धान के देश में!
जी.के. अवधिया का ब्लॉग
Saturday, August 7, 2010
लगी आज सावन की फिर वो झड़ी है
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रात के सन्नाटे में बरसते पानी की टिपिर-टिपिर ध्वनि! आंगन में लगी रातरानी के फूलों की भीनी-भीनी सुवास! पड़ोस के घर में चलती हुई टीवी से सुनाई ...
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Friday, August 6, 2010
ठुकराना मत मेरी विनती (गीत)
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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) मद भरे नयन की प्याली से, छलकाती हो मदहोशी; अधरों पर मुसकान खेलती, पर चुभती है खामोशी। गोल सुड...
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Thursday, August 5, 2010
हम भी कई बार वही काम करते हैं जिसे करके बहुत से लोग सफलतम व्यक्ति बन गये - याने कि चोरी!
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चोरी! शायद ही कोई व्यक्ति होगा जिसने अपने जीवन में कभी चोरी न की हो। कोई बचपने में घर के ही अचार चुराता है तो युवावस्था में किसी का दिल चु...
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Wednesday, August 4, 2010
मैं धार्मिक हूँ
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(स्व. श्री हरिप्रसाद अवधिया रचित कविता) मैं धार्मिक हूँ, मैं मार्मिक हूँ, मत्था टेका करता हूँ, उग्र कभी बन जाता हूँ तब, शस्त्र इकट्ठा क...
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Monday, August 2, 2010
हिन्दी ब्लोगिंग की महत्वपूर्ण बातें
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किसी भी नये ब्लोगर को उसके पहले ही पोस्ट पर इतना स्वागत् और इतनी वाहवाही मिलती है जितनी कि उसे अपने जीवन में पहले कभी न मिली हो! ब्लोगरों क...
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