं और फिर उसी में छेद करते हैं
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अंग्रेजी के 26 अक्षर तो रटे हुए हैं आपको, पूछने पर तत्काल बता देंगे। किन्तु यदि मैं पूछूँ कि हिन्दी के बावन अक्षर आते हैं आपको तो क्या जवाब ...
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Thursday, March 18, 2010
टॉप ब्लोगर रहस्य
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"नमस्कार लिख्खाड़ानन्द जी!" "नमस्काऽर! आइये आइये टिप्पण्यानन्द जी!" "लिख्खाड़ानन्द जी! आप तो ब्लोगिंग के आसमान की ऊँच...
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Wednesday, March 17, 2010
ब्लोगवाणी के द्वारा दुर्भाव का जहर उगलने वाले ब्लोग्स की सदस्यता बनाये रखने का क्या औचित्य है?
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हिन्दी ब्लोग संकलकों में ब्लोगवाणी सर्वाधिक लोकप्रिय है। यह प्रायः समस्त हिन्दी ब्लोग्स के अपडेट्स को एक ही स्थान पर दिखाता है और अधिकांश हि...
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जिसके अपने खुद के घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों के घरों में पत्थर नहीं फेंका करते
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शीशा याने कि काँच ... बहुत नाजुक होता है शीशा! इसीलिये कहते हैं कि "जिसके अपने खुद के घर शीशे के होते हैं, वे दूसरों के घरों में पत्थर ...
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